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Shia vs Sunni: शिया और सुन्नी में क्या अंतर है, ईरान और इजराइल-अमेरिका जंग के बीच क्या ये टकराव मायने रखता है?

Israel Iran US War: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी जंग के बीच आइए जानते हैं कि शिया और सुन्नी में क्या फर्क होता है? दुनिया भर में किसकी आबादी सबसे अधिक है?

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: March 3, 2026 18:20:31 IST

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Shia vs Sunni: ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है. इसके बाद ईरान ने जवाबी हमला करना शुरू कर दिया है. ईरान न सिर्फ इजराइल पर हमला कर रहा है, बल्कि मिडिल ईस्ट के अन्य देशों मेें स्थित अमेरिकी बेस पर भी हमला कर रहा है. जिसकी वजह से ईरान पूरे मिडिल ईस्ट में पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गया है. मिडिल ईस्ट के अन्य मुस्लिम देशों की तरफ से ईरान का समर्थन नहीं किया जा रहा है. बल्कि मिडिल ईस्ट के अधिकतर देश अमेरिका और इजराइल की तरफ ही खड़े नजर आ रहै हैं.

इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है कि मिडिल ईस्ट में ईरान शिया मुस्लिम देश है. जबकि बाकी अन्य देश सुन्नी मुस्लिम देश हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि शिया और सुन्नी में क्या अंतर होता है?

सुन्नी और शिया में क्या अंतर है?

सुन्नी और शिया मुसलमान सबसे बुनियादी इस्लामी मान्यताओं और आस्था के सिद्धांतों को मानते हैं और इस्लाम में दो मुख्य सब-ग्रुप हैं. हालांकि, वे अलग-अलग हैं और यह अलगाव शुरू में आध्यात्मिक मतभेदों से नहीं, बल्कि राजनीतिक मतभेदों से पैदा हुआ था. सदियों से इन राजनीतिक मतभेदों ने कई अलग-अलग तरीकों और नज़रियों को जन्म दिया है जिनका आध्यात्मिक महत्व हो गया है.

उदाहरण के तौर पर समझने का प्रयास करें तो सुन्नी मुसलमान चुने हुए खलीफ़ाओं के अधिकार पर ज़ोर देते हैं, जबकि शिया मुसलमानों का मानना है कि लीडरशिप पैगंबर मुहम्मद के परिवार के पास ही रहनी चाहिए थी, खासकर उनके चचेरे भाई और दामाद अली के पास. इन मतभेदों के बावजूद, दोनों ग्रुप इस्लाम के मुख्य सिद्धांतों को मानते हैं.

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किन-किन देशों में सुन्नी मुस्लिम हैं?

सुन्नी मुसलमान पूरी दुनिया में मुसलमानों का 85% हिस्सा हैं. सऊदी अरब, मिस्र, यमन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, तुर्की, अल्जीरिया, मोरक्को और ट्यूनीशिया जैसे देश ज्यादातर सुन्नी हैं. ईरान और इराक में शिया मुसलमानों की अच्छी-खासी आबादी पाई जा सकती है. यमन, बहरीन, सीरिया और लेबनान में भी बड़ी शिया माइनॉरिटी कम्युनिटी हैं.

दुनिया के कुछ इलाकों में जहां सुन्नी और शिया आबादी एक-दूसरे के पास रहती है, वहां लड़ाई हो सकती है. उदाहरण के लिए, इराक और लेबनान में साथ रहना अक्सर मुश्किल होता है. धार्मिक मतभेद वहां की संस्कृति में इतने गहरे तक समाए हुए हैं कि असहिष्णुता अक्सर हिंसा की ओर ले जाती है.

ईरान और मिडिल ईस्ट के अन्य देशों में क्यों होता है टकराव?

ईरान ने इजराइल सहित गल्फ देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू किया है. ईरान ने गल्फ के कई देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे. ईरान की इस जवाबी कार्रवाई से लगभग पूरा मिडिल ईस्ट जंग की जद में आ गया है. सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात सहित गल्फ के कई देशों ने ईरान द्वारा किए जा रहे हमले पर जवाबी कार्रवाई करने की बात कही है.

