Indian Army Story: निरपुड़ा गांव के सिद्धार्थ राणा ने चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी से पासिंग आउट परेड के बाद भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर परिवार और गांव का नाम रोशन किया.
Indian Army Story: हेड कांस्टेबल का बेटा सेना में बना अफसर
Indian Army Success Story: देश की सेवा का सपना जब सच होता है, तो सिर्फ एक व्यक्ति ही नहीं बल्कि पूरा परिवार और गांव गर्व महसूस करता है. ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां चौगामा क्षेत्र के निरपुड़ा गांव निवासी सिद्धार्थ राणा (Siddharth Rana) ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट का पद हासिल कर अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया है.
चेन्नई में स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (Officers Training Academy Chennai) में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान उन्हें आधिकारिक रूप से लेफ्टिनेंट की रैंक प्रदान की गई. इस उपलब्धि की खबर मिलते ही गांव में खुशी का माहौल बन गया और परिजनों के साथ ग्रामीणों ने भी गर्व व्यक्त किया.
सिद्धार्थ राणा ऐसे परिवार से आते हैं जहां देश सेवा की मजबूत परंपरा रही है. उनके पिता जगपाल सिंह राणा (Jagpal Singh Rana) उत्तर प्रदेश पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में उनका परिवार गाजियाबाद के शालीमार गार्डन में रहता है. परिवार के सैन्य पृष्ठभूमि ने भी सिद्धार्थ को देश सेवा के लिए प्रेरित किया. उनके चाचा संदीप राणा (Sandeep Rana) भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त हैं, जबकि दूसरे चाचा कविंद्र राणा (Kavindra Rana) वर्तमान में ग्वालियर एयर फोर्स स्टेशन पर तैनात हैं.
सिद्धार्थ राणा ने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से पूरी की. इसके बाद उन्होंने सेना में अधिकारी बनने के लक्ष्य के साथ कड़ी मेहनत की और संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित संयुक्त रक्षा परीक्षा (CDE) 2024 के माध्यम से उनका चयन लेफ्टिनेंट पद के लिए हुआ. चयन के बाद उन्होंने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में कठोर और अनुशासित सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया. यह प्रशिक्षण शारीरिक क्षमता, लीडरशिप स्किल और देश सेवा की भावना को मजबूत करने के लिए जाना जाता है.
सिद्धार्थ राणा अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं जो देश की सेवा के लिए आगे आई है. यह उनके परिवार के लिए गर्व और सम्मान का विषय है. उनकी मां मंजू देवी ने कहा कि यह पूरे परिवार के लिए गर्व का पल है. उन्होंने खुशी जताई कि उनके बेटे ने भी अपने दादा और पिता की तरह देश सेवा का रास्ता चुना है.
सिद्धार्थ के लेफ्टिनेंट बनने की खबर मिलते ही निरपुड़ा गांव में खुशी की लहर दौड़ गई. ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने उनकी इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया. गांव लौटने पर उनका भव्य स्वागत करने की भी तैयारी की जा रही है. स्थानीय लोगों का मानना है कि सिद्धार्थ की यह सफलता गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी और उन्हें भी देश सेवा के लिए आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगी.
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