LPG Shortage Hacks: भारत के ज्यादातर घरों में खाना बनाने के लिए ‘एलपीजी गैस’ पर ही निर्भरता होती है. सुबह की रोटी से शाम तक, किचन का लगभग हर काम इसी गैस से चलता है. लेकिनपश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर गैस सप्लाई पर भी पड़ा है.दरअसल भारत अपनी जरूरत का काफी एलपीजी ‘कतर, सऊदी अरब और यूएई; जैसे देशों से आयात करता है. इस समय वहां हालात बिगड़ने के वजह से तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है,ऐसे में कई लोगों को चिंता होने लगती है कि सिलेंडर कब खत्म हो जाएगा और अगला कब मिलेगा.
हालांकि भारतीय किचन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां लोग हर स्थिति में खुद को ढालना जानते हैं. कुछ आसान तरीके अपनाकर गैस की बचत भी की जा सकती है और खाना बनाने का काम भी जारी रखा जा सकता है.
इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल
अगर आपके घर में ‘इंडक्शन कुकर, इलेक्ट्रिक केतली या हीटर’ है तो इनका इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है. पानी उबालना, दूध गर्म करना या चाय बनाना जैसे छोटे काम गैस की बजाय इन उपकरणों पर किए जा सकते हैं. इससे गैस उन कामों के लिए बच जाएगी जहां सीधे आंच की जरूरत होती है, जैसे रोटी बनाना.
माइक्रोवेव और एयर फ्रायर का भी लें सहारा
कई लोग माइक्रोवेव या एयर फ्रायर का इस्तेमाल सिर्फ स्नैक्स या खाना गर्म करने के लिए करते हैं, लेकिन इनसे कई चीजें आसानी से पकाई भी जा सकती हैं. माइक्रोवेव में चावल बनाना, सब्जियां पकाना या भूनना भी संभव है. इससे गैस की खपत कम हो सकती है.
अगर संभव हो तो PNG कनेक्शन लें
कई शहरों में अब ‘पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG)’ की सुविधा मिल रही है. इसमें गैस सीधे पाइपलाइन के जरिए घर तक पहुंचती है, इसलिए सिलेंडर खत्म होने की चिंता नहीं रहती. अगर आपके इलाके में यह सुविधा है तो यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है.
बिना गैस के बनने वाले खाने भी हैं विकल्प
- कई बार गैस बचाने का सबसे आसान तरीका यह है कि ऐसे व्यंजन बनाए जाएं जिन्हें पकाने की जरूरत ही न हो.
- दही पोहा: पोहे को थोड़ी देर पानी में भिगोकर दही, प्याज, हरी मिर्च और नमक मिलाकर खाया जा सकता है.
- स्प्राउट सलाद: अंकुरित मूंग या चने में टमाटर, खीरा, नींबू और चाट मसाला मिलाकर पौष्टिक सलाद बनाया जा सकता है.
- मूंगफली चाट: भुनी हुई मूंगफली में कटी सब्जियां और मसाले मिलाकर स्वादिष्ट और प्रोटीन से भरपूर स्नैक तैयार किया जा सकता है.
पश्चिम एशिया का असर भारत पर क्यों पड़ता है
भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी उपभोक्ताओं में से एक है, लेकिन देश में इसका उत्पादन मांग के मुकाबले कम है. इसलिए बड़ी मात्रा में गैस विदेशों से आती है.इनमें से ज्यादातर टैंकर ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ नाम के समुद्री रास्ते से गुजरते हैं. अगर इस इलाके में तनाव या संघर्ष बढ़ता है, तो जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और गैस की सप्लाई में देरी हो सकती है.