Sanjay Kaushik Arrest: अमेरिका से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है. जहां एक भारतीय बिजनेसमैन को अमेरिका में रूस को बैन किए गए एविएशन कंपोनेंट्स के कथित अवैध एक्सपोर्ट के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस द्वारा जारी ऑफिशियल बयान के अनुसार, नई दिल्ली के रहने वाले इस एग्जीक्यूटिव को फेडरल जेल में 30 महीने की सजा सुनाई गई है. DOJ के बयान में उस व्यक्ति की पहचान नई दिल्ली के 58 वर्षीय संजय कौशिक के रूप में की गई है.
इस पूरे मामले पर नेशनल सिक्योरिटी के असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल जॉन ए. आइजनबर्ग का बयान भी सामने आया है. जिसमें उन्होंने कहा कि जो लोग अमेरिकी एक्सपोर्ट कंट्रोल कानूनों को चकमा देने की साज़िश रचते हैं – खासकर जब इसमें मिलिट्री इस्तेमाल वाली टेक्नोलॉजी शामिल होती है – तो उन पर कानून के तहत पूरी सजा दी जाएगी. संयुक्त राज्य अमेरिका की सुरक्षा की मांग है कि इस तरह की धोखेबाज़ी वाली योजनाओं के अपराधियों को उनके कामों के लिए जवाबदेह ठहराया जाए.
कौशिक पर क्या-क्या आरोप लगे हैं? (What allegations have been made against Kaushik?)
DOJ के अनुसार, कोर्ट के दस्तावेजों में कहा गया है कि कौशिक ने दूसरों के साथ मिलकर “रूस में कंपनियों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका से गैर-कानूनी रूप से एयरोस्पेस सामान और टेक्नोलॉजी हासिल करने” की साजिश रची. इसके अलावा, कोर्ट के दस्तावेजों में आगे कहा गया है कि सामान इस झूठे बहाने से खरीदा गया था कि पार्ट्स भारतीय कंपनियों को भेजे जाएंगे, लेकिन इसके बजाय उन्हें रूसी यूज़र्स को भेजा गया. ऐसी ही एक घटना का हवाला देते हुए जस्टिस डिपार्टमेंट ने ओरेगन से हुई एक खरीद का विवरण साझा किया.
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DOJ ने अपने आधिकारिक बयान में और क्या-क्या कहा? (What else did the DOJ say in its official statement?)
DOJ द्वारा जारी ऑफिशियल बयान में लिखा गया है कि कौशिक और उसके साथियों ने एक एटीट्यूड एंड हेडिंग रेफरेंस सिस्टम (AHRS) खरीदा, जो एक ऐसा डिवाइस है जो एयरक्राफ्ट के लिए नेविगेशन और फ्लाइट कंट्रोल डेटा प्रदान करता है, जिसे ओरेगन स्थित सप्लायर से खरीदा गया था. AHRS जैसे कंपोनेंट्स को रूस सहित कुछ देशों में एक्सपोर्ट करने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स से लाइसेंस की ज़रूरत होती है.
कब किया गया था गिरफ्तार? (When was he arrested?)
AHRS के लिए एक्सपोर्ट लाइसेंस प्राप्त करने के लिए कौशिक और उसके साथियों ने झूठा दावा किया कि कौशिक की भारतीय कंपनी अंतिम खरीदार थी और कंपोनेंट का इस्तेमाल एक सिविलियन हेलीकॉप्टर में किया जाएगा. दिल्ली के इस व्यक्ति को 2024 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह हिरासत में है. अक्टूबर 2025 में कौशिक ने रूसी यूज़र्स को एविएशन कंपोनेंट्स के अवैध एक्सपोर्ट के लिए कोर्ट में अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसे 15 जनवरी, 2026 को 30 महीने जेल और 36 महीने की सुपरवाइज्ड रिहाई की सजा सुनाई गई.