Who is Reza Pahlavi: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इज़राइल के जॉइंट एयरस्ट्राइक में मौत की खबर के बाद रेजा पहलवी का नाम एक बार फिर जोरदार तरीके से सामने आया है.पहलवी ने उन्हें खून के प्यासे तानाशाह और ईरान के हज़ारों सबसे बहादुर बेटों और बेटियों के कातिल बताया है. उन्होने कहा है कि अयातुल्ला अली खामेनेई के मौत के साथ इस्लामिक रिपब्लिक असल में अपने अंत पर पहुंच गया है. जानकारों का कहना है कि ईरान के आखिरी राजा के देश निकाला पाए बेटा ईरान की सत्ता को संभाल सकते हैं तो चलिए जानते हैं रेजा पहलवी कौन हैं?
पहलवी ने कियो पोस्ट
पहलवी ने X पोस्ट में लिखा, “अली खामेनेई हमारे समय के खून के प्यासे तानाशाह, ईरान के हज़ारों सबसे बहादुर बेटों और बेटियों के कातिल इतिहास से मिट गए हैं. उनकी मौत के साथ इस्लामिक रिपब्लिक असल में अपने अंत पर पहुँच गया है. वे उनकी जगह जिसे भी रखेंगे उसकी न तो कोई लेजिटिमेसी होगी और न ही ज़्यादा दिन, और बेशक वह भी इस शासन के अपराधों में शामिल होगा.”
My fellow compatriots,
Ali Khamenei, the bloodthirsty despot of our time, the murderer of tens of thousands of Iran’s bravest sons and daughters, has been erased from the face of history. With his death, the Islamic Republic has in effect reached its end and will very soon be… https://t.co/pm3ZXY9IYZ
— Reza Pahlavi (@PahlaviReza) February 28, 2026
रेजा पहलवी कौन हैं?
रेजा पहलवी ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रेज़ा पहलवी के बेटे हैं.उनका जन्म 31 अक्टूबर, 1960 को हुआ था। उन्हें 1967 में ऑफिशियली क्राउन प्रिंस घोषित किया गया था. हालांकि 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद शाही परिवार को ईरान छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा.वह अभी यूनाइटेड स्टेट्स में रहते हैं. उन्होंने यूनाइटेड स्टेट्स से पॉलिटिकल साइंस की डिग्री ली है और खुद को सेक्युलर, डेमोक्रेटिक और ह्यूमन राइट्स को सपोर्ट करने वाले ईरान का सपोर्टर बताते हैं।
तख़्त से तन्हाई तक का सफर
1960 में तेहरान में जन्मे रज़ा पहलवी को महज़ सात साल की उम्र में उनके पिता मोहम्मद रेज़ा पहलवी के राज्याभिषेक के दौरान क्राउन प्रिंस घोषित किया गया था. 17 वर्ष की उम्र में वे ईरान के सबसे कम उम्र के पायलट बने लेकिन लड़ाकू विमान प्रशिक्षण के लिए अमेरिका गए और फिर कभी स्वदेश नहीं लौट सके.
1979 की ईरानी क्रांति ने राजशाही को उखाड़ फेंका और उनके पिता को सत्ता से बेदखल कर दिया. तब से पहलवी अमेरिका में निर्वासन का जीवन जी रहे हैं.
लोकतांत्रिक ईरान का एजेंडा
पहलवी का कहना है कि वे इस्लामिक गणराज्य की जगह एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक व्यवस्था चाहते हैं. वे धर्म और राज्य को अलग करने तथा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने की वकालत करते हैं. हालांकि आलोचकों को आशंका है कि वे अपने पिता की तरह सत्तावादी शासन की वापसी चाहते हैं.
जनवरी की प्रेस ब्रीफिंग में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे संवैधानिक राजशाही की “स्वतः बहाली” नहीं चाहते. उनके मुताबिक, नई व्यवस्था का संविधान जनता के चुने प्रतिनिधि तय करेंगे.
US प्रेसिडेंट से की थी अपील
अब अमेरिका में रह रहे 65 साल के पहलवी एक बार फिर अपने देश का भविष्य बनाने में भूमिका निभाना चाहते हैं. उन्होंने हाल ही में US प्रेसिडेंट से अपील की थी कि वे चल रहे विरोध प्रदर्शनों में दखल दें, ताकि सरकार की कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों की मदद की जा सके.
लोकप्रियता पर बंटा देश
नीदरलैंड्स के सर्वे विशेषज्ञ अम्मार मालेकी के हालिया सर्वे (नवंबर 2025 तक) के अनुसार, करीब एक-तिहाई ईरानी पहलवी का समर्थन करते हैं, जबकि लगभग उतने ही लोग उनका कड़ा विरोध भी करते हैं. हालांकि विपक्षी नेताओं में उनकी लोकप्रियता सबसे अधिक मानी जाती है. यह विभाजन सवाल उठाता है कि सत्ता परिवर्तन की स्थिति में उन्हें देश के भीतर कितनी वैधता मिलेगी.