हमें बचपन से सिखाया जाता है कि आप जो कुछ भी देते हैं, वही आपको मिलता है, और हम आज भी इसी सिद्धांत पर चलते हैं. ‘मिलने की तुम कोशिश करना वादा कभी न करना, वादा तो टूट जाता है…’
ये पंक्ति बताता है कि व्यक्ति के जिंदगी में वादा कितना अहमियत रखता है. वादा टूटने पर अक्सर व्यक्ति टूट जाता है, क्योंकि उसे वादा करने वाले से बहुत उम्मीदें रखती हैं. इस लेख में हम समझेंगे कि हमें वादा टूटने पर इतना दर्द क्यों होता है और इसका क्या प्रभाव पड़ता है व्यक्तित्व पर.
वादा तोड़ने से क्या होता है?
हम अक्सर टूटे वादों को अलग-थलग गलतियां मान लेते हैं, मानो वे सिर्फ आपसी संबंधों में हुई चूक हों जिन्हें नजरअंदाज किया जा सकता है. या एक छोटी सी माफी से माफ किया जा सकता है. हर बार जब आप कुछ करने का वादा करते हैं और फिर उसे पूरा नहीं करते, तो आप सिर्फ किसी और को ही निराश नहीं कर रहे होते. आप धीरे-धीरे अपने चरित्र को बदल रहे होते हैं. आप अपने तंत्रिका तंत्र को यह सिखा रहे होते हैं कि आपके वचन का कोई महत्व नहीं है. आप न सिर्फ बाहरी तौर पर, बल्कि आंतरिक तौर पर भी भरोसे की नींव को तोड़ रहे होते हैं. इसकी कीमत मामूली नहीं होती. यह धीरे-धीरे, दर्दनाक तरीके से, अदृश्य रूप से बढ़ती जाती है.
टूटे हुए वादे इतना दुख क्यों देते हैं?
जब हम किसी व्यकित पर भरोसा करते हैं, तो हम किसी को अपने निजी जीवन में आने की अनुमति दे देते हैं. यह आपका और उनका एक हिस्सा होता है. हम सोचते हैं कि हमारा उनके साथ एक ऐसा बंधन है जो किसी और के पास नहीं है. जब हमें पता चलता है कि हमें धोखा दिया गया है, तो वह हिस्सा हमें कभी वापस नहीं मिलता. वादा टूटने के बाद इंसान, इतना दुखी हो जाता है कि फिर वह किसी और को भी वह अधिकार नहीं देना चाहते. यह घाव उसी चोट से उभरता है जिसने आपको तोड़ा था.
प्यार और भरोसे में वादे क्यों मायने रखते हैं?
वादा सबसे शक्तिशाली शब्द है. किसी भी रिश्ते में, विश्वास ही नींव है. जब बच्चा जन्म लेता है, तो वह शब्दों को नहीं समझता, फिर भी वह अपने माता-पिता पर पूर्ण विश्वास रखता है. क्योंकि उसने नौ महीनों तक उनका मौन वादा सुना है – रक्षा करने, प्यार करने और जीवन से भी बढ़कर संजोने का वादा. यही है एक अनकहे वादे की शक्ति. प्यार में भरोसा कांच की तरह नाजुक होता है. जब हम अपने दोस्तों, प्रियजनों और खुद से किए गए वादों पर विचार करते हैं, तो याद रखें कि सच्चे वादे बोले नहीं जाते, बल्कि निभाए जाते हैं. वादा सिर्फ शब्द नहीं होता, यह एक भावना है, एक बंधन है.
टूटे हुए वादे रिश्तों को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं?
वादे टूटने पर लोग हमेशा के लिए बदल जाते हैं. वे अपनी मासूमियत खो देते हैं. वे हर बात पर सवाल उठाने लगते हैं. जो कभी मजबूत लगता था, अब अनिश्चित लगने लगता है. कुछ लोग फिर कभी किसी पर भरोसा नहीं करते. कुछ लोग सालों तक यह समझने की कोशिश करते रहते हैं कि क्या हुआ था, क्या उन्हें कभी सच में प्यार किया गया था, या उनसे कही गई कोई भी बात कभी सच थी या नहीं. रिश्तों में भी जब भी वादा टूटता है, तो दोबारा उस व्यक्ति की किसी बात पर भरोसा नहीं होता है. धीरे-धीरे रिश्ते कमजोर पड़ जाते हैं और अलग हो जाते हैं.