MQ-9 Reaper Drone: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजराइल (Iran-Israel War) के बीच जारी जंग को शुरू हुए 17 दिन हो चुके हैं. ईरान, अमेरिका और इज़राइल एक से एक ताकतवर मिसाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके अलावा, इस जंग में ड्रोन का भी प्रमुखता से इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके पीछे की वजह यह है कि मिसाइल के मुकाबले ड्रोन सस्ता होता है. इसलिए ईरान मिसाइल की जगह पर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है. ईरान अपनी मिसाइल क्षमताओं के लिए मशहूर है, लेकिन अब ड्रोन उसकी ताकत का एक और मज़बूत स्तंभ बनकर उभरे हैं.
मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमले इस बात का जीता-जागता सबूत हैं. इसका एक हालिया उदाहरण दुबई है, जहां ईरान ने शहर के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला किया था. इस हमले में चार लोग घायल हो गए थे.इस बात की भी पुष्टि हो चुकी है कि दुबई के ऊपर दो ईरानी ड्रोनों को मार गिराया गया था. ईरान को यह एहसास हो गया है कि मिसाइल एक महंगा सौदा हैं, जबकि ड्रोन बहुत कम लागत पर लंबे समय तक निगरानी रखने और हमला करने, दोनों की क्षमता प्रदान करते हैं.
ईरान पूरी दुनिया को दिखा रहा ड्रोन की ताकत
कम लागत की वजह से ईरान मिसाइल की जगह पर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है. यही वजह है कि ईरान अब दुनिया के सामने अपनी ड्रोन तकनीक की ताकत का प्रदर्शन कर रहा है. हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद ईरान अभी तक दुनिया का सबसे शक्तिशाली ड्रोन विकसित नहीं कर पाया है.
किस देश के पास है दुनिया का सबसे शक्तिशाली ड्रोन?
फिलहाल, दुनिया का सबसे शक्तिशाली ड्रोन संयुक्त राज्य अमेरिका के पास है. इसे MQ-9 रीपर के नाम से जाना जाता है. इसने अपनी पहली उड़ान 2001 में भरी थी और 2007 में इसे आधिकारिक तौर पर अमेरिकी वायु सेना में शामिल कर लिया गया था. पिछले कुछ वर्षों में इस विमान में लगातार सुधार किए गए हैं, यही कारण है कि इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली ड्रोनों में से एक माना जाता है.
क्या है इस ड्रोन की खासियत?
MQ-9 रीपर के खासियतों की बात करें तो यह 27 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है. इसके अलावा, यह ड्रोन 1700 किलो तक हथियार, बम और मिसाइल उठा सकता है. इस ड्रोन का इस्तेमाल सिर्फ इंटेलिजेंस या सर्विलांस के लिए ही नहीं बल्कि सटीक हमले के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. यह ड्रोन एक साथ कई हथियार को ले जा सकता है.