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शेख हसीना की सबसे बड़ी दुश्मन खालिदा जिया का निधन, बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री के साथ कैसे थे भारत के संबध?

Khaleda Zia: खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी को शुरुआत से ही भारत विरोधी माना जाता रहा है. 2001 के आम चुनाव में खालिदा जिया की पार्टी ने भारत पर बांग्लादेश की राजनिति में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था.

Khaleda Zia: बांग्लादेश में फरवरी में संसदीय चुनाव होने वाले हैं . इसके ठीक पहले बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) की अध्यक्ष और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का 80 साल की उम्र में निधन हो गया है. मंगलवार (30 दिसंबर) सुबह करीब 6 बजे खालिदा जिया मे  ढाका के एवरकेयर अस्पताल में दम तोड़ दिया. जिया लंबे समय से बिमार थीं.

कुछ ही दिन पहले खालिदा जिया के बेटे तारिख रहमान करीब 17 साल बाद देश लौटे थे. कहा जा रहा है कि अगर बीएनपी चुनाव जीत जाती है तो बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री तारिख रहमान बन सकते हैं. बता दें खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री भी हैं. तो चलिए जानते हैं कि खालिदा जिया के शासनकाल में भारत के साथ बांग्लादेश के संबंध कैसे थे.

खालिदा जिया 1991 से 1996 तक बांग्लादेश की पीएम बनी रहीं. वहीं 2001 में दुबारा सत्ता में लौटीं और 2006 तक बांग्लादेश का कमान संभाला. खालिदा जिया बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति और सेना प्रमुख जियाउर रहमान की पत्नी हैं. खालिदा जिया के परिवार में उनके बड़े बेटे तारिक, उनकी पत्नी और उनकी बेटी हैं. 

खालिदा जिया ने बतौर पीएम पहला और तीसरा कार्यकाल पूरा किया है. लेकिन दूसरे कार्यकाल के दौरान उन्हें कुछ ही महीनों में पद छोड़ना पड़ा था. बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार से उलट, खालिदा जिया के शासनकाल में भारत और बांग्लादेश के संबंधों में कई बार तनातनी की स्थिति बनी.

खालिदा जिया के पति की हत्या के बाद उन्होने 1991 के आम चुनाव में चुनाव जीतकर बांग्लादेश में इतिहास रच दिया था. वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थी. मार्च 1996 तक वह अपने पद पर रही. उनके दूसरे कार्यकाल की शुरुआत 19 फरवरी 1996 में हुई थी. लेकिन कुछ ही महिने में तख्तापलट हो गया. तक खालिदा जिया पर आम चुनाव में धांधली का आरोप लगाया गया था. 

1996 के चुनाव में जिया के जीत के कुछ ही दिनों बाद शेख हसीना की पार्टी में देश में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू कर दिया. इस आंदोलन में सरकारी नौकरी वाले कर्मचारी भी शामिल हुए. जिसके बाद मार्च 31 को जिया को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद 2001 से लेकर 2006 तक उन्होंने तीसरे कार्यकाल की जिम्मेदारी संभाली.

जब खालिदा जिया तीसरी बार बांग्लादेश की गद्दी पर बैठी तब उन्होने भारत का दौरा किया था. मार्च 2006 में वह तीन दिवसीय भारत यात्रा पर आई थीं. इसके बाद 2012 में भी वो भारत के दौरे पर पहुंची थी. अपने भारत दौरे के समय उन्होने तब के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी.

हालाकि खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी को शुरुआत से ही भारत विरोधी माना जाता रहा है. 2001 के आम चुनाव में खालिदा जिया की पार्टी ने भारत  पर बांग्लादेश की राजनिति में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था. और इसे ही बीएनपी ने अपना चुनावी मुद्दा बना दिया.

