Live
Search
Home > लाइफस्टाइल > फैक्ट्री में मजदूरी से लेकर ‘फुल-स्टैक डेवलपर’ बनने तक का सफर: पुणे का युवक बना मिसाल

फैक्ट्री में मजदूरी से लेकर ‘फुल-स्टैक डेवलपर’ बनने तक का सफर: पुणे का युवक बना मिसाल

यह कहानी संघर्षों से भरी है जिसने महंगे कोचिंग संस्थान या बूटकैंप का सहारा नहीं लिया उन्होंने पूरी तरह मुफ्त ऑनलाइन रिसोर्सेज और डॉक्यूमेंटेशन के जरिए ही HTML, CSS, JavaScript और React सीखी

Written By: Mansi Sharma
Last Updated: 2026-01-04 14:49:37

Mobile Ads 1x1

Pune : अक्सर कहा जाता है कि आप में अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो रास्ते अपने ही बन जाते है.  पुणे के एक युवा ने यह कर दिखाया है. युवक का नाम संभव है जिसने आर्थिक तंगी के कारण कॉलेज छोड़ दिया और सब्जी की फैक्ट्री में 10-12 घंटे की कड़ी मजदूरी कि युवक ने महज 1.5 साल की मेहनत से खुद को एक सफल ‘फुल-स्टैक डेवलपर’ के रूप में स्थापित कर लिया .

संभव की कहानी संघर्षों से भरी है घर की आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी इसके बाद उन्होंने एक वेजिटेबल प्रोसेसिंग फैक्ट्री में काम करना शुरू किया, जहां वे दिन में 10 से 12 घंटे खड़े होकर पैकिंग और सामान उठाने का करते थे.  संभव बताते हैं कि वह दौर उनके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा. संभव की जिंदगी में बदलाव तब आया जब उनके एक दोस्त ने उन्हें कोडिंग सीखने की सलाह दी . उन्हें एलन मस्क का एक मशहूर कथन याद आया कि सीखने के लिए जो कुछ भी चाहिए, वह इंटरनेट पर मुफ्त में उपलब्ध होता है. इसी विचार को सोचकर संभव ने अपनी जमा-पूंजी और माता-पिता की मदद से लैपटॉप खरीदा और फैक्ट्री की नौकरी छोड़कर खुद को सीखने के लिए समर्पित कर दिया. 

संभव ने किसी महंगे कोचिंग संस्थान या बूटकैंप का सहारा नहीं लिया उन्होंने पूरी तरह मुफ्त ऑनलाइन रिसोर्सेज और डॉक्यूमेंटेशन के जरिए ही HTML, CSS, JavaScript और फिर React सीखी उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा और खुद के प्रोजेक्ट्स बनाए . शुरुआती एक महीने में  संभव ने बेसिक सीखा और पहली इंटर्नशिप हासिल की अगले कुछ महीनों में डेटा स्ट्रक्चर (DSA) और बैकएंड डेवलपमेंट में महारत हासिल की और मेहनत रंग लाई उन्हें भोपाल स्थित एक अमेरिकी (US-based) टेक कंपनी में फुल-स्टैक डेवलपर की नौकरी मिल गई. 

संभव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी कहानी साझा करते हुए लिखा कि यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था.  बीच में उनके दादाजी को हार्ट अटैक आने की वजह से उन्हें काम से ब्रेक लेना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी रिकवरी के बाद उन्होंने फ्रीलांसिंग शुरू की और धीरे-धीरे अपने करियर को दोबारा पटरी पर लाए संभव का कहना है, मेरा सफर अनिश्चितताओं और मुश्किलों से भरा रहा है लेकिन अगर आप शून्य से शुरुआत कर रहे हैं, तो 1-2 साल की कड़ी मेहनत आपकी जिंदगी बदल सकती है. आज उनकी यह कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है . जो संसाधनों की कमी के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते है. 

MORE NEWS