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Packaged Juices: पैकेज्ड जूस का सच, राघव चड्ढा की चिंता क्या हैं, शरीर के किन अंगों को हो सकता है नुकसान

Packaged Juices: पैकेज्ड जूस में मौजूद केमिकल्स को लेकर राघव चड्ढा संसद में चिंता जताई गई है. जानें ये सेहत के लिए कितना नुकसानदायक हैं, किन अंगों पर असर डालता हैं, एक्सपर्ट राय

Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: 2026-03-25 10:58:57

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Packaged Juices: वर्तमान दौर में पैकेज्ड जूस की बढ़ती खपत के बीच अब इससे आपकी स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. हाल ही में संसद में सांसद राघव चड्ढा ने इन इन पैकेज्ड जूस में मौजूद केमिकल्स को लेकर चिंता जाहिर की है. इसके बाद यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है. हालांकि, यह जानना आपके लिए बहुत जरूरी है कि क्या यह जूस सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक है. वैसे एक्सपर्ट कहते हैं कि पाश्चुरीकृत जूस खरीदें, लेबल आदि की जांच करें. ऐसे में फूडसेफ्टीहेल्पलाइन डॉट कॉम के संस्थापक सौरभ अरोरा और ऑरिगा रिसर्च (फार्मास्युटिकल टेस्टिंग, फूड टेस्टिंग और हर्बल टेस्टिंग सेवा प्रदाता) के उपाध्यक्ष पवन वत्स ने कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में बताया है जिन्हें आपको जानना चाहिए.

फ्लेवर्ड ड्रिंक्स से बनाएं दूरी

सही फ्रूट जूस का चुनाव करते समय, सबसे अच्छा ऑप्शन होता है बिना चीनी 100 प्रतिशत फलों का रस, उसके बाद कम चीनी और अधिक मात्रा में फलों की सामग्री वाला फ्रूट जूस और फिर फ्रूट जूस के अन्य पेय. सबसे लास्ट ऑप्शन में फ्लेवर्ड ड्रिंक्स आते हैं क्योंकि इनमें फल नहीं सिर्फ फलों का स्वाद होता है. इनसे बचें क्योंकि ये सिर्फ आपकी प्यास कम करते हैं. इसमें आपको सिर्फ चीनी और पानी ही मिलता है.

गलत पैकेजिंग से फफूंद और कवक का खतरा

बहुत फलों की शेल्फ लाइफ कम होती है और दूषित ताजे फलों से हानिकारक रोगाणु फ्रूट जूस में हैंडलिंग, पैकेजिंग और प्रसंस्करण के दौरान प्रवेश कर सकते हैं. फ्रूट जूस की अनुचित पैकेजिंग से उनमें फफूंद और कवक पनपने लगते हैं. कंपनियां आमतौर पर रसों को हाई टेम्परेचर पर जल्दी से पाश्चुरीकृत करते हैं ताकि वे रोगाणुओं, कवक आदि से मुक्त रहें और पैकेजिंग के आधार पर उनकी शेल्फ लाइफ 9 से 12 महीने तक बढ़े.

गलत स्टोरेज से दूषित हो सकता है जूस

कुछ जूस कोल्ड प्रेस्ड होते हैं और इन्हें तापमान नियंत्रित करके स्टोर करना बहुत जरूरी होता है. नहीं तो ये दूषित हो सकते हैं। खुले में रखे कोल्ड प्रेस्ड जूस कभी न खरीदें, जब तक कि वे फ्रीजर में न रखे गए हो.

क्वालिटी टेस्टिंग सुनिश्चित करती है सुरक्षा

ताजे फल कैमिकल कंटामिनेशन के प्रति संवेदनशील होते हैं क्योंकि कीटों के संक्रमण को रोकने के लिए उन पर कीटनाशकों का छिड़काव होता है. इसलिए, उपभोक्ताओं को फलों के रस और अन्य शीतल पेय केवल लाइसेंस प्राप्त FBO से ही लेना चाहिए. लाइसेंस प्राप्त FBO उत्पादों का नियमित टेस्ट करते हैं ताकि कैमिकल कंटामिनेशन नियामक सीमाओं के भीतर रहें.

शरीर के कई अंग प्रभावित

पैकेज्ड जूस का ज्यादा सेवन करने से शरीर के कई जरूरी अंग प्रभावित हो सकते है. इनमें मौजूद अतिरिक्त शुगर और प्रिजर्वेटिव्स सबसे पहले आपके लिवर पर असर डालते हैं. जिससे फैटी लिवर का खतरा बढ़ सकता है. वहीं, शुगर की ज्यादा मात्रा दिल की सेहत को नुकसान पहुंचाकर हार्ट डिजीज के जोखिम को बढ़ा सकती है. इसका असर किडनी पर भी पड़ता है. खासकर जब इनमें सोडियम या अन्य केमिकल्स मौजूद होते हैं.

