Identifying Real Diamonds: हीरे की असलियत पहचानने के लिए ज्वेलर्स उसकी चमक, कट, सतह और अंदरूनी बनावट की जांच करते हैं. इसके लिए लूप और डायमंड टेस्टर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, केवल चमक या सांस से भाप जांचने के तरीके से असली हीरे की पुष्टि नहीं की जा सकती. प्राकृतिक और लैब-ग्रोन डायमंड में अंतर करने के लिए विशेष उपकरणों और प्रमाणित ग्रेडिंग रिपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है.
हीरे की चमक पर न जाएं, ज्वेलर्स ऐसे करते हैं असली-नकली की पहचान
Identifying Real Diamonds: हीरे की चमक देखकर उसे असली मान लेना आपकी बड़ी भूल हो सकती है. बाजार में कई ऐसे पत्थर मौजूद हैं, जो देखने में बिल्कुल हीरे जैसे चमकते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ज्वेलरी की दुकान पर बैठे ज्वेलर्स कुछ ही मिनटों में हीरे की शुरुआती पहचान कैसे कर लेते हैं? इसके लिए वे सिर्फ अपनी आंखों पर भरोसा नहीं करते, बल्कि खास आवर्धक कांच, डायमंड टेस्टर और दूसरे जांच उपकरणों की मदद लेते हैं. हालांकि, हर तरह के हीरे की पहचान केवल कुछ सेकंड में करना संभव नहीं होता. खासकर प्राकृतिक हीरे और लैब में तैयार किए गए डायमंड के बीच अंतर करने के लिए विशेषज्ञ जांच की जरूरत पड़ सकती है.
हीरे की शुरुआती जांच में सबसे पहले उसके कट, आकार, चमक और सतह को ध्यान से देखा जाता है. अनुभवी ज्वेलर्स पत्थर की बनावट और रोशनी पड़ने पर उसके व्यवहार को देखकर शुरुआती अनुमान लगा सकते हैं. हालांकि, चमकदार दिखाई देना असली हीरे की गारंटी नहीं है. क्यूबिक जिरकोनिया जैसे दूसरे पदार्थ भी हीरे की तरह चमक सकते हैं. इसलिए केवल आंखों से देखकर किसी पत्थर को असली मान लेना सही नहीं है.
ज्वेलर्स हीरे की बारीकी से जांच करने के लिए लूप नाम के विशेष आवर्धक कांच का इस्तेमाल करते हैं. इसकी मदद से पत्थर को बड़ा करके देखा जाता है, जिससे उसके अंदर मौजूद छोटे निशान, दरारें और दूसरी विशेषताओं को समझने में मदद मिलती है. प्राकृतिक हीरों में कई बार ऐसी आंतरिक विशेषताएं मिलती हैं, जो उनकी पहचान के लिए उपयोगी हो सकती हैं. हालांकि, हर प्राकृतिक हीरे में एक जैसी विशेषताएं नहीं होतीं और न ही केवल अंदरूनी निशानों के आधार पर उसकी प्रामाणिकता का अंतिम फैसला किया जा सकता है.
हीरे की जांच के लिए ज्वेलर्स डायमंड टेस्टर का भी इस्तेमाल करते हैं. कुछ उपकरण हीरे की तापीय चालकता यानी गर्मी को संचालित करने की क्षमता की जांच करते हैं. हीरे के इस गुण के कारण उसे कई दूसरे पदार्थों से अलग पहचानने में मदद मिलती है. वहीं, कुछ आधुनिक उपकरण विद्युत चालकता जैसी विशेषताओं की भी जांच करते हैं. इन परीक्षणों से पत्थर की पहचान के बारे में उपयोगी जानकारी मिल सकती है, लेकिन हर उपकरण सभी तरह के नकली पत्थरों या दूसरे डायमंड की पहचान नहीं कर सकता.
अक्सर कहा जाता है कि हीरे पर सांस छोड़ने से उसकी असलियत का पता चल जाता है. इस दावे के मुताबिक, असली हीरे पर बनी भाप जल्दी गायब हो जाती है. हालांकि, यह तरीका भरोसेमंद जांच नहीं है. पत्थर का तापमान, उसकी सतह और आसपास की परिस्थितियां इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं. इसलिए सांस से भाप जांचने जैसे घरेलू तरीकों के आधार पर महंगा हीरा खरीदना जोखिम भरा हो सकता है.
हीरे की पहचान से जुड़ी एक अहम बात यह है कि लैब में तैयार किया गया डायमंड नकली पत्थर नहीं होता. लैब-ग्रोन डायमंड की रासायनिक संरचना और क्रिस्टल संरचना प्राकृतिक हीरे जैसी ही होती है. दोनों के बीच मुख्य अंतर उनके बनने की प्रक्रिया का है. प्राकृतिक हीरा धरती के भीतर प्राकृतिक परिस्थितियों में बनता है, जबकि लैब-ग्रोन डायमंड नियंत्रित परिस्थितियों में तैयार किया जाता है. इसी वजह से सामान्य डायमंड टेस्टर से हमेशा यह पता लगाना संभव नहीं होता कि हीरा प्राकृतिक है या लैब में बनाया गया है. इसके लिए विशेष उपकरणों और जरूरत पड़ने पर जेमोलॉजिकल लैब की जांच की सहायता ली जाती है.
अगर आप महंगा हीरा खरीदने जा रहे हैं, तो केवल उसकी चमक या दुकानदार के दावे पर भरोसा न करें. उसकी ग्रेडिंग रिपोर्ट और प्रमाणपत्र की जांच करना भी जरूरी है. हीरे की ग्रेडिंग में आमतौर पर 4सी को देखा जाता है. इसमें कट यानी तराशने की गुणवत्ता, कलर यानी रंग, क्लैरिटी यानी स्पष्टता और कैरेट यानी वजन शामिल हैं. ये चारों विशेषताएं हीरे की गुणवत्ता और कीमत को समझने में मदद करती हैं. खरीदारी के समय रिपोर्ट में दर्ज जानकारी और पत्थर की पहचान का मिलान करें. जरूरत पड़ने पर किसी विश्वसनीय जेमोलॉजिकल लैब से प्रमाणित रिपोर्ट भी जांचें.
अनुभवी ज्वेलर्स शुरुआती जांच में हीरे की कई विशेषताओं का अनुमान जल्दी लगा सकते हैं. इसके लिए वे आंखों से निरीक्षण करने के साथ लूप और डायमंड टेस्टर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन हर मामले में कुछ सेकंड के भीतर 100 फीसदी पक्की पहचान संभव नहीं होती. विशेष रूप से प्राकृतिक और लैब-ग्रोन डायमंड के बीच अंतर करने के लिए अधिक उन्नत जांच की जरूरत पड़ सकती है. इसलिए हीरा खरीदते समय उसकी चमक के साथ पहचान, ग्रेडिंग और प्रमाणित रिपोर्ट पर भी ध्यान देना चाहिए.
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