असल में उस समय की रूलिंग पार्टी अवामी लीग के भारत के साथ बहुत अच्छे रिश्ते थे. जब पाकिस्तानी आर्मी बांग्लादेश के लोगों पर ज़ुल्म कर रही थी तो भारत ने बांग्लादेश लिबरेशन वॉर में सपोर्ट किया और हज़ारों लोगों को पनाह दी. इसके अलावा जब पाकिस्तानी आर्मी ने बगावत को कुचलने के लिए हमला किया तो भारत ने पाकिस्तान से लड़ाई की. नतीजतन  इंडियन आर्मी ने न सिर्फ़ 1971 की लड़ाई में पाकिस्तान को हराया बल्कि उसके लगभग 90,000 सैनिकों और लोगों को भी बंदी बना लिया. इस तरह बांग्लादेश और भारत के बीच रिश्ते शुरू में बहुत अच्छे थे लेकिन खालिदा ज़िया के राज में खराब हो गए.

खालिदा जिया के शासन में बांग्लादेश में राजनीतिक और सांप्रदायिक तनाव के साथ-साथ चुनावी तनाव भी देखने को मिला. 1992 में जब भारत में विवादित ढांचा गिया गया था तब हिंसा की आंच बांग्लादेश में भी देखने को मिली थी. उस समय बांग्लादेश में कई जह हिंदुओं पर हमले किए गए थे. वहीं कई जगह मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया था. तब खालिदा जिया के सरकार पर यह आरोप लगा था कि जिया सरकार ने इन हमलों को रोकने के लिए कोई कड़ा कदम नहीं उठाया था. 

अवामी लीग से जिया के संबध

वहीं जिया के सरकार में चुनावी हिंसा भी देखने को मिली थी. 1994  और 1995 के समय बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग समेत कई विपक्षी दलों ने निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए देश भर में आंदोलन किया था. इस दौरान बांग्लादेश में कई जगह धमाके हुए थे. ये हिंसा खालिदा के तीसरे कार्यकाल में भी देखने को मिला खालिदा जिया जब तीसरी बार बांग्लादेश की सत्ता में लौटी ल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाने की कई खबरें सामने आईं. तब तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया जाहिर की थी. 

जब बांग्लादेश में खालिदा जिया का सरकार था तब उनकी पार्टी बीएनपी और शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के बीच संबध बेहद तनावपूर्ण रहा. तब अवामी लीग की रैलियों पर कई बार ग्रेनेड से हमला किया गया. तब खालिदा जिया पर इन मामलों को लेकर सही कार्यवाही ना करने के आरोप लगते रहे.

खालिदा सरकार के पहले कार्यकाल में दोनों देशों के बीच बॉर्डर पर छोटी-मोटी झड़पें देखने को मिलीं. अप्रैल 2001 में मेघालय और असम बॉर्डर पर भारत-बांग्लादेश की सेनाओं के बीच झड़प हुई, जिसमें 16 भारतीय सैनिक शहीद हो गए. इसके बाद दोनों देशों के बीच हालात तनावपूर्ण रहे. 

खालिदा जिया के कार्यकाल में ही 17 अगस्त 2005 को 63 जिलों में 300 से ज्यादा जगहों पर आधे घंटे के अंदर करीब 500 बम धमाके किए गए थे. ये उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी हिंसा बन गई थी. इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन ने ली थी. हालात इतने खराब हो गए थे कि बांग्लादेशी सेना के समर्थन से कार्यावाहक सरकार की स्थापना करनी पड़ी. इसके बाद जनवरी में देश में इमरजेंसी लागू कर दी गई. 2008 में इस इमरजेंसी को हटा दिया गया.

खालिदा जिया के शासन में हिंदुओं का हाल

इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन ने भी खालिदा ज़िया के राज में माइनॉरिटी हिंदुओं की बुरी हालत पर कई रिपोर्ट जारी कीं. 2001 में, जिन हिंदुओं ने अवामी लीग को वोट दिया था, उन्हें खास तौर पर टारगेट किया गया. हिंदुओं पर बड़े पैमाने पर हमले, ज़बरदस्ती वसूली, रेप, लूटपाट, ज़मीन हड़पने और घरों को जलाने की खबरें आईं. जमात-उल-मुजाहिदीन जैसे ऑर्गनाइज़ेशन ने मंदिरों पर हमले ऑर्गनाइज़ करना, उन पर बमबारी करना शुरू कर दिया. ऐसे हालात के बावजूद, खालिदा ज़िया की सरकार इसे कम्युनल हिंसा के बजाय पॉलिटिकल हिंसा कहती रही. हालांकि, शेख हसीना के सत्ता में लौटने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते काफी सुधर गए.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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