India AI Summit 2026: नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 शुक्रवार को ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को अपनाने के साथ संपन्न हुआ. इस घोषणापत्र पर 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने अपनी सहमति जताई है. इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य एक ऐसी AI व्यवस्था बनाना है जो भरोसेमंद, लचीली और कुशल हो. इस घोषणापत्र के जरिए दुनिया भर के देशों ने माना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का लाभ किसी एक वर्ग तक सीमित न रहकर पूरी मानवता को समान रूप से मिलना चाहिए.
भारत की बढ़ती धमक
मालूम हो कि 18 से 20 फरवरी तक चले इस सम्मेलन में 5 लाख से अधिक लोग शामिल हुए. इसमें दुनिया भर के नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों और तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया. इस आयोजन ने वैश्विक स्तर पर AI के नियम और बुनियादी ढांचे को आकार देने में भारत की भूमिका को और मजबूत किया है.
घोषणापत्र की बड़ी बातें
इस घोषणापत्र में ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर जोर दिया गया है. इसमें AI संसाधनों के लोकतंत्रीकरण, आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण, सुरक्षित AI और सामाजिक सशक्तिकरण जैसे 7 क्षेत्रों में काम करने का संकल्प लिया गया है. केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत ने इस क्षेत्र में 250 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता हासिल की है. इस घोषणापत्र पर अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, इजरायल, कनाडा, रूस, सऊदी अरब, सिंगापुर और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख देशों ने हस्ताक्षर किए हैं.
मानवीय दृष्टिकोण पर जोर
आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस समिट को ‘शानदार सफलता’ बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘ह्यूमन-सेंट्रिक’ (मानव-केंद्रित) AI विजन अब पूरी दुनिया को पसंद आ रहा है. दुनिया इस बात पर सहमत है कि AI तकनीक और सुविधाएं समाज के हर व्यक्ति तक पहुँचनी चाहिए. कुल मिलाकर, इस समिट ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य की तकनीक केवल मशीनों के बारे में नहीं, बल्कि इंसानी बेहतरी के बारे में होनी चाहिए.