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Home > लाइफस्टाइल > क्या होली का रंग बच्चों के लिए सुरक्षित हैं? कान-नाक-गला पर असर, डॉक्टर के आसान टिप्स

क्या होली का रंग बच्चों के लिए सुरक्षित हैं? कान-नाक-गला पर असर, डॉक्टर के आसान टिप्स

Holi for kids: होली के रंग और पानी के गुब्बारे बच्चों के कान, नाक और गले के लिए जोखिम भरे हो सकते हैं. जानें आंख, कान और गले के डॉक्टर की चेतावनी और माता-पिता के लिए जरूरी सुरक्षा टिप्स

Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: March 4, 2026 10:03:08 IST

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Holi for kids: होली बच्चों के लिए साल का सबसे ज्यादा रंगीन और उत्साह भरा पर्व होता है. लेकिन इसकी मौज-मस्ती के बीच स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ जरूरी सावधानियां भी जरूरी हैं. पानी के गुब्बारे, तेज धार वाली पिचकारियां और केमिकल युक्त रंग बच्चों के कान, नाक और गले के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं. जानें इसके लिए डॉक्टर की सावधानियां और जरूरी सुरक्षा टिप्स.

कान, नाक और गले की समस्याएं

होली के मस्ती में बच्चों को रंगीन पाउडर, खराब पानी, धूल, तेज आवाज और तापमान में अचानक बदलना इन सबका स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है. हेल्दी बच्चे आमतौर पर इन स्थितियों को आसानी से सहन कर लेते हैं, लेकिन कान, नाक और गले की समस्याओं से ग्रस्त बच्चों की प्रतिक्रिया एक दूसरे से अलग हो सकती है. रंगीन पानी कानों के भीतर जा सकता है, पाउडर से एलर्जी की समस्या हो सकती है, और ठंडे खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ से जलन की समस्या हो सकती है. डॉक्टर बताते हैं कि, माता-पिता अक्सर इस बात को कम आंकते हैं कि कैमिकल रंग या गंदा पानी संवेदनशील कानों या साइनस को कितनी आसानी से प्रभावित कर सकता है. इन जोखिमों को समझना परिवारों को समस्याओं को शुरू होने से पहले ही रोकने में मदद करता है.

ग्रॉमेट वाले बच्चों को विशेष देखभाल

कान के पर्दे में लगाई जाने वाली वेंटिलेशन ट्यूब (ग्रॉमेट्स) तरल पदार्थ के निकास की सुविधा देकर बार-बार होने वाले कान के संक्रमण को रोकने में मदद करती हैं. हालांकि, ये दूषित पानी को मध्य कान तक पहुंचने का रास्ता भी बना देती हैं. 

पानी के बौछार से खतरा बढ़ने का डर

ऐसे में होली के दौरान, बाल्टियों, पानी की बौछार और अचानक पानी के छींटों से यह खतरा काफी बढ़ जाता है. डॉक्टर सीधे पानी के संपर्क से पूरी तरह बचने की सलाह देते हैं. बच्चों के बाहर खेलने के बाद, माता-पिता को केवल बाहरी कान को साफ और मुलायम तौलिये से धीरे से सुखाना चाहिए. होली के कुछ दिनों बाद कान से स्राव, बुखार या दर्द की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें.

शोर से नजर अंदाज न करें

होली के उत्सवों के दौरान लाउडस्पीकर और पटाखे कोई बड़ी बात नहीं हैं, लेकिन कान में ट्यूब लगे या संक्रमण वाले बच्चों के लिए ये नुकसानदायक और असुविधाजनक हो सकते हैं. शोर के संपर्क में आने से सुनने की क्षमता अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है. माता-पिता को बच्चों को लाउडस्पीकर से दूर रखने की कोशिश करनी चाहिए और भीड़भाड़ वाली जगहों पर शोर कम करने वाले इयरमफ्स का इस्तेमाल करने पर विचार करना चाहिए.

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Holi for kids: होली बच्चों के लिए साल का सबसे ज्यादा रंगीन और उत्साह भरा पर्व होता है. लेकिन इसकी मौज-मस्ती के बीच स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ जरूरी सावधानियां भी जरूरी हैं. पानी के गुब्बारे, तेज धार वाली पिचकारियां और केमिकल युक्त रंग बच्चों के कान, नाक और गले के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं. जानें इसके लिए डॉक्टर की सावधानियां और जरूरी सुरक्षा टिप्स.

कान, नाक और गले की समस्याएं

होली के मस्ती में बच्चों को रंगीन पाउडर, खराब पानी, धूल, तेज आवाज और तापमान में अचानक बदलना इन सबका स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है. हेल्दी बच्चे आमतौर पर इन स्थितियों को आसानी से सहन कर लेते हैं, लेकिन कान, नाक और गले की समस्याओं से ग्रस्त बच्चों की प्रतिक्रिया एक दूसरे से अलग हो सकती है. रंगीन पानी कानों के भीतर जा सकता है, पाउडर से एलर्जी की समस्या हो सकती है, और ठंडे खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ से जलन की समस्या हो सकती है. डॉक्टर बताते हैं कि, माता-पिता अक्सर इस बात को कम आंकते हैं कि कैमिकल रंग या गंदा पानी संवेदनशील कानों या साइनस को कितनी आसानी से प्रभावित कर सकता है. इन जोखिमों को समझना परिवारों को समस्याओं को शुरू होने से पहले ही रोकने में मदद करता है.

ग्रॉमेट वाले बच्चों को विशेष देखभाल

कान के पर्दे में लगाई जाने वाली वेंटिलेशन ट्यूब (ग्रॉमेट्स) तरल पदार्थ के निकास की सुविधा देकर बार-बार होने वाले कान के संक्रमण को रोकने में मदद करती हैं. हालांकि, ये दूषित पानी को मध्य कान तक पहुंचने का रास्ता भी बना देती हैं. 

पानी के बौछार से खतरा बढ़ने का डर

ऐसे में होली के दौरान, बाल्टियों, पानी की बौछार और अचानक पानी के छींटों से यह खतरा काफी बढ़ जाता है. डॉक्टर सीधे पानी के संपर्क से पूरी तरह बचने की सलाह देते हैं. बच्चों के बाहर खेलने के बाद, माता-पिता को केवल बाहरी कान को साफ और मुलायम तौलिये से धीरे से सुखाना चाहिए. होली के कुछ दिनों बाद कान से स्राव, बुखार या दर्द की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें.

शोर से नजर अंदाज न करें

होली के उत्सवों के दौरान लाउडस्पीकर और पटाखे कोई बड़ी बात नहीं हैं, लेकिन कान में ट्यूब लगे या संक्रमण वाले बच्चों के लिए ये नुकसानदायक और असुविधाजनक हो सकते हैं. शोर के संपर्क में आने से सुनने की क्षमता अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है. माता-पिता को बच्चों को लाउडस्पीकर से दूर रखने की कोशिश करनी चाहिए और भीड़भाड़ वाली जगहों पर शोर कम करने वाले इयरमफ्स का इस्तेमाल करने पर विचार करना चाहिए.

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