Black Orlov: रत्नों की दुनिया में कई हीरे अपनी चमक व कीमत के लिए मशहूर है , लेकिन ‘ब्लैक ऑरलव’ इन सब से अलग है. बता दें कि 67.49 कैरेट का यह दुर्लभ काला हीरा अपनी सुंदरता के साथ रहस्यमयी इतिहास के लिए भी जाना जाता है, जिसने इसे शापित हीरा की पहचान दी है .
19 वीं सदी की शुरुआत में दक्षिण भारत के पुडुचेरी स्थित एक प्राचीन मंदिर में भगवान ब्रह्मा की मूर्ति की आंख के रूप में यह हीरा जड़ा हुआ था .उस समय पर इसका वजन करीब 195 कैरेट था कहा जाता है कि एक साधु या संभवतः एक यूरोपीय मिशनरी ने इसे मूर्ति से निकालकर चुरा लिया था . इसी के साथ ही घटना को हीरे पर लगे श्राप की शुरुआत माना गया .
20वीं सदी में जब यह हीरा पश्चिमी देशों के बाजार में पहुँचा, तब इसके साथ जुड़ी मौतों ने इसे सुर्खियों में ला दिया .1932 अमेरिकी व्यापारी जे.डब्ल्यू. पेरिस, जिन्होंने इसे अमेरिका लाया था, कुछ ही समय बाद न्यूयॉर्क की एक इमारत से कूदकर आत्महत्या कर बैठे 1947 रूसी राजकुमारी नाडिया व्यागिन-ऑरलव और राजकुमारी लियोनीला गैलिट्सिन ने कुछ महीनों के अंतराल में ऊँची इमारतों से कूदकर जान दे दी. इसी वजह से इस हीरे को ‘ब्लैक ऑरलव’ नाम मिला.
लगातार होती मौतों के डर से, 1950 के दशक में इसके मालिक चार्ल्स एफ. विंसन ने हीरे को तीन हिस्सों में कटवा दिया माना गया कि इससे इसकी नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाएगी. 2004 में इसे व्यापारी डेनिस पेटिमेजास ने खरीदा और 2006 में क्रिस्टी की नीलामी में यह लगभग ₹3 करोड़ में बिका. तब से इसके मालिकों के साथ किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं आई है.
इतिहासकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह सब महज़ संयोग या बाज़ार में हीरे को रहस्यमयी बनाने का एक तरीका हो सकता है. भारत में प्राकृतिक रूप से काले हीरे मिलना बेहद दुर्लभ है और राजकुमारियों की मौतों के आधिकारिक रिकॉर्ड भी संदिग्ध बताए जाते हैं.