India-Iran Relation: पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात और तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बात की. यह बातचीत सिर्फ औपचारिक नहीं थी बल्कि इसमें क्षेत्र की शांति और वैश्विक व्यापार को लेकर भारत की गहरी चिंताएं भी साफ झलक रही थीं. पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पेजेश्कियान को ईद और नौरोज की दिली मुबारकबाद दी. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह त्योहारों का सीजन पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और खुशहाली लेकर आएगा. बढ़ते तनाव पर भारत की चिंता बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने हाल के दिनों में क्षेत्र के अहम बुनियादी ढांचों पर हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की. उन्होंने साफ कहा कि ऐसे हमले न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन को भी बुरी तरह प्रभावित करते हैं. समुद्री रास्तों की सुरक्षा बेहद जरूरी है ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार बिना किसी रुकावट के चलता रहे. Spoke with President Dr. Masoud Pezeshkian and conveyed Eid and Nowruz greetings. We expressed hope that this festive season brings peace, stability and prosperity to West Asia.Condemned attacks on critical infrastructure in the region, which threaten regional stability and… — Narendra Modi (@narendramodi) March 21, 2026 भारतीय नागरिकों और व्यापार की सुरक्षा तनाव के इस माहौल में भारत की प्राथमिकताएं बिल्कुल स्पष्ट हैं भारत अपने नागरिकों की सलामती चाहता है और ऊर्जा और अन्य जरूरी सामानों के ट्रांजिट में कोई बाधा नहीं चाहता है. PM मोदी ने ट्वीट करते राष्ट्रपति से बातचीत की जानकारी दी. उन्होंने लिखा ' राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियान से बात की और उन्हें ईद और नौरोज़ की शुभकामनाएं दीं. हमने उम्मीद जताई कि यह त्योहारों का सीजन पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लेकर आएगा. क्षेत्र में बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को बाधित करते हैं. समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के महत्व को दोहराया कि शिपिंग लेन (समुद्री रास्ते) खुले और सुरक्षित रहें. ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए ईरान के निरंतर सहयोग की सराहना की.' होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट फिलहाल फारस की खाड़ी में भारत के 20 से ज्यादा जहाज फंसे हुए हैं, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात ठप पड़ा है. हालांकि कूटनीतिक कोशिशों के बीच एक अच्छी खबर यह आई कि पिछले हफ्ते भारत के दो गैस टैंकर शिवालिक और नंदा देवी सुरक्षित तरीके से वहां से निकलने में कामयाब रहे. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस पर स्पष्ट किया कि ईरान के साथ जहाजों की आवाजाही को लेकर कोई पक्का लिखित समझौता नहीं है. हर जहाज का निकलना एक अलग चुनौती होती है और तेहरान के साथ जारी बातचीत के सकारात्मक नतीजे मिल रहे हैं. ये भी पढ़ें: क्या खत्म होने वाला है जंग? मौत की अफवाहों के बीच नेतन्याहू का प्रेस कॉन्फ्रेंस, किया बड़ा एलान