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नेपाल में शिक्षा पर सख्ती! 5वीं तक नहीं होंगे एग्जाम, छात्र राजनीति पर बैन; बालेन शाह ने बदल दिया सिस्टम

Nepal PM Balen Shah: नेपाल की नवगठित बालेन शाह सरकार ने शिक्षा में बड़े बदलाव कर दिए हैं. इन अहम फैसलों में छात्र राजनीति पर प्रतिबंध, 5वीं कक्षा तक की परीक्षाएं रद्द करना और विदेशों नामों से चल रहे स्कूलों के नामों को बदलना शामिल है.

Nepal Education System: नेपाल की बालेन सरकार ने देश की शिक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए क्रांतिकारी फैसले लिए हैं. सरकार ने 100 दिवसीय एक्शन प्लान जारी किया है. इस पहल में नेपाल सरकार ने प्रयास किया है कि शिक्षा को राजनीति से कोसों दूर रखा जाए. इसके लिए छात्र राजनीति में बैन जैसे फैसले लिए गए हैं. साथ ही प्लान में स्वदेशी जैसी भावनाओं को भी प्रदर्शित किया है, जैसे विदेशों नामों से मौजूद स्कूल-कॉलेज के नाम को बदलने का निर्देश आदि. 

शिक्षा पर सरकार का फोकस

शनिवार यानी 28 मार्च की रात नेपाल की बालेन सरकार ने 100 दिवसीय एक्शन प्लान जारी किया. इसमें शिक्षा को राजनीति गतिविधियों से कोसों दूर रखने का प्रयास किया गया है. इसके लिए कई अहम फैसलें उठाए गए हैं. 

छात्र राजनीति पर प्रतिबंध

इस एक्शन प्लान के तहत राजनीतिक पार्टियों से जुड़े सभी छात्र संघठनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. साथ ही सरकार ने स्कूल-कॉलेज परिसर में मौजूद सभी छात्र संघठनों के कार्यालयों को हटाने के लिए 60 दिन का समय दिया है. इसका उद्देश्य ये है कि अब शिक्षा परिसर में सिर्फ पठन-पाठन का माहौल रहे, क्योंकि इससे आए-दिन अराजक तत्वों द्वारा हिंसा की भी खबरें आती रहती हैं. 

छात्रों की आवाज सुनने के लिए छात्र परिषद का होगा गठन

नेपाल सरकार ने कहा कि छात्रों की आवाज सुनने के लिए छात्र परिषद का गठन किया जाएगा. जो गैर राजनीतिक होगा. इसके लिए 90 दिन का समय दिया गया है. 

5वीं कक्षा तक की परीक्षाएं रद्द

कक्षा 5 तक के विद्यार्थियों के पढ़ाई के दबाव को कम करने के लिए बालेन सरकार ने पारंपरिक परिक्षाओं के सिस्टम को रद्द कर दिया है. उनके प्रगति का मूल्यांकन अब वैकल्पिक नियमों पर आधारित होगा. यानी कि अब स्किल और समझ के आधार पर रिपोर्ट कार्ड बनेगा. 

विदेशी नामों पर भी प्रतिबंध

नेपाल सरकार ने ऑक्सफोर्ड, पेंटागन और सेंट जेवियर्स जैसे विदेशी नामों वाले शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे इसी एकेडमिक कलेंडर के भीतर अपने मूल नेपाली नाम अपना लें.  इस कदम का उद्देश्य शिक्षा में राष्ट्रीय पहचान को बढ़ावा देना है.

Kamesh Dwivedi

पिछले पांच वर्षों से डिजिटल मीडिया में बतौर लेखक अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इससे पहले Zee News और Amar Ujala में कार्यरत रहे हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में BA और वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय से MA की पढ़ाई की पूरी की. वायरल-ट्रेंडिंग कंटेंट के साथ बॉलीवुड, हॉलीवुड, भोजपुरी, साउथ सिनेमा के अलावा मनोरंजन की अन्य खबरों के लेखन और विश्लेषण में माहिर हैं. साथ ही कई सेलेब्स के इंटरव्यू भी कर चुके हैं. इसके अलावा क्रिकेट, राजनीति के साथ साहित्य का भी गहन अध्ययन करने का शौक है.

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