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UAE की मस्जिदों में जनवरी 2026 से शुक्रवार की नमाज़ का नया समय लागू, क्या यातायात पर भी पड़ेगा इसका असर?

UAE की मस्जिदों में जनवरी 2026 से शुक्रवार की नमाज़ (Friday Prayer Timing) को लेकर नए नियमों (New Rules) को लागू किए जाएंगे. इस दौराम काम के घंटों के साथ-साथ यातायात पर भी भारी असर देखने को मिलेगा.

UAE Mosque Schedule:  UAE की मस्जिदों में जनवरी 2026 से शुक्रवार की नमाज़ को लेकर अब एक नया नियम लागू होने जा रहे है, जिसको लेकर काम करने के घंटे के साथ-साथ यातायात पर भी भारी असर देखने को मिलेगा. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने जनवरी 2026 से देश की सभी मस्जिदों में शुक्रवार की नमाज़ यानी जुम्मा के समय में बदलाव करने का बड़ा एलान किया है. यह फैसला निवासियों की जीवनशैली के साथ-साथ आवाजाही पर भी इसके भारी असर देखने को मिलेगा. 

जुम्मे की नमाज़ के समय में किया गया बदलाव

दरअसल, शुक्रवार का दिन UAE में साप्ताहिक अवकाश (वीकेंड) पैटर्न का सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, और नमाज़ के नए समय को लेकर लोगों में चिंता भी बनी हुई है. अगर नमाज़ का समय बाद में किया जाता है, तो निवासियों को अपनी वीकेंड की गतिविधियों के लिए ज्यादा समय मिल सकता है. 

क्या काम के घंटों पर भी पड़ेगा इसका बड़ा असर?

बात करें काम के घंटों के बारे में तो, अगर नमाज़ का समय काम के घंटों के दौरान पड़ता है तो, फिर कंपनियों और सरकारी संस्थानों को कर्मतारियों को नमाज़ के लिए जाने देने के साथ-साथ शेड्यूल में पूरी तरह से नए बदलाव करने में भी पड़ सकते हैं. इसके अलावा अगर नमाज़ का समय पहले या फिर बाद में पड़ता है तो, यह कार्य दिवस की निरंतरता (Continuity) को पहले से और भी ज्यादा बेहतर बन सकता है. यह खास रूप से उन संगठनों के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण होगा जो अर्ध-दिवसीय शुक्रवार मॉडल (Half Day Friday Model) पर पूरी तरह से काम करते हैं.

क्या यातायात पर भी पड़ सकता है इसका असर

काम के घंटों के साथ-साथ यातायात पर शुक्रवार की नमाज़ के समय के आसपास मस्जिदों के पास और प्रमुख सड़कों पर भी ट्रैफिक का ज्यादा बड़ सकता है. नए समय के लागू होने से पीक आवागमन का समय (Peak Commute Time) पूरी तरह से बदल जाएगा. इसके अलावा स्थानीय अधिकारियों को इस बदलाव को देखते हुए यातायात प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्थाओं को समायोजित (Adjust) करने में किसी भी तरह की परेशानी से सामना नहीं करना पड़ेगा. 

सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव पर पड़ सकता है असर

इसके अलावा नमाज़ के समय में बदलाव शुक्रवार की सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों के पैटर्न में भी पूरी तरह से बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे समुदाय स्तर पर छोटे-मोटे Adjust करने पड़ सकते हैं. दरअसल, यह कदम UAE के कार्य सप्ताह और सामुदायिक जीवन के साथ धार्मिक अनुष्ठानों को ज्यादा सुसंगत बनाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा भी हो सकता है, जिससे निवासियों के लिए जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) में  आने वाले समय में एक बड़ा सुधार देखा जा सकता है. 

Darshna Deep

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