Parents vs Children Property Rights: 10 फरवरी, 2026 को झारखंड हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक संपत्ती के साथ कुछ जिम्मेदारियां जुड़ी होती हैं. यदि पुत्र और बहू संप्त्ती का लाभ उठाना चाहते हैं, तो उन्हें उन माता-पिता के लिए एक सही वातावरण स्थापित करना होगा. जिनसे संपत्ति का दावा किया जा रहा है. यह सुनिश्चित करते हुए कि माता-पिता सुरक्षित और सहज महसूस कर रहे हैं.
क्या बेटे को विरासत के अधिकारों से वंचित किया जा सकता है?
इंडिया लॉ एलएलपी की पार्टनर निधि सिंह का कहना है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 6 के तहत ऐसा होता है कि, हिंदू पुत्र को पैतृक संपत्ति में तहत हिस्सा मिलता है. इसलिए झारखंड अदालत का निर्णय पैतृक संपत्ति में पुत्र के उत्तराधिकार अधिकारों को प्रभावित नहीं करता है.
निधि सिंह कहती हैं, स्वयं अर्जित संपत्ति के मामले में , माता-पिता वसीयत के माध्यम से बच्चे को उत्तराधिकार से वंचित या बेदखल कर सकते हैं. झारखंड हाई कोर्ट का यह फैसलाकेवल वरिष्ठ नागरिकों के शांतिपूर्ण निवास और गरिमा के अधिकार की रक्षा करता है और बच्चों के उत्तराधिकार अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं डालता है.
बेटा या बेटी यदि अपने माता-पिता का भरण-पोषण नहीं करते हैं, तो क्या उन्हें विरासत से वंचित किया जा सकता है?
निधि सिंह का कहना है कि पुत्र या पुत्री की भरण-पोषण की जिम्मेदारी उनके उत्तराधिकार अधिकारों को प्रभावित नहीं करती है. हालांकि, यदि वे भरण-पोषण प्रदान नहीं करते हैं, तो वृद्ध माता-पिता वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत सहायता या सुरक्षा का अनुरोध आवश्य कर सकते हैं. निधि सिंह का कहना हैं, वरिष्ठ नागरिक माता-पिता वसीयत बनाकर अपने बच्चे को स्व-अर्जित संपत्ति से भी वंचित कर सकते हैं.
क्या उत्तराधिकार संबंधी प्रावधान केवल पुत्र या पुत्री पर ही लागू होते हैं या बहू पर भी?
निधि सिंह के मुताबिक, वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण का दायित्व उनके बच्चों या बहू के उत्तराधिकार अधिकारों को प्रभावित नहीं करता है. यदि बच्चे माता-पिता का भरण-पोषण करने में समर्थ नहीं है, तो माता-पिता वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत राहत प्राप्त कर सकते हैं. निधि सिंह का कहना है, यदि कोई वरिष्ठ नागरिक निःसंतान है, तो भरण-पोषण का दायित्व उन रिश्तेदारों पर आ जाता है जो लागू उत्तराधिकार कानूनों के तहत उत्तराधिकारी बनते हैं.