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Benefits of sunlight: धूप सेहत के लिए वरदान या खतरा? जानें कितनी देर धूप लेना है सही और कब बरतें सावधानी

Benefits of sunlight: सीमित मात्रा में धूप शरीर में विटामिन डी बनाने, नींद और मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा धूप सनबर्न, समय से पहले त्वचा बूढ़ी होने और त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ा सकती है. धूप की सही मात्रा त्वचा के रंग, उम्र, मौसम और स्थान के अनुसार अलग-अलग होती है.

Benefits of sunlight: गर्मियों में धूप से बचने की कोशिश करने वाले लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि धूप पूरी तरह से सेहत के लिए खराब नहीं है, लेकिन इसकी मात्रा और समय का सही होना बेहद जरूरी है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीमित समय के लिए धूप में रहना शरीर में विटामिन डी बनने के साथ-साथ नींद, मानसिक स्वास्थ्य और कुछ अन्य शारीरिक प्रक्रियाओं के लिए फायदेमंद हो सकता है. हालांकि, लंबे समय तक बिना सुरक्षा के तेज धूप में रहने से सनबर्न, समय से पहले त्वचा बूढ़ी होने और त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर कितनी धूप शरीर के लिए फायदेमंद है और कब यह नुकसान पहुंचाने लगती है?

सीमित धूप से शरीर को मिल सकते हैं कई फायदे

धूप में सीमित समय बिताने से शरीर में विटामिन डी बनने में मदद मिलती है. यह विटामिन हड्डियों की मजबूती और मांसपेशियों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है. इसके अलावा प्राकृतिक रोशनी का पर्याप्त संपर्क मानसिक स्वास्थ्य, नींद और दिमाग की कार्यक्षमता के लिए भी फायदेमंद हो सकता है. कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि दिन के समय प्राकृतिक रोशनी के संपर्क में रहने से सोचने-समझने की क्षमता, प्रतिक्रिया देने की गति और याददाश्त बेहतर हो सकती है. इसके विपरीत, प्राकृतिक रोशनी का पर्याप्त संपर्क नहीं मिलने पर खराब मूड, अवसाद के लक्षण और नींद से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है.

धूप ब्लड प्रेशर पर भी डाल सकती है असर

सूरज की पराबैंगनी किरणें त्वचा पर पड़ने के बाद शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड के स्राव को प्रभावित कर सकती हैं. इससे रक्त वाहिकाएं फैलती हैं और ब्लड प्रेशर कम होने में मदद मिल सकती है. यही कारण है कि सीमित और सुरक्षित धूप को हृदय तथा रक्त वाहिकाओं की सेहत से भी जोड़ा जाता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ज्यादा देर तक धूप में रहने से स्वास्थ्य लाभ बढ़ते जाएंगे. लंबे समय तक धूप में रहने से फायदा मिलने के बजाय त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंच सकता है.

कितनी देर धूप लेना सही है?

धूप की जरूरत हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं होती. उम्र, मौसम, भौगोलिक स्थिति, त्वचा का रंग और शरीर का कितना हिस्सा खुला है, इन सभी चीजों के आधार पर जरूरत बदल सकती है. विशेषज्ञ आम तौर पर कम समय के लिए लेकिन नियमित रूप से प्राकृतिक रोशनी लेने की सलाह देते हैं. गहरी त्वचा वाले लोगों में मेलानिन की मात्रा अधिक होती है. मेलानिन पराबैंगनी किरणों से कुछ प्राकृतिक सुरक्षा देता है, लेकिन इसकी वजह से त्वचा में विटामिन डी बनने में हल्की त्वचा की तुलना में अधिक समय लग सकता है. वहीं बहुत गोरी त्वचा वाले लोगों को कम समय में ही यूवी किरणों से नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है.

यूवी इंडेक्स देखकर लें फैसला

धूप में निकलने से पहले यूवी इंडेक्स पर ध्यान देना भी उपयोगी है. यह जमीन तक पहुंचने वाली पराबैंगनी किरणों की तीव्रता बताता है और इसका पैमाना 0 से 11+ तक होता है. यूवी स्तर जितना अधिक होगा, त्वचा और आंखों को नुकसान का खतरा उतना ही बढ़ेगा. जिन लोगों की त्वचा बहुत गोरी है, परिवार में त्वचा कैंसर का इतिहास है, शरीर पर बहुत ज्यादा तिल हैं या जो प्रतिरक्षा तंत्र को दबाने वाली दवाएं लेते हैं, उन्हें धूप को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. बहुत ज्यादा देर तक धूप में रहने से शरीर में विटामिन डी का उत्पादन अनिश्चित रूप से बढ़ता नहीं रहता. इसके बजाय सनबर्न, त्वचा पर दाग-धब्बे, समय से पहले झुर्रियां और त्वचा की उम्र बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक अत्यधिक पराबैंगनी किरणों के संपर्क को त्वचा कैंसर के प्रमुख कारणों में माना जाता है.

आंखों को भी धूप से बचाना जरूरी

ज्यादा धूप का असर सिर्फ त्वचा तक सीमित नहीं रहता. लंबे समय तक पराबैंगनी किरणों के संपर्क में रहने से आंखों को भी नुकसान पहुंच सकता है और मोतियाबिंद का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए तेज धूप में बाहर निकलते समय यूवी सुरक्षा वाले धूप के चश्मे पहनना बेहतर माना जाता है.

धूप बिल्कुल न मिलने से भी हो सकती है परेशानी

जहां अत्यधिक धूप नुकसानदायक है, वहीं लंबे समय तक प्राकृतिक रोशनी से दूर रहना भी समस्या पैदा कर सकता है. कम धूप वाले इलाकों में रहने वाले लोगों, घर से बहुत कम बाहर निकलने वालों और गहरी त्वचा वाले लोगों में विटामिन डी की कमी का खतरा अधिक हो सकता है. लंबे समय तक विटामिन डी की कमी से बच्चों में रिकेट्स और वयस्कों में ऑस्टियोमलेशिया जैसी हड्डियों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह के अनुसार सप्लीमेंट भी विकल्प हो सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक अच्छी सेहत के लिए बहुत ज्यादा धूप लेने की जरूरत नहीं है. रोजमर्रा के काम, थोड़ी देर बाहर टहलना या व्यायाम करने के दौरान मिलने वाली प्राकृतिक रोशनी भी उपयोगी हो सकती है. लेकिन लंबे समय तक बिना सुरक्षा के तेज धूप में रहने से बचना चाहिए. खासकर जब यूवी इंडेक्स ज्यादा हो, तब त्वचा और आंखों की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है.

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