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UAE में 19 भारतीयों पर हुई बड़ी कार्रवाई, ईरान-इजराइल जंग को लेकर फैला रहे थे भ्रामक जानकारी

Iran US Israel War: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी जंग को लेकर यूएई की सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है. दरअसल, बताया जा रहा है कि अलग-अलग देशों के 35 लोग सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी साझा कर रहे थे. इसमें 19 भारतीय शामिल हैं.

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: March 16, 2026 12:32:20 IST

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UAE News: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 35 लोगों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है, जिनमें 19 भारतीय शामिल हैं. इन लोगों पर सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो पोस्ट करने का आरोप है जिनमें भ्रामक या मनगढ़ंत जानकारी थी. यह मामला पिछले महीने के आखिर में शुरू हुए मध्य-पूर्व युद्ध से जुड़ा है, जो तब शुरू हुआ जब अमेरिकी-इजरायली सेनाओं ने ईरान पर हवाई हमले किए थे.

UAE के अधिकारियों ने बताया कि इन संदिग्धों पर जल्द से जल्द मुक़दमा चलाया जाएगा. जांच में पता चला है कि इन्होंने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करके मौजूदा क्षेत्रीय तनाव से जुड़े छेड़छाड़ किए गए वीडियो और कहानियां फैलाई थीं.

क्यों हुई कार्रवाई?

जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई दो हिस्सों में की गई. ताजा सूची में अलग-अलग देशों के 25 लोग शामिल हैं, जिनमें 17 भारतीय हैं; इन्हें अलग-अलग धाराओं के तहत सूचीबद्ध किया गया है. यह उन 10 लोगों से अलग है, जिनमें दो भारतीय शामिल थे, जिनके नाम शनिवार को सामने आए थे और जिनकी गिरफ़्तारी का आदेश दिया गया था. इस पूरे मामले पर यूएई के अटार्नी जनरल डॉ. हमद सैफ अल शम्स का बयान सामने आया है.

जिसमें उन्होंने कहा कि यह कदम डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की कड़ी निगरानी के बाद उठाया गया है. इसका मक़सद मनगढ़ंत जानकारी और बनावटी सामग्री के प्रसार को रोकना है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक अशांति फैलाना और आम स्थिरता को कमज़ोर करना है.

अधिकारियों ने अपने बयान में क्या कहा?

UAE की आधिकारिक समाचार एजेंसी Wam के अनुसार बयान में कहा गया है कि जांच और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी से पता चला कि आरोपी तीन समूहों में बंटे हुए थे, जिन्होंने अलग-अलग तरह के काम किए. इनमें मौजूदा घटनाओं से जुड़े असली वीडियो क्लिप प्रकाशित करना, AI का इस्तेमाल करके मनगढ़ंत वीडियो बनाना और एक ऐसे देश को बढ़ावा देना शामिल था जो सैन्य आक्रामकता दिखाता है, साथ ही उसके नेतृत्व और सैन्य कार्रवाइयों का महिमामंडन करता है. आरोपियों का पहला समूह जिसमें 5 भारतीय, एक पाकिस्तानी, एक नेपाली, 2 फिलिपीनी और एक मिस्त्र का नागरिक शामिल था.

बताया जा रहा है कि इन आरोपियों ने ऐसे असली वीडियो क्लिप प्रकाशित और प्रसारित किए, जिनमें देश के हवाई क्षेत्र में मिसाइलों के गुज़रने, उन्हें रोके जाने या उनके टकराने से हुए असर को दिखाया गया था. उन्होंने उन लोगों के जमावड़े के भी वीडियो बनाए जो इन घटनाओं पर नज़र रख रहे थे; इन वीडियो में उन्होंने ऐसी कमेंट्री और साउंड इफ़ेक्ट जोड़े, जिनसे यह लगे कि कोई सक्रिय हमला हो रहा है, ताकि लोगों में घबराहट और अफरा-तफरी फैलाई जा सके.

अलग-अलग ग्रुप के लोगों पर लगा अलग-अलग आरोप

इसके अलावा, दूसरे ग्रुप में 7 लोग शामिल थे, जिनमें 5 भारतीय और नेपाल व बांग्लादेश से एक-एक व्यक्ति था. इन लोगों के बारे में बताया जा रहा है कि ये लोग एआई का इस्तेमाल कर बनाया गया मनगढंत विजुअल कंटेंट पब्लिश किया या देश के बाहर हुई घटनाओं के फुटेज को दोबारा फैलाया और झूठा दावा किया कि ये घटनाएं UAE के अंदर हुई थीं.

इसके अलावा, 6 लोगों के तीसरे ग्रुप में 5 भारतीय और एक पाकिस्तानी शामिल हैं. जिनपर पब्लिश किए गए कंटेंट के माध्यम से एक विरोधी देश (ईरान) और उसके राजनीतिक व सैन्य नेतृत्व का महिमामंडन करने तथा उसकी क्षेत्रीय सैन्य आक्रामकता को उपलब्धियों के तौर पर पेश करने का आरोप लगाया गया.

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Written By: Sohail Rahman
Last Updated: March 16, 2026 12:32:20 IST

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UAE News: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 35 लोगों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है, जिनमें 19 भारतीय शामिल हैं. इन लोगों पर सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो पोस्ट करने का आरोप है जिनमें भ्रामक या मनगढ़ंत जानकारी थी. यह मामला पिछले महीने के आखिर में शुरू हुए मध्य-पूर्व युद्ध से जुड़ा है, जो तब शुरू हुआ जब अमेरिकी-इजरायली सेनाओं ने ईरान पर हवाई हमले किए थे.

UAE के अधिकारियों ने बताया कि इन संदिग्धों पर जल्द से जल्द मुक़दमा चलाया जाएगा. जांच में पता चला है कि इन्होंने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करके मौजूदा क्षेत्रीय तनाव से जुड़े छेड़छाड़ किए गए वीडियो और कहानियां फैलाई थीं.

क्यों हुई कार्रवाई?

जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई दो हिस्सों में की गई. ताजा सूची में अलग-अलग देशों के 25 लोग शामिल हैं, जिनमें 17 भारतीय हैं; इन्हें अलग-अलग धाराओं के तहत सूचीबद्ध किया गया है. यह उन 10 लोगों से अलग है, जिनमें दो भारतीय शामिल थे, जिनके नाम शनिवार को सामने आए थे और जिनकी गिरफ़्तारी का आदेश दिया गया था. इस पूरे मामले पर यूएई के अटार्नी जनरल डॉ. हमद सैफ अल शम्स का बयान सामने आया है.

जिसमें उन्होंने कहा कि यह कदम डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की कड़ी निगरानी के बाद उठाया गया है. इसका मक़सद मनगढ़ंत जानकारी और बनावटी सामग्री के प्रसार को रोकना है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक अशांति फैलाना और आम स्थिरता को कमज़ोर करना है.

अधिकारियों ने अपने बयान में क्या कहा?

UAE की आधिकारिक समाचार एजेंसी Wam के अनुसार बयान में कहा गया है कि जांच और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी से पता चला कि आरोपी तीन समूहों में बंटे हुए थे, जिन्होंने अलग-अलग तरह के काम किए. इनमें मौजूदा घटनाओं से जुड़े असली वीडियो क्लिप प्रकाशित करना, AI का इस्तेमाल करके मनगढ़ंत वीडियो बनाना और एक ऐसे देश को बढ़ावा देना शामिल था जो सैन्य आक्रामकता दिखाता है, साथ ही उसके नेतृत्व और सैन्य कार्रवाइयों का महिमामंडन करता है. आरोपियों का पहला समूह जिसमें 5 भारतीय, एक पाकिस्तानी, एक नेपाली, 2 फिलिपीनी और एक मिस्त्र का नागरिक शामिल था.

बताया जा रहा है कि इन आरोपियों ने ऐसे असली वीडियो क्लिप प्रकाशित और प्रसारित किए, जिनमें देश के हवाई क्षेत्र में मिसाइलों के गुज़रने, उन्हें रोके जाने या उनके टकराने से हुए असर को दिखाया गया था. उन्होंने उन लोगों के जमावड़े के भी वीडियो बनाए जो इन घटनाओं पर नज़र रख रहे थे; इन वीडियो में उन्होंने ऐसी कमेंट्री और साउंड इफ़ेक्ट जोड़े, जिनसे यह लगे कि कोई सक्रिय हमला हो रहा है, ताकि लोगों में घबराहट और अफरा-तफरी फैलाई जा सके.

अलग-अलग ग्रुप के लोगों पर लगा अलग-अलग आरोप

इसके अलावा, दूसरे ग्रुप में 7 लोग शामिल थे, जिनमें 5 भारतीय और नेपाल व बांग्लादेश से एक-एक व्यक्ति था. इन लोगों के बारे में बताया जा रहा है कि ये लोग एआई का इस्तेमाल कर बनाया गया मनगढंत विजुअल कंटेंट पब्लिश किया या देश के बाहर हुई घटनाओं के फुटेज को दोबारा फैलाया और झूठा दावा किया कि ये घटनाएं UAE के अंदर हुई थीं.

इसके अलावा, 6 लोगों के तीसरे ग्रुप में 5 भारतीय और एक पाकिस्तानी शामिल हैं. जिनपर पब्लिश किए गए कंटेंट के माध्यम से एक विरोधी देश (ईरान) और उसके राजनीतिक व सैन्य नेतृत्व का महिमामंडन करने तथा उसकी क्षेत्रीय सैन्य आक्रामकता को उपलब्धियों के तौर पर पेश करने का आरोप लगाया गया.

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