US Universities and Indian Students: सख्त वीजा नियमों के साथ-साथ बढ़ती फीस, और पढ़ाई के बाद नौकरी की तलाश की वजह से अमेरिकी विश्वविद्यालयों का आकर्षण भारतीय छात्रों के बीच इस बार कम देखने को मिल रहा है. जहां, भारतीय छात्र अब जर्मनी, फ्रांस और आयरलैंड जैसे देशों को पहली प्राथमिकता दे रहे हैं. इसके अलावा करियर के ज्यादा सुरक्षित अवसर भी देखने को मिल रहे हैं.
सख्त वीजा नीतियां बनी परेशानी
दरअसल, अमेरिकी प्रशासन के तहत वीजा नियमों में काफी सख्ती देखने को मिल रही है. जहां, भारतीय छात्रों के लिए F-1 वीजा की अस्वीकृति दर हाल के सालों में च्चतम स्तर (लगभग 41 प्रतिशत से 45 प्रतिशत) पर देखने को मिली है. इसके अलावा वीजा स्लॉट की भारी कमी की सुविधा के खत्म होने से छात्रों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इन सबके बावजूद भी अब आवेदकों के डिजिटल फुटप्रिंट और सोशल मीडिया गतिविधि की लगातार जांच की जा रही है, जिससे यह प्रक्रिया पहले के मुकाबले और भी ज्यादा कठिन हो गया है.
क्या बढ़ता आर्थिक बोझ बना मुसीबत?
जानकारी के मुताबिक, अमेरिका में शिक्षा की लागत लगातार तेजी से बढ़ती जा रही है. जहां, नए नियमों के तहत अब छात्रों को $250 की ‘वीजा इंटीग्रिटी फीस’ और अन्य अतिरिक्त शुल्क देने की जरूरत पड़ रही है. इतना ही नहीं, नियोक्ताओं (Employers) के लिए H-1B प्रायोजन (Sponsorship) शुल्क में भारी बढ़ोतरी की वजह से अमेरिकी कंपनियों ने विदेशी स्नातकों को नौकरी देने में सबसे ज्यादा कटौती देने का काम किया है.
रहने की अवधि पर नई सीमाएं की गई लागू
पहले छात्र ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ (D/S) के तहत जब तक पढ़ रहे थे, तब तक रह सकते थे. लेकिन अब कुछ बदलाव किए गए हैं. जहां, ‘फिक्स्ड पीरियड ऑफ स्टे’ के प्रस्ताव ने इसे पूरी तरह से सीमित करने की कोशिश की है. तो वहीं, अब कई छात्रों को सिर्फ 4 सालों का वीजा दिया जा रहा है, जिससे (PhD) या लंबे कोर्स करने वालों के लिए एक नई चुनौती देखने को मिल रही है.
भारतीय छात्र किन देशों का कर रहे हैं रुख?
तो वहीं, अब भारतीय छात्र अब उन देशों की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जहां पढ़ाई सबसे ज्यादा सस्ती है और पीआर को लेकर कई नियम लागू किए गए हैं. इतना ही नहीं, अगर जर्मनी जैसे देश की बात करें तो, यहां साल 2024-25 में भारतीय आवेदनों में 32 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी देखने को मिली है.
तो वहीं, यूरोप और मिडिल ईस्ट जैसे देश जिसमें आयरलैंड, फ्रांस और यूएई जैसे देशों में अब भारतीय छात्रों को तेजी से आकर्षित करने के लिए आसान वीजा और छात्र-अनुकूल की नीतियों को तेजी से अपनाया जा रहा है.