Sanitary Pads in school: महावारी या मेंस्ट्रुअल साइकल महिलाओं के जीवन का एक हिस्सा है. पीरियड्स से हर महिला को होकर गुजरना पड़ता है. आज भी कई जगहों पर पीरियड्स और सैनेटरी पैड्स को लेकर खुलकर बात नहीं की जाती है. बच्चों को शुरूआत से ही सैनेटरी पैड और पीरियड्स के बारे में बताना चाहिए. क्या कभी आपने सोचा है कि स्कूल में पीरियड्स अगर अचानक शुरू हो जाए तो ऐसे में क्या होगा. इसलिए बच्चियों को अपने साथ सैनेटरी पैड ले जाने देना चाहिए.
कुछ स्कूलों में इसे लेकर विरोध किया जाता है. इसे देखते हुए शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों को सैनेटरी पैड मुहैया कराने का आदेश दिया है. आइए जानते हैं अगर स्कूल में सैनिटरी पैड नहीं ले जाने दें तो आप क्या कर सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों को दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीरियड्स या मेंस्ट्रुअल साइकिल महिलाओं का अधिकार और उनके जीवन का हिस्सा है. इसलिए हर स्कूल को अब फ्री में सैनेटरी पैड उपलब्ध कराना होगा. सरकार ने कहा कि अगर प्राइवेट स्कूलों में पैड की सुविधा अगर नहीं उपलब्ध कराई जाएगी तो ऐसे में उस स्कूल का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा. कोर्ट ने साफ किया कि सरकारी और प्राइवेट सभी स्कूलों को यह आदेश मानते हुए अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी.
कैसे कर सकते हैं शिकायत?
अगर कोई स्कूल छात्राओं के सैनेटरी पैड ले जाने पर विरोध जताता है तो ऐसे में आप उसकी शिकायत भी कर सकते हैं. इसके लिए आप लिखित तौर पर स्कूल में शिकायत करें. स्कूल के स्टाफ द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाने पर आप जिला शिक्षा अधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को शिकायत करें और उनकी मदद करें. इसके अलावा अगर स्कूल द्वारा फ्री सैनेटरी पैड भी नहीं दिया जा रहा है तो भी आप इसकी शिकायत कर सकते हैं.
महिलाओं के लिए सैनेटरी पैड क्यों है जरूरी?
सैनेटरी पैड महिलाओं के लिए इसलिए जरूरी है क्योंकि इसे लगाने से रक्तस्राव को अवशोषित किया जा सकता है. जिससे कहीं न कहीं संक्रमण होने का खतरा कम होता है साथ ही एलर्जी और अन्य बीमारियों का खतरा भी कम होता है और बैक्टीरिया से भी बचाव होता है. इसलिए सफाई का ध्यान रखते हुए महिलाओं को पैड का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए.