51
Diabetes And Hearing Loss: मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जो इंसान को एक बार हो जाती है तो जीवन भर चलती है. यह आमतौर पर हार्ट, किडनी और आं खों से जुड़ी समस्याओं के जिखिम कारक हो सकता है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि इसका असर सुनने की क्षमता पर भी पड़ सकता है. लगातार बढ़ा हुआ ब्लड शुगर शरीर की नसों और सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे कानों तक रक्त प्रवाह प्रभावित होता है. इसका परिणाम धीरे-धीरे होने वाली सुनने की समस्या के रूप में देखी जा सकती है.
मधुमेह वाले रोगियों में कम सुनाई देने की समस्या
हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि, जिस तरह से डायबिटीज का खतरा कम उम्र के लोगों में भी बढ़ता जा रहा है, इसे लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है. नियमित रूप से शुगर की जांच और इसे कंट्रोल में रखने वाले उपाय आपको किसी बड़ी समस्या से सुरक्षित रखने में सहायक हो सकते हैं.
धीरे-धीरे सुनने की क्षमता का कम होना
जब लंबे समय तक ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं रहती है, तो यह शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं और नसों को क्षती पहुंचाती है. यही नसें और सूक्ष्म रक्त नलिकाएं आंखों और कानों जैसे संवेदनशील अंगों को सही तरीके से काम करने में सहायता कर सकती हैं. शुगर के कारण जब इन पर प्रभाव पड़ता है, तो आंखों की रोशनी कम होने के साथ-साथ धीरे-धीरे सुनने की क्षमता भी कम होने लगती है.
शुगर लेवल बढ़ेने के कारण आंखों की ही तरह कानों की छोटी-छोटी नसें भी कमजोर
हेयरिंग हेल्थ फाउंडेंशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक शुगर लेवल बढ़े रहने के कारण आंखों की ही तरह कानों की छोटी-छोटी नसें भी कमजोर होने लगती हैं. इसके अंदर की बहुत छोटी ब्लड वेसल्स होती है जो बहुत संवेदनशील होती हैं. खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़े रहने के कारण इनके सिकुड़ने का खतरा बढ़ जाता है. कान की छोटी नसों को होने वाली नुकसान के कारण सबसे पहले टिनिटस (कान में घंटी बजने जैसी समस्या या साफ न सुन पाने की समस्या हो सकती है.