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हिंदू विवाह में सोना कितना जरूरी? धर्म की अनिवार्यता है या सामाजिक परंपरा? जानिए सच्चाई

Gold In Indian Weddings: शादी-विवाह में यदि कोई सोनी नहीं चढ़ा सकता तो क्या होगा. क्या शादियों में सोना बहुत जरूरी है, शास्त्र वास्तव में क्या कहता है.

Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: January 30, 2026 12:43:28 IST

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Gold In Indian Weddings: बदलते समय और बढ़ती आर्थिक चुनौतियों के बीच यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या हिंदू विवाह में सोना वास्तव में धार्मिक रूप से बहुत जरूरी है, या यह केवल सामाजिक परंपरा बनकर रह गया है. विस्तृत रीति-रिवाज, डिजाइनदार साड़ियां और रंग-बिरंगी सजावटों से लेकर शानदार भोजन और संगीत के रश्म तक, भारतीय विवाह दो लोगों के मिलन का एक जीवंत उत्सव है.

श्रृंगार के मुख्‍य रूप में सोना

भारतीय संस्कृति में सोने की महत्वपूर्ण भूमिका है. सदियों से सोने के आभूषण को श्रृंगार के मुख्‍य रूप इस्तेमाल किया जाता है. सोना मूल्यवान संपत्ति धन-संपदा का प्रतीक माना जाता है, जिसे रोजमर्रा की जिंदगी का  हिस्सा भी कहा जाता है. भारतीय संस्कृति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. कई लोग पोंगल और ओणम जैसे त्योहारों को सोने के साथ मनाते हैं. ऐसे ही दिवाली और अक्षय तृतीया सोने के खरीदारी के लिए सबसे लोकप्रिय त्योहार है.

सोने का ही मंगलसूत्र

हिंदू धर्म में शादी चाहें कितनी भी सिंपल, सादी या भव्य हो, भारतीय संस्कृति के अनुसार शादी के रस्म में सोने का बहुत महत्व है. हिंदू विवाह का सबसे जरूरी पार्ट मंगलसूत्र, जिसके बिना शादी पूरी नहीं मानी जाती है, आमतौर पर यह सोने के दो टूकड़ों से ही बनी होती है.

सोने को शुभ क्यों माना जाता है?

सोने को लक्ष्मी को प्रतीक माना जाता है. यह धन, संपत्ती और समृद्धि का संकेत है. सोने को आर्थिक सुरक्षा के रूप में देखा जाता है. यह स्त्रियों का धन होता हैं. साथ ही जरूरी समय में यह आपातकालीन संपत्ति के तौर पर काम करता है. इन्हीं सब कारणों से शादी-विवाह, परिवार आदि में सोने को महत्व को बढ़ाया है.

सोने का विकल्प क्या है?

आज महंगाई के इस दौर में लोग परंपरा को पूर्ण रूप से निभाते हुए उसके विकल्प का चयन कर रहे हैं. इसमें तांबे के आभूषण या पंच धातु शामिल है, चांदी के गहनों को अपनाया जा रहा है, वस्त्र दान, नारियल, फल और अनाज जैसी चीजों को विकल्प के तौर इत्यादि को विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.

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