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Blue Light Glasses: आज के समय में हर व्यक्ति का स्क्रीन टाइम बढ़ने के साथ, डिजिटल आई स्ट्रेन, थकान और नींद में खलल जैसी समस्याएं हो रही है. इससे निपटने के लिए ब्लू लाइट ग्लासेस एक लोकप्रिय उपाय बन गया हैं. ये लेंस फोन, कंप्यूटर और एलईडी स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट को फिल्टर करने के लिए बनाई गई है.
यह प्रकाश शरीर की प्राकृतिक सर्कैडियन रिदम में बाधा डाल सकता है. हालांकि, हाल के शोधों ने इनकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं. ब्लू लाइट के संपर्क में आने से नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और अस्थायी असुविधा हो सकती है, लेकिन आज के रिसर्च से सीमित प्रमाण मिले हैं कि ब्लू लाइट ग्लासेस आंखों के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार करते हैं.
ब्लू लाइट क्या है और यह कैसे काम करता है?
ब्लू लाइट एक हाई एनर्जी वाली दृश्य प्रकाश है जिसकी सोर्ट वेव लेंथ (415-455 नैनोमीटर) होती है. यह प्राकृतिक रूप से सूर्य के प्रकाश में मौजूद होती है, लेकिन यह स्मार्टफोन, टैबलेट, एलईडी स्क्रीन और टीवी जैसे डिजिटल उपकरणों से भी निकलती है.
मानव इतिहास के अधिकांश समय तक, लोग केवल दिन के समय ही ब्लू लाइट के संपर्क में आते थे, जो शरीर को जागृत और सतर्क रहने का संकेत देती थी. लेकिन अब, स्क्रीन के कारण हम सूर्यास्त के काफी बाद तक नीली रोशनी के संपर्क में आते हैं. इससे शरीर का प्राकृतिक नींद-जागने का रिद्दम बिगड़ सकता है, जिससे थकान, आंखों में सूखापन और नींद में खलल जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.
क्या ब्लू लाइट वाले चश्मे सच में काम करते हैं?
हाल के नए रिसर्च से पता चलता है कि ब्लू लाइट शरीर की दैनिक रिद्दम को प्रभावित करती है, लेकिन इस बात के सीमित वैज्ञानिक प्रमाण हैं कि स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट से आंखों को दीर्घकालिक नुकसान होता है. इसी तरह, विशेषज्ञों का कहना है कि नीली रोशनी को रोकने वाले चश्मों की प्रभावशीलता अभी भी बहस का मुद्दा है.
अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी अभी सामान्य कंप्यूटर उपयोग के लिए ब्लू लाइट ग्लासेस की सिफारिश नहीं करती है, क्योंकि इसके समर्थन में पूरे आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. वास्तव में, ब्लू लाइट से होने वाले कई लक्षण, जैसे कि आंखों में सूखापन, धुंधली दृष्टि और सिरदर्द, स्क्रीन के उपयोग के तरीके के कारण होते हैं, न कि ब्लू लाइट के कारण ऐसा होता है.