अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जन्मसिद्ध नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) को सीमित करने वाले कार्यकारी आदेश को एक भारतीय मूल की वकील स्मिता घोष ने सुप्रीम कोर्ट में कड़ी चुनौती दी है.
ट्रंप बनाम बारबरा केस में स्मिता घोष ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ प्रमुख दलीलें पेश कर रही हैं. यह मामला अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की व्याख्या पर केंद्रित है.
ट्रंप के आदेश के खिलाफ संघर्ष
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने जनवरी 2025 में दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किया. इस आदेश के अनुसार अमेरिका में जन्मे उन बच्चों को नागरिकता देने से रोका जाना है, जिनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक या ग्रीन कार्ड धारक नहीं हैं. ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि अवैध या अस्थाई प्रवासियों के बच्चों को यह अधिकार नहीं मिलना चाहिए.
स्मिता घोष ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलील में कहा कि अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन स्पष्ट रूप से अमेरिकी धरती पर जन्मे हर बच्चे को नागरिकता देता है, चाहे माता-पिता का स्टेटस कुछ भी हो. उन्होंने 1844 के जूलिया लिंच केस का हवाला दिया, जहां न्यूयॉर्क कोर्ट ने आयरिश माता-पिता के अस्थाई प्रवास के दौरान जन्मे बच्चे को अमेरिका का नागरिक माना. स्मिता का कहना है कि यह संशोधन मौजूदा कानून की ही पुष्टि करता है, बदलता नहीं है. निचली अदालतों ने ट्रंप के आदेश को असंवैधानिक माना है. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ट्रंप खुद मौजूद थे, जो किसी मौजूदा राष्ट्रपति के लिए पहली बार था.
कौन हैं स्मिता घोष?
स्मिता घोष कांस्टीट्यूशनल अकाउंटेबिलिटी सेंटर (CAC) में सीनियर अपीलेट काउंसिल हैं. उन्होंने पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री (JD) और लीगल हिस्ट्री में पीएचडी प्राप्त की है. जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी लॉ सेंटर में रिसर्च फेलो रह चुकीं स्मिता ने इमिग्रेशन लॉ जैसे विषय पढ़ाए हैं. उन्होंने NAACP जैसे संगठनों के साथ भी काम किया है.