Positive Parenting Tips: बच्चों की देखभाल करना माता-पिता के लिए सबसे जरूरी कामों में से एक हैं. आजकल वर्किंग पेरेंट्स के लिए बच्चों को टाइम देना कोई बड़ा टास्क करने से कम नहीं होता है. पूरे दिन ऑफिस में बिताने के बाद पेरेंट्स अपने बच्चों से मिलते हैं तब उनके व्यवहार में भी काफी अंतर देखने को मिलता है क्योंकि आप अपने में लगे होने से थकावट, चिढ़चिढ़ापन का शिकार हो जाते हैं. इससे बच्चों पर भी बेहद असर पड़ता है. बच्चों की मानसिक और शारीरिक ग्रोथ के लिए माता-पिता का मोरल सपोर्ट होना बहुत जरूरी है. यह उन्हें कॉन्फिडेंस से भरता है. बच्चों को मजबूती मिलती है. अगर आप भी अपने बच्चे को मजबूत और अच्छी ग्रोथ देना चाहते हैं तो उनकी पॉजिटिव पेरेंटिंग करना बहुत जरूरी है.
क्या हैं पॉजिटिव पेरेंटिंग के गुण- (What is positive parenting)
माता-पिता को यह समझना होगा कि बच्चों की भावनात्मक जरूरतें क्या हैं? उन्हें समझकर सही दिशा देना ही पेरेंटिंग कहलाता है. बच्चों के मन में जो भी नेगेटिव विचार उठ रहे हैं उनका सही से मूल्यांकन करना चाहिए और फिर उसे राइट डायरेक्शन देना ही पॉजिटिव पेरेंटिंग कहलाता है. इससे बच्चों का लगाव और झुकाव भी पेरेंट्स के प्रति बना रहता है और अपने व्यक्तित्व को भी मज़बूती मिलती है.
1. बच्चों की बात पर ध्यान-
हर माता-पिता को अपने बच्चों की बात को ध्यान से सुनना चाहिए. उन्हें अपनी बात रखने का मौका देना चाहिए. इससे उनके अंदर सेल्फ कॉन्फिडेंस तो बढ़ता ही है साथ ही वह भी आपको अहमियत देते हैं.
2. शांति से बातचीत करना-
अगर आपका बच्चा कोई मिस्टेक करता है तो उस पर चिल्लाना या मारने जैसी गलती ना करें. बल्कि, शांत रहकर बात करें और यह समझाएं कि उन्होंने क्या गलत किया था? अगर आप उन पर चिल्लाते हैं तो इसका गलत असर पड़ता है.
3. बच्चों की तारीफ करें-
जब भी बच्चा कुछ अच्छा काम करे उसकी तुरंत तारीफ जरूर करें. बच्चों की तारीफ करने से उन्हें कोई भी काम करने के लिए मोटिवेशन मिलता है. उनके अंदर आत्मविश्वास की वृध्दि होती है.
4. माहौल को अच्छा रखें-
बच्चे घर का माहौल देखकर ज्यादा सीखते हैं. इसलिए, अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा अच्छा व्यवहार करें, तो सबसे पहले आप उसे अपनाएं. बच्चा जैसा पेरेंट्स का व्यवहार देखता है वह वैसा ही व्यवहार करता है.
अच्छी परवरिश जरूरी
कॉन्फिडेंट और अच्छे व्यवहार वाले बच्चों की परवरिश करना पेरेंट्स के लिए सबसे आम लक्ष्यों में से एक है लेकिन यह सबसे मुश्किल भी है. बच्चों का कॉन्फिडेंस और व्यवहार जेनेटिक्स, माहौल, पेरेंटिंग स्टाइल और शुरुआती ज़िंदगी के अनुभवों के कॉम्बिनेशन से बनता है. लेकिन, पॉज़िटिव पेरेंटिंग स्ट्रेटेजी, लगातार बाउंड्री और स्किल डेवलपमेंट के मौके बच्चों को सेल्फ-एश्योर्ड, रिस्पेक्टफुल और सोशली काबिल इंसान बनने में मदद कर सकते हैं. कॉन्फिडेंट और अच्छे व्यवहार वाले बच्चों की परवरिश परफेक्शन या सख्त कंट्रोल के बारे में नहीं है, बल्कि ऐसा माहौल बनाने के बारे में है जो प्यार, स्ट्रक्चर और ग्रोथ के मौकों के बीच बैलेंस बनाए.
निर्णय की आजादी देना जरूरी
बच्चों को उम्र के हिसाब से सही चुनाव करने देने से इंडिपेंडेंस और सेल्फ-कॉन्फिडेंस बढ़ता है. बच्चे को दो कपड़ों में से चुनने दें या कोई ऐसी एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी चुनने दें जो उन्हें पसंद हो. अमेरिकन साइकोलॉजिस्ट में छपी 2000 की एक स्टडी के मुताबिक, बच्चे की आज़ादी को सपोर्ट करने से एक बेसिक साइकोलॉजिकल ज़रूरत पूरी होती है, जिससे अंदरूनी मोटिवेशन और हेल्दी डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलता है. साफ और एक जैसी बाउंड्री तय करें. बच्चे तब आगे बढ़ते हैं जब वे उम्मीदों और लिमिट को समझते हैं. बाउंड्री तय करने से बच्चों को ज़िम्मेदारी सिखाई जाती है और साथ ही आज़ादी तलाशने के लिए एक सुरक्षित फ्रेमवर्क मिलता है. डेवलपमेंटल साइकोलॉजी में पेरेंटिंग स्टाइल पर 1991 की एक स्टडी में पाया गया कि अथॉरिटेटिव पेरेंटिंग, जिसमें प्यार और साफ़ नियम होते हैं, उससे ज़्यादा सेल्फ-एस्टीम, सोशल कॉम्पिटेंस और बेहतर बिहेवियरल नतीजे वाले बच्चे पैदा होते हैं.