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रेनबो ऑप्टिकल इल्यूजन: कला या संकेत, हर दिमाग इसे अलग क्यों देखता है?

Optical Illusion: रेनबो ऑप्टिकल इल्यूजन को हर दिमाग अलग-अलग क्यों देखता है. क्या यह किसी खास संकेत के लिए बनाए जाते हैं या बस आर्ट है.

Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: January 22, 2026 12:45:30 IST

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Optical Illusion: सोशल मीडिया पर इन दिनों रेनबो ऑप्टिकल इल्यूजन तेजी से वायरल हो रहा है. यदि आप पहली बार में इसको देखते हैं तो यह एक बहुत ही मनमोहर दृश्य लगता है. लेकिन कुछ लोगों के लिए इसे देखना दूसरे वाइब से मेल कराती है. यही वजह है कि इल्यूजन अब सिर्फ एक कला नहीं है, बल्कि यह मानवीय धारणा या प्रतिक्रिया है ने इसे बहस का मुद्दा बना दिया है.

रेनबो ऑप्टिकल इल्यूजन क्या है?

रेनबो ऑप्टिकल इल्यूजन एक सर्कुलर पैटर्न होता है. यह ग्रेडिएंट रंग और स्मूद शेड ट्रांजिशन से तैयार हाता है. इसे इस तरह से बाया जाता है कि लगता है यह एक दूसरे में घुल गये हैं. यह आपको आंखों को 3D आकार में ऐसा लगता है जैसे चलती-फिरती आकृती है.

बादलों को ध्यान से देखने पर चेहरा दिखना

साइकोलॉजिस्ट के आधार पर, इस तरह के इल्यूजन में हमारा दिमाग बिना असली कारण देखे या जानें बिना कुछ जानने वाले आकृतियां बनाने लगता है. जैसे बादलों को ध्यान से देखने पर किसी का चेहरा नजर आना.

धारणा अलग-अलग क्यों होती है?

एक्सपर्ट का कहना है कि किसी भी तरह के आर्ट को देखना सब्जेक्टिव होता है. लेकिन कुछ लोगों को यह रंग और ज्योमेट्री के तौर पर दिखता है, तो कुछ लोगों को यह पैटर्न भावनात्मक इशारों से जुड़ जाती है. 

आर्ट के विशेषज्ञ बताते हैं कि यह नहीं अश्लील होता है और नहीं इसे किसी विशेष संकेत के लिए बनाया जाता है. इससे यह पता चलता है कि हम जो देखते हैं हमेशा वह वास्तव में वहीं नहीं होता है.

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रेनबो ऑप्टिकल इल्यूजन: कला या संकेत, हर दिमाग इसे अलग क्यों देखता है?

Optical Illusion: रेनबो ऑप्टिकल इल्यूजन को हर दिमाग अलग-अलग क्यों देखता है. क्या यह किसी खास संकेत के लिए बनाए जाते हैं या बस आर्ट है.

Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: January 22, 2026 12:45:30 IST

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रेनबो ऑप्टिकल इल्यूजन क्या है?

रेनबो ऑप्टिकल इल्यूजन एक सर्कुलर पैटर्न होता है. यह ग्रेडिएंट रंग और स्मूद शेड ट्रांजिशन से तैयार हाता है. इसे इस तरह से बाया जाता है कि लगता है यह एक दूसरे में घुल गये हैं. यह आपको आंखों को 3D आकार में ऐसा लगता है जैसे चलती-फिरती आकृती है.

बादलों को ध्यान से देखने पर चेहरा दिखना

साइकोलॉजिस्ट के आधार पर, इस तरह के इल्यूजन में हमारा दिमाग बिना असली कारण देखे या जानें बिना कुछ जानने वाले आकृतियां बनाने लगता है. जैसे बादलों को ध्यान से देखने पर किसी का चेहरा नजर आना.

धारणा अलग-अलग क्यों होती है?

एक्सपर्ट का कहना है कि किसी भी तरह के आर्ट को देखना सब्जेक्टिव होता है. लेकिन कुछ लोगों को यह रंग और ज्योमेट्री के तौर पर दिखता है, तो कुछ लोगों को यह पैटर्न भावनात्मक इशारों से जुड़ जाती है. 

आर्ट के विशेषज्ञ बताते हैं कि यह नहीं अश्लील होता है और नहीं इसे किसी विशेष संकेत के लिए बनाया जाता है. इससे यह पता चलता है कि हम जो देखते हैं हमेशा वह वास्तव में वहीं नहीं होता है.

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