Snowfall in Dubai: मध्य पूर्व के शुष्क रेगिस्तानी इलाकों में एक असामान्य और भीषण तूफान ने दुबई समेत पूरे मिडिल ईस्ट का मौसम बदल दिया है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रास अल खैमाह क्षेत्र में करीब 18 इंच मोटी ओलावृष्टि हुई, जिसने रेगिस्तान की रेत को बर्फ से ढक दिया.
रेगिस्तान में हुई ये घटना इस क्षेत्र की गर्म और शुष्क जलवायु के विपरीत है, जो लोगों के बीच आश्चर्य का विषय बना हुआ है. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह असामान्य मौसम धीमी गति से चलने वाले निम्न दबाव प्रणाली के कारण हो रहा है.
तूफान का कारण
यह असाधारण मौसम एक धीमी गति वाले निम्न दाब प्रणाली के कारण हुआ, जो अरब सागर और लाल सागर से नमी खींच लाई है. इस अभिसरण के कारण मध्य पूर्व के कई देशों में भारी वर्षा, गरज के साथ तूफान और यहां तक कि ओलावृष्टि भी हुई है. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दी से गर्मी की ओर संक्रमण काल में वातावरण अस्थिर हो जाता है, जो ऐसी घटनाओं को जन्म देता है। UAE, कतर, बहरीन और उत्तरी ओमान सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं.
Today, the sand turned into ice as a layer of hail about 18 inches thick fell in Ras Al Khaimah, UAE. pic.twitter.com/26Qoyzs05D
— Weather Monitor (@WeatherMonitors) March 25, 2026
प्रभावित क्षेत्र और नुकसान
UAE के दुबई सहित कई हिस्सों में 3 से 6 इंच वर्षा दर्ज की गई, जो कुछ जगहों पर पूरे साल की औसत वर्षा के बराबर है. वहीं रास अल खैमाह में ओलों की मोटी परत ने रेगिस्तान को बर्फ की चादर से ढक दिया, जबकि फुजैराह और धफ्राह में सड़कें सफेद हो गईं. ओमान में बाढ़ का खतरा बढ़ गया, जहां हाल की बारिश से पहले ही जान-माल का नुकसान हो चुका है. मौसम विभाग ने ईरान, इराक और सऊदी अरब में 100 से 500 मिमी वर्षा का पूर्वानुमान जताया है, साथ ही धूल भरी आंधियां और तेज हवाएं चलने का भी अनुमान लगाया जा रहा है.
बाढ़ और अन्य खतरे
तूफान ने मध्य-पूर्व के देशों में बाढ़ का संकट पैदा कर दिया है, क्योंकि शहरी जल निकासी प्रणालियां इतनी भारी वर्षा को संभालने में असमर्थ साबित हुईं हैं. अधिकारियों ने बाढ़ग्रस्त सड़कों से दूर रहने और अनावश्यक यात्रा न करने की चेतावनी दी है. हवाई अड्डों पर उड़ानें रद्द या विलंबित हो गई हैं, और आपातकालीन सेवाएं हाई अलर्ट पर हैं। मध्य पूर्व में दुर्लभ ‘रेगिस्तानी टॉरनेडो’ की आशंका भी जताई गई हैं.
जलवायु परिवर्तन का संकेत
यह घटना वैश्विक मौसम पैटर्न में बढ़ती अस्थिरता को दर्शाती है. विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी चरम घटनाएं अधिक आम हो रही हैं, जो पारंपरिक रूप से स्थिर जलवायु वाले क्षेत्रों को प्रभावित कर रही हैं. तूफान शुक्रवार (27 मार्च) तक जारी रहने की संभावना है, उसके बाद धीरे-धीरे शुष्क मौसम लौट सकता है, लेकिन स्थानीय बाढ़ का खतरा बना रहेगा.