ईरान क्यों पड़ा अलग-थलग?

ऐसे में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश पहले से ही ईरान के खिलाफ रहे हैं. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह दुनिया भर में मुस्लिम देशों के नेतृत्व करने को बताई जाती है. क्योंकि एक तरफ ईरान अपने आप को मुस्लिम देशों का रहनुमा मानता है. तो दूसरी तरफ सऊदी अरब मुस्लिम देशों का रहनुमा बनना चाहता है. इसी को लेकर दोनों देशों के बीच आपसी मनमुटाव चलता रहता है.

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इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है कि मिडिल ईस्ट में ईरान शिया मुस्लिम देश है. जबकि बाकी अन्य देश सुन्नी मुस्लिम देश हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि शिया और सुन्नी में क्या अंतर होता है?

सुन्नी और शिया में क्या अंतर है?

सुन्नी और शिया मुसलमान सबसे बुनियादी इस्लामी मान्यताओं और आस्था के सिद्धांतों को मानते हैं और इस्लाम में दो मुख्य सब-ग्रुप हैं. हालांकि, वे अलग-अलग हैं और यह अलगाव शुरू में आध्यात्मिक मतभेदों से नहीं, बल्कि राजनीतिक मतभेदों से पैदा हुआ था. सदियों से इन राजनीतिक मतभेदों ने कई अलग-अलग तरीकों और नज़रियों को जन्म दिया है जिनका आध्यात्मिक महत्व हो गया है.

उदाहरण के तौर पर समझने का प्रयास करें तो सुन्नी मुसलमान चुने हुए खलीफ़ाओं के अधिकार पर ज़ोर देते हैं, जबकि शिया मुसलमानों का मानना है कि लीडरशिप पैगंबर मुहम्मद के परिवार के पास ही रहनी चाहिए थी, खासकर उनके चचेरे भाई और दामाद अली के पास. इन मतभेदों के बावजूद, दोनों ग्रुप इस्लाम के मुख्य सिद्धांतों को मानते हैं.

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किन-किन देशों में सुन्नी मुस्लिम हैं?

सुन्नी मुसलमान पूरी दुनिया में मुसलमानों का 85% हिस्सा हैं. सऊदी अरब, मिस्र, यमन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, तुर्की, अल्जीरिया, मोरक्को और ट्यूनीशिया जैसे देश ज्यादातर सुन्नी हैं. ईरान और इराक में शिया मुसलमानों की अच्छी-खासी आबादी पाई जा सकती है. यमन, बहरीन, सीरिया और लेबनान में भी बड़ी शिया माइनॉरिटी कम्युनिटी हैं.

दुनिया के कुछ इलाकों में जहां सुन्नी और शिया आबादी एक-दूसरे के पास रहती है, वहां लड़ाई हो सकती है. उदाहरण के लिए, इराक और लेबनान में साथ रहना अक्सर मुश्किल होता है. धार्मिक मतभेद वहां की संस्कृति में इतने गहरे तक समाए हुए हैं कि असहिष्णुता अक्सर हिंसा की ओर ले जाती है.

ईरान और मिडिल ईस्ट के अन्य देशों में क्यों होता है टकराव?

ईरान ने इजराइल सहित गल्फ देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू किया है. ईरान ने गल्फ के कई देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे. ईरान की इस जवाबी कार्रवाई से लगभग पूरा मिडिल ईस्ट जंग की जद में आ गया है. सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात सहित गल्फ के कई देशों ने ईरान द्वारा किए जा रहे हमले पर जवाबी कार्रवाई करने की बात कही है.

ईरान क्यों पड़ा अलग-थलग?

ऐसे में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश पहले से ही ईरान के खिलाफ रहे हैं. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह दुनिया भर में मुस्लिम देशों के नेतृत्व करने को बताई जाती है. क्योंकि एक तरफ ईरान अपने आप को मुस्लिम देशों का रहनुमा मानता है. तो दूसरी तरफ सऊदी अरब मुस्लिम देशों का रहनुमा बनना चाहता है. इसी को लेकर दोनों देशों के बीच आपसी मनमुटाव चलता रहता है.

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