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Home > लाइफस्टाइल > बिना मक्खन-घी मेरा काम नहीं चलता, पंजाबी जड़ों और खाने के प्यार पर सबा आजाद का बयान हुआ वायरल

बिना मक्खन-घी मेरा काम नहीं चलता, पंजाबी जड़ों और खाने के प्यार पर सबा आजाद का बयान हुआ वायरल

Saba Azad: सिंगर और एक्ट्रेस सबा आजाद ने एक बार अपने पंजाबी बैकग्राउंड और खाने के प्रति अपने प्यार को लेकर खुलकर बातचीत की.उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि वह खाने के लिए जीती हैं,आइए जानते हैं पुरी बातचीत.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: 2026-02-04 13:43:28

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Saba Azad Traditional Nutrition: 2025 में भारती सिंह और हर्ष लिम्बाचिया के यूट्यूब पॉडकास्ट में सबा ने कहा,’मैं पंजाब से हूं, मैं सरदार हूं. मैं खाने के लिए जीती हूं. मुझे मक्खन, घी सब कुछ चाहिए, उसके बिना मेरा काम नहीं चलता.’

सबा की इस बात से यह साफ पता चलता है कि वह खाने को लेकर खुद को रोकने की बजाय उसे खुलकर और खुशी से एन्जॉय करती हैं. इसी सोच को समझने के लिए हमने एक एक्सपर्ट से बात की कि पारंपरिक और थोड़ा भारी खाना समझदारी से कैसे खाया जा सकता है.

डाइटिशियन की राय

कंसल्टेंट डाइटिशियन गरिमा गोयल के अनुसार, सबा का नजरिया सख्त डाइटिंग की बजाय संतुलित और समझदारी भरे खान-पान को दर्शाता है.उन्होंने बताया कि घी और मक्खन जैसी चीजें अगर सीमित मात्रा में और संतुलित डाइट के साथ लिए जाएं, तो ये सेहत के लिए नुकसानदेह नहीं होते.

गरिमा गोयल ने कहा

‘घी और मक्खन अच्छे फैट्स का स्रोत होते हैं. ये शरीर को ऊर्जा देते हैं, कुछ जरूरी विटामिन्स को अवशोषित करने में मदद करते हैं और खाने का स्वाद भी बढ़ाते हैं. सही मात्रा में इनका सेवन भोजन को ज्यादा संतोषजनक और पोषण से भरपूर बनाता है.”

मात्रा पर रखें ध्यान

उन्होंने आगे बताया कि समस्या खाने में नहीं, बल्कि उसकी मात्रा और फ्रीक्वेंसी में होती है.’दाल में तड़का लगाने, सब्जियां भूनने या खाने को फिनिशिंग टच देने के लिए थोड़ी-सी मात्रा में घी या मक्खन इस्तेमाल किया जा सकता है. जब इसे सब्ज़ियों, प्रोटीन और साबुत अनाज के साथ खाया जाता है, तो यह शरीर के लिए संतुलित रहता है और जरूरत से ज्यादा खाने की इच्छा भी नहीं होती.’

खाने से रिश्ता होना चाहिए सकारात्मक

वेलनेस के नजरिए से देखें तो खाने को पसंद करना और उसे खुशी से खाना, भोजन के साथ एक बेहतर रिश्ता बनाने में मदद करता है.
गरिमा गोयल का कहना है,’खाना सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, खुशी और आपसी जुड़ाव से भी जुड़ा होता है. जब कोई व्यक्ति अपने पसंदीदा स्वादों को अपनाते हुए संतुलन बनाए रखता है, तो वह एक टिकाऊ और स्वस्थ खान-पान का उदाहरण बनता है.’

हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है

उन्होंने यह भी कहा कि हर किसी की शारीरिक जरूरतें अलग होती हैं.’जिन लोगों को कोलेस्ट्रॉल, शुगर या पाचन से जुड़ी दिक्कतें होती हैं, उन्हें घी-मक्खन का सेवन सीमित रखना चाहिए और फाइबर, प्रोटीन व एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए. ऐसे मामलों में न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर होता है.’

