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काली किशमिश या सफेद, सेहत के लिए कौन है असली सुपरफूड? जानें- दोनों में कौन देता है ज्यादा ताकत

Black Raisins vs White Raisins: भारतीय रसोई में किशमिश का इस्तेमाल आम बात है. यह आकार में भले ही छोटी हो, लेकिन इसमें फाइबर, आयरन, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट जैसे कई जरूरी पोषक तत्व छिपे होते हैं. अब असली सवाल यह है कि काली किशमिश और सफेद किशमिश में से सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद कौन सी है?

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: 2026-02-26 17:58:09

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Raisins Health Benefits:  भारत में किशमिश हर घर में इस्तेमाल होती है. दिखने में छोटी जरूर है, गर्म खीर में डालना हो या ऑफिस के टिफिन में ले जाना हो, क्योंकि  इसमें फाइबर, आयरन, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं.आज हम जानेंगे कि काली किशमिश और सफेद किशमिश में से सेहत के लिए बेहतर कौन है?

कई शोध बताते हैं कि सीमित मात्रा में किशमिश खाने से खराब कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और ब्लड शुगर संतुलित रखने में भी मदद मिलती है. लेकिन काली और सफेद किशमिश पूरी तरह एक जैसी नहीं होतीं.

 पोषण में क्या है अंतर?

दोनों ही अंगूर को सुखाकर बनाई जाती हैं, लेकिन बनाने का तरीका थोड़ा अलग होता है.काली किशमिश आमतौर पर धूप में सुखाई जाती है. इसमें आयरन और एंथोसाइनिन (गहरे रंग वाले एंटीऑक्सीडेंट) ज्यादा होते हैं. वहीं सफेद किशमिश को सुखाते समय उसका सुनहरा रंग बनाए रखने के लिए सल्फर डाइऑक्साइड का इस्तेमाल किया जाता है. यह स्वाद में ज्यादा मीठी और नरम होती है, लेकिन इसमें एंटीऑक्सीडेंट थोड़े कम हो सकते हैं.लगभग 40 ग्राम किशमिश में करीब 120 कैलोरी, 2 ग्राम फाइबर और 25 ग्राम प्राकृतिक शुगर होती है. दोनों में बी विटामिन, पोटैशियम और कुछ जरूरी मिनरल्स मिलते हैं.

पाचन के लिए कौन बेहतर?

दोनों प्रकार की किशमिश में फाइबर होता है, जो पाचन को बेहतर बनाता है. काली किशमिश में थोड़ा ज्यादा अघुलनशील फाइबर होता है, जो कब्ज में राहत देने और मल त्याग को आसान बनाने में मदद करता है. सफेद किशमिश में घुलनशील फाइबर होता है, जो पाचन को धीमा करता है और ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है.अगर पाचन सुधारना चाहते हैं, तो दोनों को बारी-बारी से या साथ में खाया जा सकता है.

दिल की सेहत के लिए कौन अच्छी?

नियमित मात्रा में किशमिश खाने से LDL (खराब) कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद मिल सकती है.काली किशमिश में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट धमनियों को नुकसान से बचाने में ज्यादा असरदार हो सकते हैं और सफेद किशमिश भी दिल के लिए फायदेमंद है, लेकिन एंटीऑक्सीडेंट के मामले में काली किशमिश थोड़ी आगे रहती है.जिन लोगों को हाई कोलेस्ट्रॉल या ब्लड प्रेशर की समस्या है, उनके लिए काली किशमिश थोड़ा बेहतर विकल्प हो सकती है.

 ज्यादा खाने के नुकसान

फायदे होने के बावजूद ज्यादा मात्रा में किशमिश खाना सही नहीं है.

  •  इसमें प्राकृतिक शुगर ज्यादा होती है, जिससे ब्लड शुगर बढ़ सकता है.
  •  अधिक मात्रा वजन बढ़ा सकती है.
  • जिन लोगों को सल्फाइट से एलर्जी है, उन्हें सफेद किशमिश से परेशानी हो सकती है.
  • यह चिपचिपी होती है, इसलिए दांतों में फंस सकती है. खाने के बाद कुल्ला करना जरूरी है.

 डाइट में कैसे शामिल करें?

  •  रात में भिगोकर सुबह खा सकते हैं.
  •  ओट्स, सलाद, खीर, हलवा या पुलाव में डाल सकते हैं.
  •  रोज लगभग 30-40 ग्राम (एक छोटी मुट्ठी) काफी है.
  • अगर आयरन और एंटीऑक्सीडेंट बढ़ाना चाहते हैं, तो काली किशमिश चुनें.
  • अगर स्वाद और मिठास चाहिए, तो सफेद किशमिश बेहतर है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है. किसी भी स्वास्थ्य समस्या या डाइट बदलाव से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.इंडिया न्यूज सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.

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Written By: Shivashakti narayan singh
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