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Sudha Reddy : किसी भी व्यक्ति के लिए बिजनेस, फैशन और परिवार के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता है. लेकिन सुधा रेड्डी इसे अपने अंदाज में इस कल्चर को बखूबी निभाती हैं. सुधा रेड्डी अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद वह फिट और सक्रिय रहती हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि सुधा रेड्डी फिटनेस के लिए कैलोरी काउंट में यकीन नहीं करती हैं. हाल ही में उन्होंने अपने लाइफस्टाइल, खान-पान और काम के बीच संतुलन बनाने के तरीके पर खुलकर बात की है.
सुबह की शुरुआत
सुधा रेड्डी अपनी सुबह की शुरुआत प्रार्थना से करती हैं. कहती हैं आध्यात्मिक शांति बहुत जरूरी है. फोन देखने या अपना शेड्यूल तय करने से पहले, सुधा रेड्डी कुछ समय शांति से बैठकर खुद को शांत करती हैं. उसके बाद, व्यायाम करती हैं क्योंकि शारीरिक गतिविधि दिन की शुरुआत को बेहतर बनाती है.
सफल व्यवसायी महिला
सुधा रेड्डीअपनी यात्रा को एक मंजिल के बजाय निरंतर विकास के तौर पर देखती हैं. उनका कहना है कि सफलता रातोंरात नहीं मिली है. यह अनुशासन, दृढ़ता और निरंतर सीखने की इच्छा पर आधारित है. वो आगे कहती हैं कि हमेशा हर मंच पर पूरी तैयारी के साथ उपस्थित होने और कड़ी मेहनत करने में विश्वास रखा है.
सफलता के बीच बाधाएं
सुधा रेड्डी बताती हैं कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि, ऐसे कई मौके आए जब लोगों ने मेरे बारे में गलत धारणाएं बनाई. लेकिन मैंने कभी भी रूढ़ियों को अपने भविष्य को तय करने नहीं दिया है. वो कहती हैं कि भावनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय, अपनी योग्यता और निरंतरता पर ध्यान केंद्रित किया. समय के साथ, विश्वसनीयता पूर्वाग्रह से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण साबित होती है.
फैशन, खेल और ग्लोबल मंच
सुधा रेड्डी का कहना है कि हर वैश्विक मंच का अपना अलग जरूरी महत्व रहा है. मेट गाला में रेड कार्पेट पर चलना यादगार था, न केवल फैशन के लिहाज से बल्कि वैश्विक मंच पर भारतीय शिल्प कौशल का प्रतिनिधित्व करने के लिहाज से भी बहुत शानदार पल रहा है. मिस वर्ल्ड से जुड़ना मेरे लिए बेहद व्यक्तिगत पल था.