Indias Wildest Train Journey: कुछ ट्रेन यात्राएं आप अपनी सुविधा के लिए करते हैं और कुछ इसलिए करते हैं क्योंकि खिड़की के बाहर की दुनिया एक डॉक्यूमेंट्री की तरह रियल टाइम में सामने आती हुई महसूस होती है. कर्नाटक में सकलेशपुर-सुब्रमण्य घाट लाइन ऐसी ही है. अक्सर भारत के सबसे सिनेमैटिक रास्तों में से एक के रूप में जानी जाने वाली यह लाइन पश्चिमी घाट के घने बाघों वाले जंगलों से होकर गुज़रती है. यह लाइन ऐतिहासिक हसन-मैंगलोर रेलवे का एक हिस्सा है. हालांकि, सकलेशपुर और सुब्रमण्य रोड के बीच का हिस्सा सबसे ज़्यादा रोमांचक है. इसी वजह से इसे “ग्रीन रूट” का उपनाम मिला है. सुबह-सुबह ट्रेन सकलेशपुर स्टेशन से निकलती है और कुछ ही मिनटों में दुनिया बदल जाती है और दोनों तरफ जंगल दिखने लगते हैं.
खिड़की के बाहर खूबसूरत नजारों से भरी दुनिया
यह रास्ता बिस्ले रिज़र्व फ़ॉरेस्ट और कुद्रेमुख लैंडस्केप के बाहरी किनारों से होकर गुज़रता है. ये दोनों इलाके बाघ, तेंदुए, हाथी, सांभर, गौर और कई तरह के पक्षियों और सरीसृपों के लिए जाने जाते हैं. रेलवे लाइन को खुद जंगल के साथ शांति से रहने के लिए बनाया गया था. यहां लगभग 50 पुल और 10 से ज़्यादा सुरंगें हैं, जिनमें से हर एक अपना खास पल बनाती है.
रोमांच के बावजूद यह सफर सफारी के तौर पर डिज़ाइन नहीं की गई है. यहां मकसद जानबूझकर वन्यजीवों को देखना नहीं है, बल्कि भारत के सबसे नाज़ुक इकोलॉजिकल जोन में से एक से सम्मान के साथ गुजरना है. कुछ हिस्सों में जंगल की कैनोपी इतनी घनी है कि सूरज की रोशनी मुश्किल से ज़मीन तक पहुंच पाती है.
शानदार अनुभव को जिएं
इन्हीं खूबसूरती की वजह से ही इस रास्ते को दूसरी खूबसूरत रेल यात्राओं से अलग बनाती है. यह अकेलेपन का एहसास देता है, जहां बस सुकून है. यहां पर मोबाइल नेटवर्क अक्सर आते-जाते रहते हैं, तो टेंशन लेने की जरूरत नहीं हैं. इस रास्ते के स्टेशन छोटे और शांत हैं. ऐसा लगता है जिंदगी भीड़ और रफ्तार से जाकर कहीं थम सी गई है. कभी-कभी ट्रेन यात्रियों के लिए नहीं बल्कि हाथियों के लिए धीमी हो जाती है. मॉनसून के चरम मौसम में ट्रैक पर काम करने वालों द्वारा बाघों को देखे जाने की कई कहानियाँ भी हैं, जो स्थानीय लोगों को बहुत पसंद हैं. चाहे यात्रियों को उनकी झलक मिले या न मिले, बस यह सोच कि ये शानदार जानवर बिना दिखे पास में घूमते हैं. यह पूरे सफर के रोमांच को और भी बढ़ा देती है.