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Shivshakti Anugrah Pith – परम पूज्य Prashant Maharaj Ji के पावन सान्निध्य में

Written By: Indianews Webdesk
Last Updated: March 26, 2026 18:43:37 IST

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लखनऊ (उत्तर प्रदेश), मार्च 25: सनातन धर्म केवल एक आस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक दिव्य पद्धति है, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग दिखाती है। युगों-युगों से ऋषि-मुनियों, संतों और महापुरुषों ने इस पवित्र परंपरा को अपने तप, त्याग और सेवा से जीवंत रखा है। आज उसी दिव्य परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य श्री शिवशक्ति अनुग्रह पीठ कर रही है, जो परम पूज्य प्रशांत महाराज जी के पावन सान्निध्य में धर्म, सेवा और साधना का एक अद्भुत केंद्र बन चुका है।

इस पीठ का मूल भाव अत्यंत सरल, किन्तु गहन आध्यात्मिक सत्य से परिपूर्ण है —

“महाराज जी की सेवा ही शिवत्व है।”

अर्थात गुरु की सेवा ही भगवान शिव की साक्षात आराधना है। जब मनुष्य निस्वार्थ भाव से सेवा करता है, तो वही सेवा साधना बन जाती है और वही साधना शिवत्व की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।

इसी दिव्य संकल्प को साकार करने हेतु दिनांक

29 मार्च 2026, रविवार

वीर बाबा मंदिर, गौशाला, सैधरी (लखीमपुर खीरी)

की पुण्यभूमि पर एक अत्यंत भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन का शुभारंभ होने जा रहा है।

Pranu

इस अवसर पर समूहिक यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार का आयोजन किया जाएगा, जो सनातन धर्म के 16 संस्कारों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है। यह संस्कार बालक को वेदमार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है और उसके जीवन में अनुशासन, संयम तथा ज्ञान का संचार करता है। यज्ञोपवीत केवल एक धागा नहीं, बल्कि यह आत्मा को धर्म से जोड़ने का एक पवित्र सूत्र है, जो जीवन को एक नई दिशा प्रदान करता है।

इसके साथ ही इस दिव्य आयोजन के अंतर्गत श्रीधाम मथुरा की निःशुल्क धाम यात्रा का भी विशेष प्रबंध किया गया है। इस यात्रा में श्रद्धालुओं के लिए आना-जाना, रहने एवं भोजन की संपूर्ण व्यवस्था पूर्णतः निःशुल्क रहेगी। यह सेवा विशेष रूप से साधु-संतों एवं आर्थिक रूप से कमजोर श्रद्धालुओं के लिए समर्पित है, ताकि वे भी बिना किसी बाधा के भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के दर्शन कर सकें और अपनी आत्मा को भक्ति और शांति से परिपूर्ण कर सकें।

यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और समानता का एक जीवंत उदाहरण है, जहाँ हर व्यक्ति को बिना भेदभाव के स्थान मिलता है। यहाँ न कोई बड़ा है, न छोटा — सभी शिव के अंश हैं, और सभी का स्वागत समान भाव से किया जाता है।

इस दिव्य कार्य को सफल बनाने में शिवशक्ति अनुग्रह पीठ परिवार के समर्पित सेवकों का महत्वपूर्ण योगदान है —

श्रीमती अनुराधा मिश्रा जी (अध्यक्ष), श्री सत्य प्रकाश जी (मुख्य संरक्षक), पूज्य माताजी पूनम मिश्रा जी, श्री C. D. दुबे जी, श्री संजय सिंह जी, श्री शारदा कांत पांडे जी, श्री अश्विन चतुर्वेदी जी एवं श्री प्रिंस मिश्रा जी** — जिनकी निष्ठा, सेवा और समर्पण इस आयोजन को दिव्यता प्रदान कर रहे हैं।

अंततः, यह आयोजन हमें यह संदेश देता है कि जब हम सेवा को ही साधना मान लेते हैं, तब हमारा प्रत्येक कर्म भगवान की उपासना बन जाता है। यही शिवत्व का मार्ग है, यही सनातन का सार है।

आप सभी श्रद्धालुओं से विनम्र निवेदन है कि इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर इस दिव्य अनुष्ठान एवं धाम यात्रा का लाभ प्राप्त करें और अपने जीवन को धर्ममय, पवित्र एवं सफल बनाएं।

