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Home > लाइफस्टाइल > क्यों हल्दी की रस्म के बिना अधूरी है शादी? सिर्फ धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक कारणों से भी महत्वपूर्ण है सदियों पुरानी यह परंपरा

क्यों हल्दी की रस्म के बिना अधूरी है शादी? सिर्फ धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक कारणों से भी महत्वपूर्ण है सदियों पुरानी यह परंपरा

क्या आपने कभी सोचा है कि ये हल्दी की रस्म को इतना सेलिब्रेट क्यों किया जाता है? हल्दी की रस्म सिर्फ एक पारंपरिक रस्म नहीं है, बल्कि इसके वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक कारण भी है. इस आर्टिकल में वर्षों से चली आ रही इस परंपरा का धार्मिक, वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक महत्त्व के बारे में बताया गया है.

Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: February 28, 2026 11:49:27 IST

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शादियों का सीजन चल रहा है. जिनके घरों में शादी है वो हल्दी, मेंहदी, संगीत आदि फंक्शंस की तैयारियों में लगे हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये हल्दी की रस्म को इतना सेलिब्रेट क्यों किया जाता है? क्यों सदियों से इस परंपरा का पालन किया जा रहा है? 
दरअसल, हल्दी की रस्म सिर्फ एक पारंपरिक रस्म नहीं है, बल्कि इसके वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक कारण भी है. आइये इस आर्टिकल के माध्यम से समझते हैं कि वर्षों से चली आ रही इस परंपरा का धार्मिक, वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक रूप से क्या महत्त्व है.

धार्मिक महत्व  

हिंदू धर्म में हल्दी को बृहस्पति ग्रह और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. विवाह से पहले दूल्हे‑दुल्हन पर हल्दी लगाने का अर्थ है कि उन्हें जारी नई जिंदगी के लिए शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से “शुद्ध” किया जा रहा है. वहीं ज्योतिष विज्ञान के अनुसार सुखी वैवाहिक जीवन के लिए देवगुरु बृहस्पति की कृपा आवश्यक है. इसलिए गुरु की कृपादृष्टि के लिए भी इस परंपरा का बेहद महत्त्व है.

वैज्ञानिक कारण  

हल्दी में करक्यूमिन नामक यौगिक होता है, जिसके एंटी‑इंफ्लेमेटरी और एंटी‑ऑक्सीडेंट गुण होते हैं. इस कारण हल्दी का लेप त्वचा के लिए फायदेमंद माना जाता है. यह दाग‑धब्बे, ऑयलीनेस और खुजली को कम कर सकता है और चेहरे की चमक बढ़ाता है, जिससे वेडिंग फोटोज़ में दूल्हा‑दुल्हन और भी खूबसूरत दिखते हैं. चूंकि पहले के समय में ब्यूटी पार्लर और फेशियल जैसी चीजों का अस्तित्व नहीं था. लोग सुंदर दिखने के लिए घरेलू संसाधनों पर ही निर्भर थे. इसलिए दुल्हन और दूल्हे के चेहरे, हाथ और पैर पर हल्दी का लेप लगाया जाता था. हल्दी‑मिश्रित हल्का तेल या दूध लगाने से त्वचा को मॉइस्चराइज़ भी मिलता है और यह खुजली या स्किन इरिटेशन को कुछ हद तक कम कर सकता है.

हल्दी के आरोग्य संबंधी लाभ  

हल्दी प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और एंटी‑फंगल गुण वाली माना जाती है, जिससे त्वचा के छोटे‑छोटे इन्फेक्शन या एलर्जी को रोकने में मदद मिल सकती है. हालांकि, बहुत गाढ़ा हल्दी का लेप या बहुत लंबे समय तक हल्दी लगाने से त्वचा चिपचिपी या गहरा रंग ले सकती है, इसलिए आमतौर पर हल्दी को थोड़ा सा दूध, तेल या हल्के मसालों के साथ बनाकर लगाया जाता है और बाद में नरमी से धो दिया जाता है. हल्दी रस्म एक तरह का “नेचुरल फेस मास्क” है, जो दिखावट और स्वास्थ्य दोनों को ध्यान में रखते हुए विवाह के दिन के लिए दंपति को तैयार करती है.

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शादियों का सीजन चल रहा है. जिनके घरों में शादी है वो हल्दी, मेंहदी, संगीत आदि फंक्शंस की तैयारियों में लगे हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये हल्दी की रस्म को इतना सेलिब्रेट क्यों किया जाता है? क्यों सदियों से इस परंपरा का पालन किया जा रहा है? 
दरअसल, हल्दी की रस्म सिर्फ एक पारंपरिक रस्म नहीं है, बल्कि इसके वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक कारण भी है. आइये इस आर्टिकल के माध्यम से समझते हैं कि वर्षों से चली आ रही इस परंपरा का धार्मिक, वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक रूप से क्या महत्त्व है.

धार्मिक महत्व  

हिंदू धर्म में हल्दी को बृहस्पति ग्रह और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. विवाह से पहले दूल्हे‑दुल्हन पर हल्दी लगाने का अर्थ है कि उन्हें जारी नई जिंदगी के लिए शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से “शुद्ध” किया जा रहा है. वहीं ज्योतिष विज्ञान के अनुसार सुखी वैवाहिक जीवन के लिए देवगुरु बृहस्पति की कृपा आवश्यक है. इसलिए गुरु की कृपादृष्टि के लिए भी इस परंपरा का बेहद महत्त्व है.

वैज्ञानिक कारण  

हल्दी में करक्यूमिन नामक यौगिक होता है, जिसके एंटी‑इंफ्लेमेटरी और एंटी‑ऑक्सीडेंट गुण होते हैं. इस कारण हल्दी का लेप त्वचा के लिए फायदेमंद माना जाता है. यह दाग‑धब्बे, ऑयलीनेस और खुजली को कम कर सकता है और चेहरे की चमक बढ़ाता है, जिससे वेडिंग फोटोज़ में दूल्हा‑दुल्हन और भी खूबसूरत दिखते हैं. चूंकि पहले के समय में ब्यूटी पार्लर और फेशियल जैसी चीजों का अस्तित्व नहीं था. लोग सुंदर दिखने के लिए घरेलू संसाधनों पर ही निर्भर थे. इसलिए दुल्हन और दूल्हे के चेहरे, हाथ और पैर पर हल्दी का लेप लगाया जाता था. हल्दी‑मिश्रित हल्का तेल या दूध लगाने से त्वचा को मॉइस्चराइज़ भी मिलता है और यह खुजली या स्किन इरिटेशन को कुछ हद तक कम कर सकता है.

हल्दी के आरोग्य संबंधी लाभ  

हल्दी प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और एंटी‑फंगल गुण वाली माना जाती है, जिससे त्वचा के छोटे‑छोटे इन्फेक्शन या एलर्जी को रोकने में मदद मिल सकती है. हालांकि, बहुत गाढ़ा हल्दी का लेप या बहुत लंबे समय तक हल्दी लगाने से त्वचा चिपचिपी या गहरा रंग ले सकती है, इसलिए आमतौर पर हल्दी को थोड़ा सा दूध, तेल या हल्के मसालों के साथ बनाकर लगाया जाता है और बाद में नरमी से धो दिया जाता है. हल्दी रस्म एक तरह का “नेचुरल फेस मास्क” है, जो दिखावट और स्वास्थ्य दोनों को ध्यान में रखते हुए विवाह के दिन के लिए दंपति को तैयार करती है.

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