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मिडिल ईस्ट में खत्म होगा जंग! ट्रंप ने ईरान के सामने रखी 15 शर्त, क्या मानेंगे मोजतबा खामेनेई?

Donald Trump: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी जंग को लेकर अब राहत भरी खबर सामने आ रही है. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जंग को खत्म करने के लिए 15 सूत्रीय सीजफायर प्लान का प्रस्ताव रखा है.

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: March 25, 2026 12:36:14 IST

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Iran Israel US War: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी जंग को लेकर राहत भरी खबर सामने आ रही है. दरअसल, पूरा मामला यह हैकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 15 सूत्रीय सीजफायर प्लान का प्रस्ताव दिया है. यह प्रस्ताव वॉशिंगटन (जिसे इजराइल का समर्थन हासिल है) और तेहरान के बीच संघर्ष शुरू होने के लगभग एक महीने बाद आया है. यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी सेना कथित तौर पर पश्चिम एशिया में कम से कम 1,000 अतिरिक्त सैनिक तैनात करने की तैयारी कर रही है.

यह प्रस्ताव पाकिस्तान में मध्यस्थों के माध्यम से तेहरान को सौंपा गया. पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बातचीत की मेज़बानी करने की पेशकश की है. गौरतलब है कि अधिकारियों ने ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ को बताया कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर कथित तौर पर अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम कड़ी बनकर उभरे हैं.

प्रस्ताव का प्रमुख जोर क्या है?

हालांकि, जानकारी के अनुसार इस प्रस्ताव का पूरा ब्योरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है. हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि इसका मुख्य जोर ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों पर है. गौरतलब है कि संघर्ष शुरू होने के बाद से ही इजराइल और अमेरिका, ईरान के मिसाइल सिस्टम, लॉन्च साइट्स और अन्य अहम बुनियादी ढांचों को निशाना बना रहे हैं. इसके बावजूद, तेहरान ने इजराइल और आस-पास के खाड़ी देशों पर मिसाइलें दागना जारी रखा है.

अधिकारियों ने क्या बताया?

अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि इस प्रस्ताव में समुद्री मार्गों का मुद्दा भी शामिल है. यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जो फारसी खाड़ी से तेल के वैश्विक आयात-निर्यात के लिए एक अहम रास्ता है, बंद पड़ा है. इससे तेल की आपूर्ति में कमी आई है और कीमतें बढ़ गई हैं.

ट्रंप के प्रस्ताव में क्या-क्या शामिल है?

  • समझौते पर चर्चा के लिए एक महीने का सीज़फ़ायर (युद्धविराम)
  • ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को पूरी तरह खत्म करना
  • अपने देश की सीमा के भीतर यूरेनियम संवर्धन (enrichment) को रोकना
  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खुला रखना सुनिश्चित करना
  • अपने पास जमा अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को ‘अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ (IAEA) को सौंप देना
  • नतान्ज़, इस्फ़हान और फ़ोर्डो स्थित प्रमुख परमाणु स्थलों को नष्ट करना और IAEA को वहां पूरी पहुंच देना
  • क्षेत्रीय प्रॉक्सी गतिविधियों (दूसरे देशों में अपने इशारे पर काम करने वाले गुटों की गतिविधियों) से पीछे हटना
  • अपने सहयोगी सशस्त्र गुटों को दिया जाने वाला समर्थन खत्म करना
  • मिसाइलों की मारक क्षमता और उनकी संख्या पर सीमाएं तय करना
  • भविष्य में मिसाइलों का इस्तेमाल पूरी तरह से केवल ‘आत्मरक्षा’ तक सीमित रखना

ईरान को मिलेगा ये लाभ

सीजफायर प्रस्ताव को स्वीकार करने के बदले में अमेरिका ने कथित तौर पर ये प्रस्ताव दिए हैं.

  • ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटा देना
  • ईरान के नागरिक परमाणु कार्यक्रम को समर्थन देना, जिसमें बुशेहर संयंत्र में बिजली उत्पादन में मदद करना भी शामिल है.
  • प्रतिबंधों को दोबारा लागू करने वाले ‘स्नैपबैक’ तंत्र को खत्म कर देना.

ईरान ने क्या कहा?

ईरानी सेना के खतम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम ज़ोल्फ़घारी ने बुधवार को कहा कि ऐसा लग रहा है कि ट्रंप खुद से ही बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जो खुद को वैश्विक महाशक्ति होने का दावा करते हैं, अगर वह ऐसा कर पाते तो इस मुश्किल से अब तक बाहर निकल चुके होते. अपनी हार को समझौते का नाम मत दीजिए. आपके खोखले वादों का दौर अब खत्म हो चुका है. क्या आपके अंदरूनी झगड़े इस हद तक पहुंच गए हैं कि तुम खुद से ही बातचीत कर रहे हो?

ईरान ने रखी ये मांग

ईरान की शीर्ष सैन्य कमान के प्रवक्ता मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही अलीबादी ने मंगलवार को कहा कि लड़ाई पूरी जीत मिलने तक जारी रहेगी. उनकी ये टिप्पणियां ट्रंप के उस दावे का खंडन करती प्रतीत हुईं कि ईरान शांति चाहता है और साथ ही ईरान के नेतृत्व को यह चेतावनी भी देती हैं कि किसी भी बातचीत के दौरान पीछे न हटें. हालांकि, कई रिपोर्टों में कहा गया है कि ईरान ने युद्ध खत्म करने पर सहमत होने के लिए 5 मुख्य मांगें रखी हैं.

  • संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का तत्काल अंत.
  • इस बात की गारंटी कि अमेरिका भविष्य में ईरान पर कोई सैन्य हमला नहीं करेगा.
  • संघर्ष के दौरान हुए नुकसान और क्षति के लिए आर्थिक मुआवजा.
  • होरमुज़ जलडमरूमध्य पर औपचारिक नियंत्रण.
  • ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बातचीत या प्रतिबंध नहीं; जिसे तेहरान एक ऐसी निवारक क्षमता मानता है जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता.

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Last Updated: March 25, 2026 12:36:14 IST

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यह प्रस्ताव पाकिस्तान में मध्यस्थों के माध्यम से तेहरान को सौंपा गया. पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बातचीत की मेज़बानी करने की पेशकश की है. गौरतलब है कि अधिकारियों ने ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ को बताया कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर कथित तौर पर अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम कड़ी बनकर उभरे हैं.

प्रस्ताव का प्रमुख जोर क्या है?

हालांकि, जानकारी के अनुसार इस प्रस्ताव का पूरा ब्योरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है. हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि इसका मुख्य जोर ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों पर है. गौरतलब है कि संघर्ष शुरू होने के बाद से ही इजराइल और अमेरिका, ईरान के मिसाइल सिस्टम, लॉन्च साइट्स और अन्य अहम बुनियादी ढांचों को निशाना बना रहे हैं. इसके बावजूद, तेहरान ने इजराइल और आस-पास के खाड़ी देशों पर मिसाइलें दागना जारी रखा है.

अधिकारियों ने क्या बताया?

अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि इस प्रस्ताव में समुद्री मार्गों का मुद्दा भी शामिल है. यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जो फारसी खाड़ी से तेल के वैश्विक आयात-निर्यात के लिए एक अहम रास्ता है, बंद पड़ा है. इससे तेल की आपूर्ति में कमी आई है और कीमतें बढ़ गई हैं.

ट्रंप के प्रस्ताव में क्या-क्या शामिल है?

  • समझौते पर चर्चा के लिए एक महीने का सीज़फ़ायर (युद्धविराम)
  • ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को पूरी तरह खत्म करना
  • अपने देश की सीमा के भीतर यूरेनियम संवर्धन (enrichment) को रोकना
  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खुला रखना सुनिश्चित करना
  • अपने पास जमा अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को ‘अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ (IAEA) को सौंप देना
  • नतान्ज़, इस्फ़हान और फ़ोर्डो स्थित प्रमुख परमाणु स्थलों को नष्ट करना और IAEA को वहां पूरी पहुंच देना
  • क्षेत्रीय प्रॉक्सी गतिविधियों (दूसरे देशों में अपने इशारे पर काम करने वाले गुटों की गतिविधियों) से पीछे हटना
  • अपने सहयोगी सशस्त्र गुटों को दिया जाने वाला समर्थन खत्म करना
  • मिसाइलों की मारक क्षमता और उनकी संख्या पर सीमाएं तय करना
  • भविष्य में मिसाइलों का इस्तेमाल पूरी तरह से केवल ‘आत्मरक्षा’ तक सीमित रखना

ईरान को मिलेगा ये लाभ

सीजफायर प्रस्ताव को स्वीकार करने के बदले में अमेरिका ने कथित तौर पर ये प्रस्ताव दिए हैं.

  • ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटा देना
  • ईरान के नागरिक परमाणु कार्यक्रम को समर्थन देना, जिसमें बुशेहर संयंत्र में बिजली उत्पादन में मदद करना भी शामिल है.
  • प्रतिबंधों को दोबारा लागू करने वाले ‘स्नैपबैक’ तंत्र को खत्म कर देना.

ईरान ने क्या कहा?

ईरानी सेना के खतम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम ज़ोल्फ़घारी ने बुधवार को कहा कि ऐसा लग रहा है कि ट्रंप खुद से ही बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जो खुद को वैश्विक महाशक्ति होने का दावा करते हैं, अगर वह ऐसा कर पाते तो इस मुश्किल से अब तक बाहर निकल चुके होते. अपनी हार को समझौते का नाम मत दीजिए. आपके खोखले वादों का दौर अब खत्म हो चुका है. क्या आपके अंदरूनी झगड़े इस हद तक पहुंच गए हैं कि तुम खुद से ही बातचीत कर रहे हो?

ईरान ने रखी ये मांग

ईरान की शीर्ष सैन्य कमान के प्रवक्ता मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही अलीबादी ने मंगलवार को कहा कि लड़ाई पूरी जीत मिलने तक जारी रहेगी. उनकी ये टिप्पणियां ट्रंप के उस दावे का खंडन करती प्रतीत हुईं कि ईरान शांति चाहता है और साथ ही ईरान के नेतृत्व को यह चेतावनी भी देती हैं कि किसी भी बातचीत के दौरान पीछे न हटें. हालांकि, कई रिपोर्टों में कहा गया है कि ईरान ने युद्ध खत्म करने पर सहमत होने के लिए 5 मुख्य मांगें रखी हैं.

  • संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का तत्काल अंत.
  • इस बात की गारंटी कि अमेरिका भविष्य में ईरान पर कोई सैन्य हमला नहीं करेगा.
  • संघर्ष के दौरान हुए नुकसान और क्षति के लिए आर्थिक मुआवजा.
  • होरमुज़ जलडमरूमध्य पर औपचारिक नियंत्रण.
  • ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बातचीत या प्रतिबंध नहीं; जिसे तेहरान एक ऐसी निवारक क्षमता मानता है जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता.

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