हर हर महादेव

शंकर महाराज जी की जय

जय सनातन धर्म

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

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Last Updated: March 26, 2026 18:43:37 IST

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लखनऊ (उत्तर प्रदेश), मार्च 25: सनातन धर्म केवल एक आस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक दिव्य पद्धति है, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग दिखाती है। युगों-युगों से ऋषि-मुनियों, संतों और महापुरुषों ने इस पवित्र परंपरा को अपने तप, त्याग और सेवा से जीवंत रखा है। आज उसी दिव्य परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य श्री शिवशक्ति अनुग्रह पीठ कर रही है, जो परम पूज्य प्रशांत महाराज जी के पावन सान्निध्य में धर्म, सेवा और साधना का एक अद्भुत केंद्र बन चुका है।

इस पीठ का मूल भाव अत्यंत सरल, किन्तु गहन आध्यात्मिक सत्य से परिपूर्ण है —

“महाराज जी की सेवा ही शिवत्व है।”

अर्थात गुरु की सेवा ही भगवान शिव की साक्षात आराधना है। जब मनुष्य निस्वार्थ भाव से सेवा करता है, तो वही सेवा साधना बन जाती है और वही साधना शिवत्व की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।

इसी दिव्य संकल्प को साकार करने हेतु दिनांक

29 मार्च 2026, रविवार

वीर बाबा मंदिर, गौशाला, सैधरी (लखीमपुर खीरी)

की पुण्यभूमि पर एक अत्यंत भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन का शुभारंभ होने जा रहा है।

Pranu

इस अवसर पर समूहिक यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार का आयोजन किया जाएगा, जो सनातन धर्म के 16 संस्कारों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है। यह संस्कार बालक को वेदमार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है और उसके जीवन में अनुशासन, संयम तथा ज्ञान का संचार करता है। यज्ञोपवीत केवल एक धागा नहीं, बल्कि यह आत्मा को धर्म से जोड़ने का एक पवित्र सूत्र है, जो जीवन को एक नई दिशा प्रदान करता है।

इसके साथ ही इस दिव्य आयोजन के अंतर्गत श्रीधाम मथुरा की निःशुल्क धाम यात्रा का भी विशेष प्रबंध किया गया है। इस यात्रा में श्रद्धालुओं के लिए आना-जाना, रहने एवं भोजन की संपूर्ण व्यवस्था पूर्णतः निःशुल्क रहेगी। यह सेवा विशेष रूप से साधु-संतों एवं आर्थिक रूप से कमजोर श्रद्धालुओं के लिए समर्पित है, ताकि वे भी बिना किसी बाधा के भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के दर्शन कर सकें और अपनी आत्मा को भक्ति और शांति से परिपूर्ण कर सकें।

यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और समानता का एक जीवंत उदाहरण है, जहाँ हर व्यक्ति को बिना भेदभाव के स्थान मिलता है। यहाँ न कोई बड़ा है, न छोटा — सभी शिव के अंश हैं, और सभी का स्वागत समान भाव से किया जाता है।

इस दिव्य कार्य को सफल बनाने में शिवशक्ति अनुग्रह पीठ परिवार के समर्पित सेवकों का महत्वपूर्ण योगदान है —

श्रीमती अनुराधा मिश्रा जी (अध्यक्ष), श्री सत्य प्रकाश जी (मुख्य संरक्षक), पूज्य माताजी पूनम मिश्रा जी, श्री C. D. दुबे जी, श्री संजय सिंह जी, श्री शारदा कांत पांडे जी, श्री अश्विन चतुर्वेदी जी एवं श्री प्रिंस मिश्रा जी** — जिनकी निष्ठा, सेवा और समर्पण इस आयोजन को दिव्यता प्रदान कर रहे हैं।

अंततः, यह आयोजन हमें यह संदेश देता है कि जब हम सेवा को ही साधना मान लेते हैं, तब हमारा प्रत्येक कर्म भगवान की उपासना बन जाता है। यही शिवत्व का मार्ग है, यही सनातन का सार है।

आप सभी श्रद्धालुओं से विनम्र निवेदन है कि इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर इस दिव्य अनुष्ठान एवं धाम यात्रा का लाभ प्राप्त करें और अपने जीवन को धर्ममय, पवित्र एवं सफल बनाएं।

हर हर महादेव

शंकर महाराज जी की जय

जय सनातन धर्म

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

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