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Drool While Sleeping: नींद में लार टपकना एक ऐसी समस्या है जिसका अनुभव हममें से बहुत लोगों ने किया है. चाहे वह गहरी नींद के बाद गीले तकिए से जागना हो या बीमारी के दौरान मुंह से लार आना. चिकित्सकीय भाषा में इसे सियालोरिया कह सकते हैं. लार टपकना तब होता है जब अनजाने में मुंह से अत्यधिक लार आ जाती है. शिशुओं और छोटे बच्चों में, खासकर दांत निकलते समय, यह पूरी तरह से सामान्य है, लेकिन वयस्कों में लगातार या अत्यधिक लार टपकना कभी-कभी किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य बीमारी का लक्षण हो सकता है. आइए जानते हैं, ऐसा क्यों होता है.
मुंह से लार टपकने के क्या कारण होते हैं?
मुंह से लार टपकने के कई कारण हो सकते हैं, इसमें साधारण नींद की आदतें से लेकर कुछ गंभीर मेडिकल स्थितियां भी शामिल हैं. कुछ सबसे आम कारण.
- सोने की मुद्रा है – जो लोग करवट लेकर या पेट के बल सोते हैं, उनमें लार टपकने की संभावना ज्यादा होती है.
- नाक बंद होना – सर्दी, साइनस संक्रमण या एलर्जी के कारण नाक के मार्ग बंद हो जाने से ऐसी नौबत आ सकती है.
- अत्यधिक लार उत्पादन – एसिड रिफ्लक्स, गर्भावस्था या कुछ दवाओं जैसी स्थितियां शरीर को सामान्य से अधिक लार आ सकती हैं.
- निगलने में कठिनाई होना – यदि कोई व्यक्ति ठीक से निगल नहीं पाता है, तो भोजन जमा हो सकता है और बाहर निकल सकता है, इससे लार टपकने लगती हैं.
- तंत्रिका संबंधी समस्या – पार्किंसंस रोग, सेरेब्रल पाल्सी या स्ट्रोक जैसी स्थितियां मांसपेशियों के नियंत्रण को प्रभावित कर सकती हैं, इससे लार टपकने की समस्या हो सकती है.
- स्लीप एपनिया – स्लीप एपनिया से पीड़ित लोगों को अक्सर मुंह से सांस लेने और निगलने की क्रिया में रुकावट का अनुभव होता है, जिससे रात में लार टपक सकती है.
लार टपकने को कैसे रोकें?
- सोने की मुद्रा में बदलाव करें
- बोटॉक्स इंजेक्शन
- वाक् चिकित्सा
- दवाइयां
- सर्जरी
- रेडिएशन थेरेपी