Green Wedding: भारत में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं बल्कि एक बड़ा उत्सव होता है. सजावट, खाना, कपड़े, गिफ्ट और मेहमानों की लंबी लिस्ट, सब मिलाकर शादी काफी भव्य होती है. लेकिन अब समय बदल रहा है. आज की युवा पीढ़ी सिर्फ दिखावे वाली शादी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से की गई शादी चाहती है. इसी सोच से ‘ग्रीन वेडिंग’ का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है.
ग्रीन वेडिंग का मतलब है ऐसी शादी जो पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचाए. इसमें कम वेस्ट पैदा किया जाता है, प्लास्टिक का उपयोग घटाया जाता है, लोकल चीजों को बढ़ावा दिया जाता है और प्राकृतिक संसाधनों की बचत की जाती है. खास बात यह है कि ग्रीन वेडिंग दिखने में भी खूबसूरत होती है और कई मामलों में खर्च भी कम कर देती है.
ग्रीन वेडिंग क्या होती है?
ग्रीन वेडिंग का मतलब है ऐसी शादी जो पर्यावरण के अनुकूल हो और जिसमें फिजूलखर्ची, प्लास्टिक और वेस्ट को कम से कम रखा जाए. आज के समय में जब पर्यावरण संकट एक बड़ी समस्या बन चुका है, तब कई युवा कपल्स अपनी शादी को भी जिम्मेदार और टिकाऊ बनाना चाहते हैं. ग्रीन वेडिंग सिर्फ एक थीम नहीं, बल्कि एक सोच है-जिसमें प्यार के साथ प्रकृति का भी सम्मान शामिल होता है.
क्यों बढ़ रहा है ग्रीन वेडिंग का ट्रेंड?
नई पीढ़ी अब दिखावे से ज्यादा जागरूकता को महत्व दे रही है. वे समझते हैं कि एक दिन की चमक-धमक के लिए हजारों किलो कचरा पैदा करना सही नहीं है. यही कारण है कि डिजिटल इनविटेशन, सिंपल डेकोरेशन और लिमिटेड गेस्ट लिस्ट जैसे विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी सस्टेनेबल वेडिंग की कहानियां लोगों को प्रेरित कर रही हैं, जिससे यह ट्रेंड और तेजी से फैल रहा है.
सजावट और फैशन में बड़ा बदलाव
ग्रीन वेडिंग में प्लास्टिक और थर्माकोल की जगह प्राकृतिक फूल, कपड़े की सजावट और मिट्टी के दीयों का उपयोग किया जाता है. कई कपल्स अपने वेडिंग आउटफिट किराए पर लेते हैं या परिवार की पुरानी साड़ी और शेरवानी को नए अंदाज में पहनते हैं. इससे न केवल खर्च कम होता है, बल्कि फैशन इंडस्ट्री से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को भी कम किया जा सकता है.
जीरो-वेस्ट कैटरिंग का बढ़ता चलन
शादियों में सबसे ज्यादा वेस्ट खाने से होता है. ग्रीन वेडिंग में सीमित लेकिन बेहतर मेन्यू रखा जाता है. डिस्पोजेबल प्लास्टिक प्लेट्स की जगह स्टील या बायोडिग्रेडेबल बर्तन इस्तेमाल किए जाते हैं. बचा हुआ खाना जरूरतमंदों तक पहुंचाने की पहल भी इस सोच का हिस्सा है. इससे शादी का जश्न समाज के लिए भी उपयोगी बन जाता है.
क्या ग्रीन वेडिंग भविष्य की नई पहचान है?
जिस तरह पर्यावरण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, उसे देखते हुए ग्रीन वेडिंग आने वाले समय में नई परंपरा बन सकती है. यह सिर्फ खर्च कम करने का तरीका नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने का संदेश भी है. आज की पीढ़ी अपनी खुशियों के साथ-साथ धरती का भी ख्याल रखना चाहती है, और यही सोच इस ट्रेंड को खास बनाती है.