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Home > विदेश > ईरान छोड़कर कहां भागने की तैयारी में हैं खामेनेई? रिपोर्ट में हुआ हैरान करने वाला खुलासा; साथ जाएगा सर्वोच्च नेता का सबसे करीबी शख्स

ईरान छोड़कर कहां भागने की तैयारी में हैं खामेनेई? रिपोर्ट में हुआ हैरान करने वाला खुलासा; साथ जाएगा सर्वोच्च नेता का सबसे करीबी शख्स

Iran Protests:अगर ईरान में प्रर्दशन नहीं रोका जा सका तो खामेनेई देश छोड़ कर जा सकते हैं.

Written By: Divyanshi Singh
Last Updated: January 6, 2026 15:47:11 IST

Iran Protests: ईरान में लगातार विद्रोह बढ़ता जा रहा है. आर्थिक संकट से जुझ रहे इस देश के हजारो लोग सड़को पर उतर आएं हैं. इस हिंसक विद्रोह में अब तक 35 लोगों की मौत हो गई है. वहीं 1200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. वहीं अब खबर सामने आ रही है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई रूस भागने का प्लान बना रहे हैं. अगर ईरान में प्रर्दशन नहीं रोका जा सका तो खामेनेई देश छोड़ कर रूस जा सकते हैं.

बता दें कि ईरान में पिछले आठ दिनों से खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक अब तक  ईरान के 78 शहरों के 222 से ज्यादा स्थानों पर प्रदर्शन हो चुके हैं.

खुफिया रिपोर्ट में किया गया दावा 

ब्रिटिश अखबार द टाइम्स की एक खुफिया रिपोर्ट में इसका दावा किया गया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि सुप्रीम लीडर का प्लान है कि अगर देश में चल रहे प्रोटेस्ट उनके सिक्योरिटी फोर्स पर भारी पड़ते हैं, तो वे देश छोड़कर रूस चले जाएंगे.

एक इंटेलिजेंस सोर्स ने द टाइम्स को बताया कि अगर यह साफ हो जाता है कि प्रोटेस्ट को दबाने के लिए तैनात आर्मी और सिक्योरिटी फोर्स देश छोड़ रहे हैं या ऑर्डर नहीं मान रहे हैं तो 86 साल के अयातुल्ला अली खामेनेई अपने 20 साथियों और परिवार के साथ तेहरान से भाग जाएंगे.

‘प्लान B’ खामेनेई और उनके बहुत करीबी साथियों और परिवार के लिए है जिसमें उनके बेटे और नॉमिनेटेड वारिस मोजतबा भी शामिल हैं.

अयातुल्ला को हटाने की मांग

प्रोटेस्ट काफी हद तक देश की करेंसी के गिरने पर फोकस रहे हैं. वहीं कुछ प्रदर्शनकारी अयातुल्ला को हटाने की मांग कर रहे हैं. बेनी सब्ती के मुताबिक खामेनेई शायद मॉस्को भाग जाएंगे क्योंकि उनके पास यही एक ऑप्शन बचा है. बेनी सब्ती एक ऑपरेटिव थे जिन्होंने 1979 में इस्लामिक क्रांति के आठ साल बाद शासन से भागने के बाद दशकों तक इजराइली इंटेलिजेंस में काम किया था.

सूत्र ने कहा कि अयातुल्ला पुतिन को पसंद करते हैं जबकि ईरानी कल्चर रूसी कल्चर से ज़्यादा मिलता-जुलता है और इसलिए अगर उन्हें देश से भागने के लिए मजबूर किया गया तो वे रूस को चुनेंगे.

प्रदर्शनों की दबाने की कोशिशें नाकाम

सरकार विरोधी प्रदर्शनों की लहर को दबाने की तेहरान की कोशिशें अब तक नाकाम रही हैं. वहीं अब डोनाल्ड ट्रंप की प्रदर्शनों में दखल देने की धमकी से यह और भी मुश्किल हो गई है. अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को चेतावनी दी कि अगर तेहरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसक हमला करता है तो अमेरिका उनके बचाव में आएगा. ट्रंप ने ईरान को साफ तौर पर मिलिट्री हमले की धमकी देते हुए कहा कि अमेरिका की मिसाइलें तैयार हैं.

वहीं अधिकारियों और अंदर के लोगों ने सोमवार को कहा कि उनकी चेतावनी को बाद में अमेरिका द्वारा वेनेज़ुएला के प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो को पकड़ने से और भी मज़बूती मिली.

देश में आर्थिक संकट

पूरे देश में लोग गुस्से में है. इसका कारण आर्थिक संकट है. दिसंबर 2025 में ईरानी करेंसी, रियाल, US डॉलर के मुकाबले लगभग 1.45 मिलियन तक गिर गई, जो अब तक का सबसे निचला लेवल है. साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी हो गई है. महंगाई अपने पीक पर पहुंच गई है. खाने की चीज़ों की कीमतें 72% और दवाओं की कीमतें 50% बढ़ गई हैं. इसके अलावा. सरकार के 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव से जनता में बहुत गुस्सा है.

