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Home > जॉब > SDM UPPSC Story: ना बड़े शहर, ना महंगी कोचिंग, गांव में रहकर ज्योति बनीं SDM, टॉप 20 में बनाई जगह

SDM UPPSC Story: ना बड़े शहर, ना महंगी कोचिंग, गांव में रहकर ज्योति बनीं SDM, टॉप 20 में बनाई जगह

SDM UPPSC Story: यूपीएसएससी में इस साल डिप्टी कलेक्टर के 37 पदों में से 21 पर लड़कियों का दबदबा रहा है. इसी कड़ी में ज्योति धामा (SDM Jyoti Dhama) ने बेहतरीन परफॉर्म करते हुए 19वीं रैंक हासिल की.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: April 6, 2026 12:27:04 IST

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SDM UPPSC Story: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) 2024 के अंतिम परिणाम में एक बार फिर बेटियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. डिप्टी कलेक्टर के 37 पदों में से 21 पर बेटियों का चयन इस बात को दर्शाता है कि आज की बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. इसी कड़ी में मेरठ के मवाना क्षेत्र के छोटे से गांव इकवारा की ज्योति धामा (SDM Jyoti Dhama) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 19वीं रैंक हासिल की और SDM बनकर अपने क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया.

ज्योति धामा की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने अपनी तैयारी के लिए बड़े शहरों जैसे दिल्ली या प्रयागराज का रुख नहीं किया. उन्होंने मवाना में रहकर ही सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई की और अपने लक्ष्य को हासिल किया. यह साबित करता है कि सफलता के लिए बड़े शहर नहीं, बल्कि मजबूत इरादे और सही दिशा की जरूरत होती है.

सही मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी

ज्योति ने अपनी तैयारी के दौरान मनोज सर के मार्गदर्शन में कोचिंग ली और घर पर नियमित अध्ययन जारी रखा. उनका यह अनुशासन और निरंतरता ही उनकी सफलता की असली ताकत बनी. इसके अलावा, इंटरव्यू से पहले उन्हें वन रेंजर खुशबू उपाध्याय और सीओ साइबर क्राइम अभिषेक पटेल से भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिला, जिसने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया.

परिवार और गुरुओं को दिया श्रेय

ज्योति धामा ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को दिया. उनका मानना है कि परिवार का समर्थन और सही दिशा दिखाने वाले गुरु जीवन में बड़ी भूमिका निभाते हैं. ज्योति की सफलता से मवाना और आसपास के क्षेत्रों में खुशी का माहौल है. छात्र-छात्राएं उन्हें एक रोल मॉडल के रूप में देख रहे हैं. खासकर ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली लड़कियों के लिए उनकी कहानी एक मजबूत प्रेरणा बनकर उभरी है.

आगे भी जारी है मेहनत

ज्योति यहीं नहीं रुकी हैं. वह वर्तमान में UPPCS 2025 का मेंस एग्जाम भी दे रही हैं. इसके अलावा वह BPSC 2024 का इंटरव्यू दे चुकी हैं और RO/ARO परीक्षा का मेंस भी दे चुकी हैं. ज्योति धामा की कहानी बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं होता.

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Last Updated: April 6, 2026 12:27:04 IST

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SDM UPPSC Story: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) 2024 के अंतिम परिणाम में एक बार फिर बेटियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. डिप्टी कलेक्टर के 37 पदों में से 21 पर बेटियों का चयन इस बात को दर्शाता है कि आज की बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. इसी कड़ी में मेरठ के मवाना क्षेत्र के छोटे से गांव इकवारा की ज्योति धामा (SDM Jyoti Dhama) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 19वीं रैंक हासिल की और SDM बनकर अपने क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया.

ज्योति धामा की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने अपनी तैयारी के लिए बड़े शहरों जैसे दिल्ली या प्रयागराज का रुख नहीं किया. उन्होंने मवाना में रहकर ही सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई की और अपने लक्ष्य को हासिल किया. यह साबित करता है कि सफलता के लिए बड़े शहर नहीं, बल्कि मजबूत इरादे और सही दिशा की जरूरत होती है.

सही मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी

ज्योति ने अपनी तैयारी के दौरान मनोज सर के मार्गदर्शन में कोचिंग ली और घर पर नियमित अध्ययन जारी रखा. उनका यह अनुशासन और निरंतरता ही उनकी सफलता की असली ताकत बनी. इसके अलावा, इंटरव्यू से पहले उन्हें वन रेंजर खुशबू उपाध्याय और सीओ साइबर क्राइम अभिषेक पटेल से भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिला, जिसने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया.

परिवार और गुरुओं को दिया श्रेय

ज्योति धामा ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को दिया. उनका मानना है कि परिवार का समर्थन और सही दिशा दिखाने वाले गुरु जीवन में बड़ी भूमिका निभाते हैं. ज्योति की सफलता से मवाना और आसपास के क्षेत्रों में खुशी का माहौल है. छात्र-छात्राएं उन्हें एक रोल मॉडल के रूप में देख रहे हैं. खासकर ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली लड़कियों के लिए उनकी कहानी एक मजबूत प्रेरणा बनकर उभरी है.

आगे भी जारी है मेहनत

ज्योति यहीं नहीं रुकी हैं. वह वर्तमान में UPPCS 2025 का मेंस एग्जाम भी दे रही हैं. इसके अलावा वह BPSC 2024 का इंटरव्यू दे चुकी हैं और RO/ARO परीक्षा का मेंस भी दे चुकी हैं. ज्योति धामा की कहानी बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं होता.

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