Live TV
Search
Home > जॉब > Constable Success Story: 5वीं के बाद छूटी पढ़ाई, ईंट भट्ठे पर मजदूरी, लॉकडाउन ने बदली ऐसी किस्मत, बना पुलिस जवान

Constable Success Story: 5वीं के बाद छूटी पढ़ाई, ईंट भट्ठे पर मजदूरी, लॉकडाउन ने बदली ऐसी किस्मत, बना पुलिस जवान

Constable Success Story: जिंदगी हर किसी को संभलने के लिए दूसरा मौका देती है. ऐसे ही मौके को अवसर में बदलकर छत्तीसगढ़ के शख्स ने पुलिस विभाग में नौकरी (Govt Jobs) पाने में सफल रहे हैं.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: April 10, 2026 12:16:20 IST

Mobile Ads 1x1

Constable Success Story: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से सामने आई देवा डहरिया की प्रेरणादायक कहानी यह साबित करती है कि जिंदगी हर किसी को दूसरा मौका जरूर देती है, बस जरूरत होती है हिम्मत, धैर्य और लगातार मेहनत की. बेहद गरीबी के कारण देवा को केवल 5वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी और वह ईंट भट्ठों पर मजदूरी करने लगे. कठिन हालातों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को मरने नहीं दिया. संघर्ष, लगन और आत्मविश्वास के दम पर देवा ने अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी.

आज वही देवा डहरिया (Deva Dahariya) पुलिस विभाग (Police Department) में कांस्टेबल बनकर समाज की सेवा कर रहे हैं. उनकी यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की मिसाल है, जो मुश्किल परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का हौसला रखते हैं.

लॉकडाउन बना जिंदगी का टर्निंग पॉइंट

देवा का बचपन संघर्षों से भरा रहा. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें छोटी उम्र में ही पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करनी पड़ी. जिस उम्र में बच्चे स्कूल जाते हैं, उस समय देवा ईंट ढोने का काम कर रहे थे. साल 2020 में आई COVID-19 महामारी ने भले ही पूरी दुनिया को रोक दिया, लेकिन देवा के लिए यही समय नई शुरुआत लेकर आया. काम बंद होने के बाद वह अपने गांव लौटे, जहां उनके दोस्त ने उन्हें दोबारा पढ़ाई शुरू करने की सलाह दी.

8 साल बाद फिर से उठाई किताबें

करीब 8 साल के लंबे अंतराल के बाद देवा ने छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल के माध्यम से अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू की. शुरुआत आसान नहीं थी. गांव वालों के ताने, पढ़ाई में गैप और असफलताओं ने कई बार उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. देवा ने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार मेहनत की. उन्होंने आर्मी, SSC GD और नगर सैनिक जैसी परीक्षाएं दीं, लेकिन शुरुआती प्रयासों में सफलता नहीं मिली. इसके बावजूद उनका जुनून कम नहीं हुआ.

वर्ष 2026 में मिली सफलता, बने पुलिस कांस्टेबल

लगातार तीन साल की मेहनत और तैयारी के बाद आखिरकार 2026 में देवा का चयन रायपुर जिले में पुलिस कांस्टेबल के पद पर हो गया. आज वह ट्रेनिंग ले रहे हैं और समाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हैं. देवा की कहानी यह साबित करती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है. ईंट उठाने वाले हाथ आज कानून की रक्षा कर रहे हैं. यह बदलाव सिर्फ मेहनत, धैर्य और विश्वास का परिणाम है.

MORE NEWS

Home > जॉब > Constable Success Story: 5वीं के बाद छूटी पढ़ाई, ईंट भट्ठे पर मजदूरी, लॉकडाउन ने बदली ऐसी किस्मत, बना पुलिस जवान

Written By: Munna Kumar
Last Updated: April 10, 2026 12:16:20 IST

Mobile Ads 1x1

Constable Success Story: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से सामने आई देवा डहरिया की प्रेरणादायक कहानी यह साबित करती है कि जिंदगी हर किसी को दूसरा मौका जरूर देती है, बस जरूरत होती है हिम्मत, धैर्य और लगातार मेहनत की. बेहद गरीबी के कारण देवा को केवल 5वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी और वह ईंट भट्ठों पर मजदूरी करने लगे. कठिन हालातों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को मरने नहीं दिया. संघर्ष, लगन और आत्मविश्वास के दम पर देवा ने अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी.

आज वही देवा डहरिया (Deva Dahariya) पुलिस विभाग (Police Department) में कांस्टेबल बनकर समाज की सेवा कर रहे हैं. उनकी यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की मिसाल है, जो मुश्किल परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का हौसला रखते हैं.

लॉकडाउन बना जिंदगी का टर्निंग पॉइंट

देवा का बचपन संघर्षों से भरा रहा. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें छोटी उम्र में ही पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करनी पड़ी. जिस उम्र में बच्चे स्कूल जाते हैं, उस समय देवा ईंट ढोने का काम कर रहे थे. साल 2020 में आई COVID-19 महामारी ने भले ही पूरी दुनिया को रोक दिया, लेकिन देवा के लिए यही समय नई शुरुआत लेकर आया. काम बंद होने के बाद वह अपने गांव लौटे, जहां उनके दोस्त ने उन्हें दोबारा पढ़ाई शुरू करने की सलाह दी.

8 साल बाद फिर से उठाई किताबें

करीब 8 साल के लंबे अंतराल के बाद देवा ने छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल के माध्यम से अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू की. शुरुआत आसान नहीं थी. गांव वालों के ताने, पढ़ाई में गैप और असफलताओं ने कई बार उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. देवा ने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार मेहनत की. उन्होंने आर्मी, SSC GD और नगर सैनिक जैसी परीक्षाएं दीं, लेकिन शुरुआती प्रयासों में सफलता नहीं मिली. इसके बावजूद उनका जुनून कम नहीं हुआ.

वर्ष 2026 में मिली सफलता, बने पुलिस कांस्टेबल

लगातार तीन साल की मेहनत और तैयारी के बाद आखिरकार 2026 में देवा का चयन रायपुर जिले में पुलिस कांस्टेबल के पद पर हो गया. आज वह ट्रेनिंग ले रहे हैं और समाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हैं. देवा की कहानी यह साबित करती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है. ईंट उठाने वाले हाथ आज कानून की रक्षा कर रहे हैं. यह बदलाव सिर्फ मेहनत, धैर्य और विश्वास का परिणाम है.

MORE NEWS