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बिना मक्खन-घी मेरा काम नहीं चलता, पंजाबी जड़ों और खाने के प्यार पर सबा आजाद का बयान हुआ वायरल

Saba Azad: सिंगर और एक्ट्रेस सबा आजाद ने एक बार अपने पंजाबी बैकग्राउंड और खाने के प्रति अपने प्यार को लेकर खुलकर बातचीत की.उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि वह खाने के लिए जीती हैं,आइए जानते हैं पुरी बातचीत.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: 2026-02-04 13:43:28

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Saba Azad Traditional Nutrition: 2025 में भारती सिंह और हर्ष लिम्बाचिया के यूट्यूब पॉडकास्ट में सबा ने कहा,’मैं पंजाब से हूं, मैं सरदार हूं. मैं खाने के लिए जीती हूं. मुझे मक्खन, घी सब कुछ चाहिए, उसके बिना मेरा काम नहीं चलता.’

सबा की इस बात से यह साफ पता चलता है कि वह खाने को लेकर खुद को रोकने की बजाय उसे खुलकर और खुशी से एन्जॉय करती हैं. इसी सोच को समझने के लिए हमने एक एक्सपर्ट से बात की कि पारंपरिक और थोड़ा भारी खाना समझदारी से कैसे खाया जा सकता है.

डाइटिशियन की राय

कंसल्टेंट डाइटिशियन गरिमा गोयल के अनुसार, सबा का नजरिया सख्त डाइटिंग की बजाय संतुलित और समझदारी भरे खान-पान को दर्शाता है.उन्होंने बताया कि घी और मक्खन जैसी चीजें अगर सीमित मात्रा में और संतुलित डाइट के साथ लिए जाएं, तो ये सेहत के लिए नुकसानदेह नहीं होते.

गरिमा गोयल ने कहा

‘घी और मक्खन अच्छे फैट्स का स्रोत होते हैं. ये शरीर को ऊर्जा देते हैं, कुछ जरूरी विटामिन्स को अवशोषित करने में मदद करते हैं और खाने का स्वाद भी बढ़ाते हैं. सही मात्रा में इनका सेवन भोजन को ज्यादा संतोषजनक और पोषण से भरपूर बनाता है.”

मात्रा पर रखें ध्यान

उन्होंने आगे बताया कि समस्या खाने में नहीं, बल्कि उसकी मात्रा और फ्रीक्वेंसी में होती है.’दाल में तड़का लगाने, सब्जियां भूनने या खाने को फिनिशिंग टच देने के लिए थोड़ी-सी मात्रा में घी या मक्खन इस्तेमाल किया जा सकता है. जब इसे सब्ज़ियों, प्रोटीन और साबुत अनाज के साथ खाया जाता है, तो यह शरीर के लिए संतुलित रहता है और जरूरत से ज्यादा खाने की इच्छा भी नहीं होती.’

खाने से रिश्ता होना चाहिए सकारात्मक

वेलनेस के नजरिए से देखें तो खाने को पसंद करना और उसे खुशी से खाना, भोजन के साथ एक बेहतर रिश्ता बनाने में मदद करता है.
गरिमा गोयल का कहना है,’खाना सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, खुशी और आपसी जुड़ाव से भी जुड़ा होता है. जब कोई व्यक्ति अपने पसंदीदा स्वादों को अपनाते हुए संतुलन बनाए रखता है, तो वह एक टिकाऊ और स्वस्थ खान-पान का उदाहरण बनता है.’

हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है

उन्होंने यह भी कहा कि हर किसी की शारीरिक जरूरतें अलग होती हैं.’जिन लोगों को कोलेस्ट्रॉल, शुगर या पाचन से जुड़ी दिक्कतें होती हैं, उन्हें घी-मक्खन का सेवन सीमित रखना चाहिए और फाइबर, प्रोटीन व एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए. ऐसे मामलों में न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर होता है.’

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