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ईरान छोड़कर कहां भागने की तैयारी में हैं खामेनेई? रिपोर्ट में हुआ हैरान करने वाला खुलासा; साथ जाएगा सर्वोच्च नेता का सबसे करीबी शख्स

Iran Protests:अगर ईरान में प्रर्दशन नहीं रोका जा सका तो खामेनेई देश छोड़ कर जा सकते हैं.

Written By: Divyanshi Singh
Last Updated: January 6, 2026 15:47:11 IST

Iran Protests: ईरान में लगातार विद्रोह बढ़ता जा रहा है. आर्थिक संकट से जुझ रहे इस देश के हजारो लोग सड़को पर उतर आएं हैं. इस हिंसक विद्रोह में अब तक 35 लोगों की मौत हो गई है. वहीं 1200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. वहीं अब खबर सामने आ रही है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई रूस भागने का प्लान बना रहे हैं. अगर ईरान में प्रर्दशन नहीं रोका जा सका तो खामेनेई देश छोड़ कर रूस जा सकते हैं.

बता दें कि ईरान में पिछले आठ दिनों से खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक अब तक  ईरान के 78 शहरों के 222 से ज्यादा स्थानों पर प्रदर्शन हो चुके हैं.

खुफिया रिपोर्ट में किया गया दावा 

ब्रिटिश अखबार द टाइम्स की एक खुफिया रिपोर्ट में इसका दावा किया गया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि सुप्रीम लीडर का प्लान है कि अगर देश में चल रहे प्रोटेस्ट उनके सिक्योरिटी फोर्स पर भारी पड़ते हैं, तो वे देश छोड़कर रूस चले जाएंगे.

एक इंटेलिजेंस सोर्स ने द टाइम्स को बताया कि अगर यह साफ हो जाता है कि प्रोटेस्ट को दबाने के लिए तैनात आर्मी और सिक्योरिटी फोर्स देश छोड़ रहे हैं या ऑर्डर नहीं मान रहे हैं तो 86 साल के अयातुल्ला अली खामेनेई अपने 20 साथियों और परिवार के साथ तेहरान से भाग जाएंगे.

‘प्लान B’ खामेनेई और उनके बहुत करीबी साथियों और परिवार के लिए है जिसमें उनके बेटे और नॉमिनेटेड वारिस मोजतबा भी शामिल हैं.

अयातुल्ला को हटाने की मांग

प्रोटेस्ट काफी हद तक देश की करेंसी के गिरने पर फोकस रहे हैं. वहीं कुछ प्रदर्शनकारी अयातुल्ला को हटाने की मांग कर रहे हैं. बेनी सब्ती के मुताबिक खामेनेई शायद मॉस्को भाग जाएंगे क्योंकि उनके पास यही एक ऑप्शन बचा है. बेनी सब्ती एक ऑपरेटिव थे जिन्होंने 1979 में इस्लामिक क्रांति के आठ साल बाद शासन से भागने के बाद दशकों तक इजराइली इंटेलिजेंस में काम किया था.

सूत्र ने कहा कि अयातुल्ला पुतिन को पसंद करते हैं जबकि ईरानी कल्चर रूसी कल्चर से ज़्यादा मिलता-जुलता है और इसलिए अगर उन्हें देश से भागने के लिए मजबूर किया गया तो वे रूस को चुनेंगे.

प्रदर्शनों की दबाने की कोशिशें नाकाम

सरकार विरोधी प्रदर्शनों की लहर को दबाने की तेहरान की कोशिशें अब तक नाकाम रही हैं. वहीं अब डोनाल्ड ट्रंप की प्रदर्शनों में दखल देने की धमकी से यह और भी मुश्किल हो गई है. अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को चेतावनी दी कि अगर तेहरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसक हमला करता है तो अमेरिका उनके बचाव में आएगा. ट्रंप ने ईरान को साफ तौर पर मिलिट्री हमले की धमकी देते हुए कहा कि अमेरिका की मिसाइलें तैयार हैं.

वहीं अधिकारियों और अंदर के लोगों ने सोमवार को कहा कि उनकी चेतावनी को बाद में अमेरिका द्वारा वेनेज़ुएला के प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो को पकड़ने से और भी मज़बूती मिली.

देश में आर्थिक संकट

पूरे देश में लोग गुस्से में है. इसका कारण आर्थिक संकट है. दिसंबर 2025 में ईरानी करेंसी, रियाल, US डॉलर के मुकाबले लगभग 1.45 मिलियन तक गिर गई, जो अब तक का सबसे निचला लेवल है. साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी हो गई है. महंगाई अपने पीक पर पहुंच गई है. खाने की चीज़ों की कीमतें 72% और दवाओं की कीमतें 50% बढ़ गई हैं. इसके अलावा. सरकार के 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव से जनता में बहुत गुस्सा है.

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