Vajan Kaise Kam Kare: कई विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत से लोग पूरी कोशिश करते हैं -डाइट भी रखते हैं, एक्सरसाइज भी करते हैं ,फिर भी उनका वजन आसानी से कम नहीं होता. इसका मतलब यह नहीं कि वे आलसी हैं बल्कि शरीर के अंदर कई ऐसी चीजें चल रही होती हैं जिन पर हमारा सीधा कंट्रोल नहीं होता.
कुछ लोगों के जीन ऐसे होते हैं कि उन्हें ज्यादा भूख लगती है या खाना खाने के बाद भी पेट भरा हुआ महसूस नहीं होता.कुछ जीन मेटाबॉलिज्म यानी शरीर की ऊर्जा जलाने की रफ्तार को भी प्रभावित करते हैं. इसका मतलब है कि दो लोग बराबर खाना खाएं, तो भी एक का वजन ज्यादा बढ़ सकता है और दूसरे का कम.वैज्ञानिकों का मानना है कि हजारों जीन वजन पर असर डाल सकते हैं, लेकिन अभी हमें उनमें से बहुत कम के बारे में ही ठीक से जानकारी है.
‘सेट वेट पॉइंट’ क्या होता है?
कुछ डॉक्टरों का कहना है कि हर व्यक्ति के शरीर का एक ‘सेट पॉइंट’ होता है,अगर आप बहुत कम कैलोरी वाली डाइट से वजन घटाने की कोशिश करते हैं, तो शरीर इसे खतरे की तरह ले सकता है. तब भूख बढ़ जाती है और मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है.यही वजह है कि बहुत से लोग वजन कम करके फिर से बढ़ा लेते हैं. इसे ही लोग ‘यो-यो डाइटिंग’ कहते हैं.
हार्मोन का प्रभाव
लेप्टिन नाम का एक हार्मोन शरीर को बताता है कि कितनी चर्बी जमा है. अगर यह सिस्टम ठीक से काम करे, तो शरीर खुद भूख कम कर देता है.लेकिन ज्यादा प्रोसेस्ड खाना और बार-बार मीठा खाने से यह संतुलन बिगड़ सकता है. तब दिमाग सही तरह से समझ नहीं पाता कि शरीर में कितनी ऊर्जा जमा है.
बदलता माहौल भी जिम्मेदार
आज के समय में हर जगह सस्ता और ज्यादा कैलोरी वाला खाना आसानी से मिल जाता है. फास्ट फूड, मीठे ड्रिंक, लगातार विज्ञापन, ये सब हमें ज्यादा खाने के लिए उकसाते हैं.शहरों में चलने-फिरने की जगह कम है, लोग ज्यादा समय बैठकर काम करते हैं. ऐसे माहौल को कुछ विशेषज्ञ “मोटापा बढ़ाने वाला वातावरण” कहते हैं.इसका मतलब यह है कि सिर्फ व्यक्ति की इच्छा ही नहीं, बल्कि उसका माहौल भी वजन पर असर डालता है.
जंक फूड के विज्ञापन पर रोक
कुछ लोग मानते हैं कि सरकार को जंक फूड के विज्ञापन और प्रमोशन पर रोक लगानी चाहिए ताकि लोग कम आकर्षित हों.दूसरे लोग कहते हैं कि फिट रहना व्यक्ति की निजी जिम्मेदारी है, सरकार लोगों को जबरदस्ती पतला नहीं बना सकती.
इच्छाशक्ति की असली भूमिका
इच्छाशक्ति की कोई भूमिका नहीं है, ऐसा भी नहीं है. लेकिन यह पूरी कहानी नहीं है.मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि इच्छाशक्ति हर समय एक जैसी नहीं रहती. थकान, तनाव और भूख इसे कमजोर कर सकते हैं.जो लोग लचीला रवैया अपनाते हैं -जैसे अगर एक बिस्किट खा लिया तो वहीं रुक जाएं- वे ज्यादा सफल होते हैं.