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Relationship Rule: 3-6-9 महीने का डेटिंग नियम क्या है जो हर नए रिलेशनशिप कपल को पता होना चाहिए?

Relationship Rule: यदि आप रिलेशनशिप में हैं या शुरुआत कर रहे हैं तो यह नियम आपको पता होना चाहिए. शुरुआती एक्साइटमेंट खत्म होने के बाद कई रिलेशनशिप क्यों खराब हो जाते हैं?

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: January 4, 2026 17:56:11 IST

Relationship Rule: लोग रिलेशनशिप शुरू तो कर देते हैं लेकिन उसे आगे बढ़ाना सबसे मुश्किल काम होता है. शुरुआती एक्साइटमेंट खत्म होने के बाद कई रिलेशनशिप क्यों खराब हो जाते हैं? यहीं पर ‘3-6-9 महीने का नियम’ काम आता है, जो सोशल मीडिया और रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. यह नियम तीन ज़रूरी स्टेज के बारे में बात करता है जो किसी रिलेशनशिप की उम्र तय करते हैं.

1. तीसरा महीना: ‘हनीमून पीरियड‘ खत्म होता है

रिलेशनशिप के पहले तीन महीनों को ‘हनीमून फेज‘ कहा जाता है. इस दौरान हम अपने पार्टनर की सिर्फ़ अच्छी बातें ही देखते हैं लेकिन तीन महीने बाद, यह जादुई दुनिया धीरे-धीरे बदलने लगती है. आखिर ऐसा क्या होता है? तो जवाब है कि आप अपने पार्टनर की कमियों और आदतों को नोटिस करने लगते हैं. यह वह स्टेज है जहां कई लोग सोचने लगते हैं, “क्या यह मेरे लिए सही इंसान है?” रिलेशनशिप तभी अगले स्टेज पर जाएगा जब आप आपसी तालमेल को पहचानेंगे और एक-दूसरे की कमियों को स्वीकार करेंगे.

2. छठा महीना: रियलिटी चेक स्टेज

छह महीने पूरे होने तक रिलेशनशिप ज़्यादा सीरियस हो जाता है. यह एक ऐसा फेज है जहां आपसी विश्वास और नज़दीकी की परीक्षा होती है. यहां, आप अपने पार्टनर के परिवार, दोस्तों और उनके अतीत के बारे में ज़्यादा जानते हैं. शुरुआती आकर्षण खत्म हो जाता है और सुरक्षा ज़्यादा ज़रूरी हो जाती है. इस समय बहस और असहमति होना स्वाभाविक है. रिलेशनशिप का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि आप इन समस्याओं को एक साथ कैसे सुलझाते हैं. जो रिलेशनशिप यहां खराब नहीं होते, उनके शादी या लंबे समय तक चलने वाले कमिटमेंट की ओर बढ़ने की संभावना होती है.

3. नौवां महीना: क्या वे जीवन भर साथ रहेंगे?

नौवां महीना रिलेशनशिप के लिए एक ‘फाइनल टेस्ट‘ की तरह होता है. यहां, प्यार सिर्फ़ एक भावना नहीं रह जाता बल्कि एक ज़िम्मेदारी बन जाता है. भविष्य के बारे में गंभीर बातचीत होती है. यह वह समय है जब आप साफ़ तौर पर समझते हैं कि आप दोनों फाइनेंस, करियर के लक्ष्यों और लाइफस्टाइल के मामले में कितने कम्पैटिबल हैं. जो कपल नौ महीने सफलतापूर्वक पूरे कर लेते हैं, वे एक-दूसरे को पूरी तरह समझ सकते हैं. यहां प्यार और समझौता साफ़ दिखाई देता है. इस स्टेज के बाद रिश्ते के टूटने के चांस बहुत कम होते हैं.

यह नियम क्यों?

इस ‘3-6-9’ नियम को फॉलो करने से आप अपने पार्टनर पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय रिश्ते के हर स्टेज पर साफ तौर पर समझदारी के साथ आगे बढ़ पाते हैं. यह आपको रिश्ते में शुरू में ही ‘रेड फ्लैग्स‘ पहचानने और सही फैसले लेने में मदद करता है. शॉर्ट में कहें तो, प्यार कोई रेस नहीं है, बल्कि आपसी समझ और ग्रोथ का सफ़र है. ज्यादातर मामलों में रिश्ते टूट जाते हैं क्योंकि वो एक-दूसरे को समझे बिना बस गलतियों में ही उलझे रहते हैं. छोटी-मोटी बातों के लेकर बहस होने लगती है. इसकी बजाय यह देखना होता है कि हम इसका समाधान कैसे खोजें? फिलहाल, कई जानकार ‘3-6-9’ का नियम बताते हैं जो कुछ हद तक कारगार साबित हुआ है.

नोट – यहां दिया गया लेख सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से है. हम किसी तरह की एक्सपर्ट सलाह नहीं देते. किसी भी तरह की परेशानी के लिए अपने चिकित्सक या मनोचिकित्सक एक्सपर्ट से राय जरूर लें.

