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UN में भारत ने ‘आतंक के आका’ पाकिस्तान को दिखाया आईना! कश्मीर और सिंधु जल संधि पर जमकर लताड़ा

India Pakistan UN Clash: संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत ने आतंक के आका पाकिस्तान को जमकर लताड़ा है. इस दौरान भारत ने आतंक, कश्मीर और सिंधु जल संधि पर खुल कर अपनी बात रखी.

Written By: Shristi S
Last Updated: January 27, 2026 15:31:42 IST

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India slams Pakistan at UN: भारत ने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर जमकर लताड़ा है और आतंकवाद के मुद्दे पर उसके दोहरे मापदंडों को उजागर किया गया. भारत ने साफ तौर पर कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को सही ठहराने के लिए इस अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल नहीं कर सकता और  पाकिस्तान को भारत के अंदरूनी मामलों पर टिप्पणी करने का कोई हक नहीं है. भारत ने साफ कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाक ने अंतराराष्ट्रीय मंचों से मांगी दया की भीख

भारत ने संयुक्त राष्ट्र को बताया कि पिछले कई दशकों में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी हमलों में हजारों भारतीय नागरिकों की जान चली गई है. भारत ने यह भी साफ किया कि किसी भी हालत में आतंकवाद को सामान्य नहीं बनाया जा सकता. भारत ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पाकिस्तान खुद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मदद और दया की भीख मांग रहा था, जबकि वह सालों से भारत के खिलाफ आतंकवाद का इस्तेमाल एक नीति के तौर पर कर रहा था.

सिंधु जल संधि पर भारत ने क्या कहा?

भारत ने कहा कि उसने 65 साल पहले सद्भावना, दोस्ती और अच्छे पड़ोसी संबंधों की भावना से सिंधु जल संधि को स्वीकार किया था. हालांकि, पिछले साढ़े छह दशकों में, पाकिस्तान ने लगातार इस संधि की भावना का उल्लंघन किया है, जिसमें भारत के खिलाफ तीन युद्ध लड़ना और हजारों आतंकवादी हमले करना शामिल है. भारत ने समझाया कि उसे सिंधु जल संधि को तब तक निलंबित करने का फैसला लेना पड़ा, जब तक पाकिस्तान भरोसेमंद और साफ तौर पर सीमा पार आतंकवाद और सभी तरह के आतंकवाद को खत्म नहीं कर देता.

भारत ने पाकिस्तान को कानून के शासन पर आत्मनिरीक्षण करने की सलाह दी, यह सुझाव देते हुए कि उसे पहले यह जांच करनी चाहिए कि उसकी सेना ने 27वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से संवैधानिक तख्तापलट कैसे किया और अपने शीर्ष सैन्य नेतृत्व को आजीवन छूट कैसे दी. भारत ने दोहराया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कदम नहीं उठाता, तब तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान के दावों पर भरोसा नहीं करना चाहिए. भारत ने यह साफ करते हुए अपनी बात खत्म की कि आतंकवाद को किसी भी रूप में सामान्य या सही नहीं ठहराया जा सकता.

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