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से बताई गई है. फ्रूट जूस का सेवन करते समय लेबल, गुणवत्ता प्रमाण और लाइसेंस संबंधी जानकारी अवश्य जांचें. किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए एक्सपर्ट की राय लें.

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Packaged Juices: वर्तमान दौर में पैकेज्ड जूस की बढ़ती खपत के बीच अब इससे आपकी स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. हाल ही में संसद में सांसद राघव चड्ढा ने इन इन पैकेज्ड जूस में मौजूद केमिकल्स को लेकर चिंता जाहिर की है. इसके बाद यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है. हालांकि, यह जानना आपके लिए बहुत जरूरी है कि क्या यह जूस सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक है. वैसे एक्सपर्ट कहते हैं कि पाश्चुरीकृत जूस खरीदें, लेबल आदि की जांच करें. ऐसे में फूडसेफ्टीहेल्पलाइन डॉट कॉम के संस्थापक सौरभ अरोरा और ऑरिगा रिसर्च (फार्मास्युटिकल टेस्टिंग, फूड टेस्टिंग और हर्बल टेस्टिंग सेवा प्रदाता) के उपाध्यक्ष पवन वत्स ने कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में बताया है जिन्हें आपको जानना चाहिए.

फ्लेवर्ड ड्रिंक्स से बनाएं दूरी

सही फ्रूट जूस का चुनाव करते समय, सबसे अच्छा ऑप्शन होता है बिना चीनी 100 प्रतिशत फलों का रस, उसके बाद कम चीनी और अधिक मात्रा में फलों की सामग्री वाला फ्रूट जूस और फिर फ्रूट जूस के अन्य पेय. सबसे लास्ट ऑप्शन में फ्लेवर्ड ड्रिंक्स आते हैं क्योंकि इनमें फल नहीं सिर्फ फलों का स्वाद होता है. इनसे बचें क्योंकि ये सिर्फ आपकी प्यास कम करते हैं. इसमें आपको सिर्फ चीनी और पानी ही मिलता है.

गलत पैकेजिंग से फफूंद और कवक का खतरा

बहुत फलों की शेल्फ लाइफ कम होती है और दूषित ताजे फलों से हानिकारक रोगाणु फ्रूट जूस में हैंडलिंग, पैकेजिंग और प्रसंस्करण के दौरान प्रवेश कर सकते हैं. फ्रूट जूस की अनुचित पैकेजिंग से उनमें फफूंद और कवक पनपने लगते हैं. कंपनियां आमतौर पर रसों को हाई टेम्परेचर पर जल्दी से पाश्चुरीकृत करते हैं ताकि वे रोगाणुओं, कवक आदि से मुक्त रहें और पैकेजिंग के आधार पर उनकी शेल्फ लाइफ 9 से 12 महीने तक बढ़े.

गलत स्टोरेज से दूषित हो सकता है जूस

कुछ जूस कोल्ड प्रेस्ड होते हैं और इन्हें तापमान नियंत्रित करके स्टोर करना बहुत जरूरी होता है. नहीं तो ये दूषित हो सकते हैं। खुले में रखे कोल्ड प्रेस्ड जूस कभी न खरीदें, जब तक कि वे फ्रीजर में न रखे गए हो.

क्वालिटी टेस्टिंग सुनिश्चित करती है सुरक्षा

ताजे फल कैमिकल कंटामिनेशन के प्रति संवेदनशील होते हैं क्योंकि कीटों के संक्रमण को रोकने के लिए उन पर कीटनाशकों का छिड़काव होता है. इसलिए, उपभोक्ताओं को फलों के रस और अन्य शीतल पेय केवल लाइसेंस प्राप्त FBO से ही लेना चाहिए. लाइसेंस प्राप्त FBO उत्पादों का नियमित टेस्ट करते हैं ताकि कैमिकल कंटामिनेशन नियामक सीमाओं के भीतर रहें.

शरीर के कई अंग प्रभावित

पैकेज्ड जूस का ज्यादा सेवन करने से शरीर के कई जरूरी अंग प्रभावित हो सकते है. इनमें मौजूद अतिरिक्त शुगर और प्रिजर्वेटिव्स सबसे पहले आपके लिवर पर असर डालते हैं. जिससे फैटी लिवर का खतरा बढ़ सकता है. वहीं, शुगर की ज्यादा मात्रा दिल की सेहत को नुकसान पहुंचाकर हार्ट डिजीज के जोखिम को बढ़ा सकती है. इसका असर किडनी पर भी पड़ता है. खासकर जब इनमें सोडियम या अन्य केमिकल्स मौजूद होते हैं.

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से बताई गई है. फ्रूट जूस का सेवन करते समय लेबल, गुणवत्ता प्रमाण और लाइसेंस संबंधी जानकारी अवश्य जांचें. किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए एक्सपर्ट की राय लें.

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