Samudrik Shastra: आज के टाइम पर उंगलियों के निशान का इस्तेमाल खास कर पहचान, कानूनी जांच और सुरक्षा के लिहाजे से किया जाता है. इसे ही आधुनिक विज्ञान में बायोमेट्रिक डेटा कहा जाता है. लेकिन सनातन भारतीय ज्ञान परंपरा में उंगलियों के निशान और हथेली की रेखाएं केवल एक पहचान नहीं है, बल्कि व्यक्ति के स्वभाव, कर्म, प्रवृत्ति और जीवन पथ से जुड़ी मानी जाती थीं. और यहीं से आया सामुद्रिक शास्त्र. आइए जानते हैं, सामुद्रिक शास्त्र क्या है, कैसे काम करता है.
सामुद्रिक शास्त्र क्या है?
सामुद्रिक शास्त्र किसी व्यक्ति के शरीर के अंगो के आकार और बनावट के आधार पर विश्लेषण किया जाता है. यहां हम बात करेंगे हाथों और उंगलियों के बारे में, जिससे किस्मत से जुड़ी सभी बातों का पता लगाया जा सकता है.
हाथ का अंगूठा
सामुद्रिक शास्त्र में अंगूठे को तीन हिस्सों में देखा जाता है. इसमें ऊपरी भाग, मध्य भाग और अंतिम भाग होता है. यदि इसका पहला हिस्सा ज्यादा लंबा होता है तो व्यक्ति कम उम्र में सफलता के कागार पर होता है. इसी के साथ वह अपने करियर और जिम्मेदारियों को लेकर गंभीर होता है.
मध्यमा उंगली
हाथ की सबसे बीच वाली उंगली को मध्यम उंगली कहते हैं. इसमें व्यक्ति के कार्यक्षेत्र और करियर को जाना जाता है. यह जितनी बड़ी होती है व्यक्ति उतना ही अपने व्यापार या करियर में आगे बढ़ता है. यदि यह उंगली अनामिका से छोटी होती है तो जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
तर्जनी उंगली
अगर आपकी तर्जनी उंगली ज्यादा सीधी और लंबी होती है तो व्यक्ति को जीवन में विशेष उन्नती प्राप्त होती है. ऐसे लोगों को लग्जरी जीवन बहुत पसंद होता है. ऐसे में यदि तर्जनी उंगली अनामिका उंगली के बराबर होता है तो यह अशुभ का संकेत होता है.
कनिष्ठा उंगली
कनिष्ठा उंगली हाथ की सबसे छोटी उंगली होती है. यह उंगली व्यक्ति के परिवारिक जीवन और आर्थिक स्थिती के बारे में बताता है. यह उंगली जितनी लंबी होती है, व्यक्ति उतना ही दूरदर्शी होता है. व्यक्ति का समाज में अलग पहचान होता है.
अनामिका उंगली
यह उंगली व्यक्ति का स्वास्थ्य, भावनाएं, नाम-शोहरत को बताती है. यदि हाथ की अनामिका उंगली लंबी हो तो वयक्ति क्रोधी हो सकता है. अगर यह उंगली मध्यम होती है तो यह शुभ का संकेत है. इसमें व्यक्ति को किस्मत का साथ मिलता है.