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बदलते मौसम और बाहर के असुरक्षित खान-पान के कारण इन दिनों फूड पॉइजनिंग (Food Poisoning) के मामलों में काफी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है. दूषित भोजन या अशुद्ध पानी का सेवन न केवल पाचन तंत्र को बिगाड़ता है, बल्कि गंभीर स्थिति में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस या परजीवी शरीर में प्रवेश कर विषैले तत्व पैदा करते है, जिससे शरीर बीमार पड़ जाता है.
कैसे पहचानें फूड पॉइजनिंग के लक्षण?
फूड पॉइजनिंग होने पर शरीर बहुत जल्दी प्रतिक्रिया देता है. दूषित खाना खाने के कुछ घंटों के भीतर ही पेट में तेज दर्द और मरोड़ महसूस होने लगती है. इसके साथ ही जी मिचलाना और बार-बार उल्टी होना इसके प्रमुख लक्षण है. शरीर में संक्रमण बढ़ने पर लगातार दस्त (Diarrhea) की समस्या हो सकती है, जिससे शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की भारी कमी हो जाती है. कुछ मामलों में व्यक्ति को हल्का बुखार, सिरदर्द और अत्यधिक कमजोरी भी महसूस हो सकती है.
क्यों होती है फूड पॉइजनिंग? मुख्य कारण
इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण साफ-सफाई की कमी है. बिना हाथ धोए खाना बनाना या गंदे बर्तनों का इस्तेमाल बैक्टीरिया को पनपने का मौका देता है. इसके अलावा, अधपका मांस या कच्चा अंडा खाने से भी संक्रमण का खतरा रहता है क्योंकि इनमें साल्मोनेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया जीवित रह सकते है. लंबे समय तक बाहर रखा गया बासी या खुला भोजन और दूषित पानी से बनी बर्फ या पेय पदार्थ भी फूड पॉइजनिंग के मुख्य स्रोत माने जाते है.
बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय
फूड पॉइजनिंग से बचने का सबसे प्रभावी तरीका सावधानी है. हमेशा ताजा और गर्म भोजन ही करें और बाहर के खुले हुए खाने से परहेज करें. खाना बनाने और खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना अनिवार्य है. कच्चे फलों और सब्जियों को इस्तेमाल करने से पहले साफ पानी से जरूर धोएं. यदि आपको संक्रमण के लक्षण महसूस हों, तो शरीर में पानी की कमी न होने दें और ओआरएस (ORS) या नारियल पानी का सेवन करें.
डॉक्टर की सलाह कब लें?
साधारण फूड पॉइजनिंग एक-दो दिन में ठीक हो जाती है, लेकिन यदि उल्टी या दस्त रुक न रहे हों, मल में खून आ रहा हो या तेज बुखार के साथ चक्कर आ रहे हों, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के मामले में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है.