बांग्लादेश हाई कमीशन ने क्या बताया?
कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता में उठा था मुद्दा
इसने 26 जून को पैनल के सामने एक गैर-सरकारी गवाह की गवाही का हवाला देते हुए संसद में भारत-बांग्लादेश संबंधों पर अपनी रिपोर्ट पेश की. 1971 की चुनौती अस्तित्वगत थी – एक मानवीय संकट और एक नए राष्ट्र का जन्म. आज का खतरा अधिक सूक्ष्म है, लेकिन संभावित रूप से अधिक गंभीर और गहरा है पीढ़ीगत अलगाव, राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव, और भारत से दूर संभावित रणनीतिक पुनर्गठन.