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Relationship Rule: 3-6-9 महीने का डेटिंग नियम क्या है जो हर नए रिलेशनशिप कपल को पता होना चाहिए?

Relationship Rule: यदि आप रिलेशनशिप में हैं या शुरुआत कर रहे हैं तो यह नियम आपको पता होना चाहिए. शुरुआती एक्साइटमेंट खत्म होने के बाद कई रिलेशनशिप क्यों खराब हो जाते हैं?

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: January 4, 2026 17:56:11 IST

Relationship Rule: लोग रिलेशनशिप शुरू तो कर देते हैं लेकिन उसे आगे बढ़ाना सबसे मुश्किल काम होता है. शुरुआती एक्साइटमेंट खत्म होने के बाद कई रिलेशनशिप क्यों खराब हो जाते हैं? यहीं पर ‘3-6-9 महीने का नियम’ काम आता है, जो सोशल मीडिया और रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. यह नियम तीन ज़रूरी स्टेज के बारे में बात करता है जो किसी रिलेशनशिप की उम्र तय करते हैं.

1. तीसरा महीना: ‘हनीमून पीरियड‘ खत्म होता है

रिलेशनशिप के पहले तीन महीनों को ‘हनीमून फेज‘ कहा जाता है. इस दौरान हम अपने पार्टनर की सिर्फ़ अच्छी बातें ही देखते हैं लेकिन तीन महीने बाद, यह जादुई दुनिया धीरे-धीरे बदलने लगती है. आखिर ऐसा क्या होता है? तो जवाब है कि आप अपने पार्टनर की कमियों और आदतों को नोटिस करने लगते हैं. यह वह स्टेज है जहां कई लोग सोचने लगते हैं, “क्या यह मेरे लिए सही इंसान है?” रिलेशनशिप तभी अगले स्टेज पर जाएगा जब आप आपसी तालमेल को पहचानेंगे और एक-दूसरे की कमियों को स्वीकार करेंगे.

2. छठा महीना: रियलिटी चेक स्टेज

छह महीने पूरे होने तक रिलेशनशिप ज़्यादा सीरियस हो जाता है. यह एक ऐसा फेज है जहां आपसी विश्वास और नज़दीकी की परीक्षा होती है. यहां, आप अपने पार्टनर के परिवार, दोस्तों और उनके अतीत के बारे में ज़्यादा जानते हैं. शुरुआती आकर्षण खत्म हो जाता है और सुरक्षा ज़्यादा ज़रूरी हो जाती है. इस समय बहस और असहमति होना स्वाभाविक है. रिलेशनशिप का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि आप इन समस्याओं को एक साथ कैसे सुलझाते हैं. जो रिलेशनशिप यहां खराब नहीं होते, उनके शादी या लंबे समय तक चलने वाले कमिटमेंट की ओर बढ़ने की संभावना होती है.

3. नौवां महीना: क्या वे जीवन भर साथ रहेंगे?

नौवां महीना रिलेशनशिप के लिए एक ‘फाइनल टेस्ट‘ की तरह होता है. यहां, प्यार सिर्फ़ एक भावना नहीं रह जाता बल्कि एक ज़िम्मेदारी बन जाता है. भविष्य के बारे में गंभीर बातचीत होती है. यह वह समय है जब आप साफ़ तौर पर समझते हैं कि आप दोनों फाइनेंस, करियर के लक्ष्यों और लाइफस्टाइल के मामले में कितने कम्पैटिबल हैं. जो कपल नौ महीने सफलतापूर्वक पूरे कर लेते हैं, वे एक-दूसरे को पूरी तरह समझ सकते हैं. यहां प्यार और समझौता साफ़ दिखाई देता है. इस स्टेज के बाद रिश्ते के टूटने के चांस बहुत कम होते हैं.

यह नियम क्यों?

इस ‘3-6-9’ नियम को फॉलो करने से आप अपने पार्टनर पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय रिश्ते के हर स्टेज पर साफ तौर पर समझदारी के साथ आगे बढ़ पाते हैं. यह आपको रिश्ते में शुरू में ही ‘रेड फ्लैग्स‘ पहचानने और सही फैसले लेने में मदद करता है. शॉर्ट में कहें तो, प्यार कोई रेस नहीं है, बल्कि आपसी समझ और ग्रोथ का सफ़र है. ज्यादातर मामलों में रिश्ते टूट जाते हैं क्योंकि वो एक-दूसरे को समझे बिना बस गलतियों में ही उलझे रहते हैं. छोटी-मोटी बातों के लेकर बहस होने लगती है. इसकी बजाय यह देखना होता है कि हम इसका समाधान कैसे खोजें? फिलहाल, कई जानकार ‘3-6-9’ का नियम बताते हैं जो कुछ हद तक कारगार साबित हुआ है.

नोट – यहां दिया गया लेख सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से है. हम किसी तरह की एक्सपर्ट सलाह नहीं देते. किसी भी तरह की परेशानी के लिए अपने चिकित्सक या मनोचिकित्सक एक्सपर्ट से राय जरूर लें.

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