How To Remove Earwax Safely: कान हमारे शरीर का बेहद नाजुक और महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसकी सही देखभाल जरूरी है, लेकिन अक्सर लोग कान की सफाई के नाम पर गलत तरीके अपनाकर खुद को नुकसान पहुंचा लेते हैं. कान में बनने वाला मैल, जिसे मेडिकल भाषा में सिरुमेन (Cerumen) कहा जाता है, स्वाभाविक रूप से बनता है और कान को संक्रमण व धूल से बचाता है. समस्या तब होती है जब यह वैक्स ज्यादा मात्रा में जमा हो जाए और कान को ब्लॉक कर दे. आइए जानते हैं कान के मैल से जुड़ी पूरी जानकारी, उसके नुकसान और सुरक्षित रूप से इसे निकालने के तरीके. कान में मैल क्यों बनता है? कान की ग्रंथियों से निकलने वाला यह पदार्थ असल में शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली है. यह न केवल कान की नमी बनाए रखता है, बल्कि बैक्टीरिया और धूल को अंदर जाने से रोकता है. सामान्यतः यह वैक्स धीरे-धीरे सूखकर या बात करने-खाने जैसी हलचल से अपने आप बाहर आ जाता है. ज्यादा वैक्स जमा होने से होने वाली दिक्कतें जब कान में मैल सामान्य से अधिक हो जाता है, तो यह परेशानी पैदा कर सकता है:कान में भारीपन या ब्लॉकेज महसूस होनासुनने की क्षमता कम होनाकान में लगातार भनभनाहट या बजने जैसी आवाज (Tinnitus)दबाव या दर्द की शिकायत कान का मैल निकालने के सुरक्षित तरीके 1. वैक्स को अपने आप बाहर आने देना- सबसे सुरक्षित और प्राकृतिक तरीका यही है कि वैक्स को खुद-ब-खुद बाहर निकलने दिया जाए। इसके लिए बाजार में मिलने वाले वैक्स सॉफ्टनिंग ईयर ड्रॉप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है. ये ड्रॉप्स वैक्स को नरम कर देते हैं, जिससे यह धीरे-धीरे कान से बाहर आ जाता है. इसमें कुछ दिन या हफ्ते भी लग सकते हैं, लेकिन यह सबसे सुरक्षित उपाय है.2. डॉक्टर द्वारा सक्शन (Suction Method)- अगर वैक्स बाहर नहीं आता और कान बंद या भारी महसूस होता है, तो ईएनटी डॉक्टर की मदद लेना जरूरी है. डॉक्टर विशेष मशीन की मदद से वैक्स को खींचकर बाहर निकालते हैं. इसे ड्राई क्लीनिंग भी कहा जाता है. इसमें पानी का इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए संक्रमण का खतरा कम रहता है.3. कान में हल्के प्रेशर से पानी डालना (Irrigation Method)- बच्चों में आमतौर पर यही तरीका अपनाया जाता है. डॉक्टर हल्के दबाव से पानी डालकर वैक्स को बाहर निकालते हैं. यह बच्चों के लिए आसान और सुरक्षित माना जाता है क्योंकि वे सक्शन या पिकिंग में सहयोग नहीं कर पाते.4. मैनुअल पिकिंग (Manual Removal)- इसमें डॉक्टर खास उपकरणों की मदद से वैक्स को खुरचकर निकालते हैं. हालांकि इसमें हल्की चोट का खतरा रहता है, इसलिए इसे केवल तब अपनाया जाता है जब अन्य तरीके काम न करें. बच्चों और बड़ों में फर्क बड़ों में आमतौर पर सक्शन या मैनुअल पिकिंग का उपयोग किया जाता है, लेकिन बच्चों में पानी डालकर वैक्स निकालना ज्यादा सुरक्षित और आसान रहता है. हर स्थिति में डॉक्टर की निगरानी जरूरी है क्योंकि कान की नली बेहद नाजुक होती है. किन तरीकों से बचना चाहिए? कान साफ करने के लिए कॉटन बड्स, नुकीली वस्तुएं (पिन, माचिस की तीलियां आदि), इनका इस्तेमाल करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे कान में चोट, संक्रमण या परफोरेशन (कान का पर्दा फटना) तक हो सकता है.