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Season Change Diseases: मौसम में बदलाव आते ही लोगों में सर्दी-जुकाम, फ्लू, बुखार या एलर्जी जैसी समस्याओं में बढ़ोतरी होने लगती हैं. तापमान, नमी और वातावरण में होने वाले परिवर्तन का असर सीधे हमारे शरीर की इम्यूनिटी के क्षमता पर पड़ता है. यही वजह है कि मौसम परिवर्तन के दौरान कई लोग आसानी से बीमार पड़ जाते हैं.
बच्चे साल में 5-7 बार सर्दी-जुकाम से पीड़ित
चिकित्सा अनुसंधान के मुताबिक, अधिकांश वयस्क वर्ष में 2-4 बार और बच्चे 5-7 बार सर्दी-जुकाम से पीड़ित होते हीं है. यह लगभग वर्ष में मौसमों के परिवर्तन की संख्या के बराबर और उसकी वजह से होता है. जब भी हम मौसम में बदलाव देखते हैं , तो वातावरण में एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों की संख्या बढ़ जाती है और हवा में लगभग 200 वायरस तक पहुंच जाती है. ये वायरस ही ज्यादातर लोगों को बीमार करने के लिए जिम्मेदार होते हैं.
मौसम बदलने के कारण सर्दी क्यों लगती है?
मौसम बदलने पर अक्सर लोगों को थोड़ी अस्वस्थता महसूस होती है. तापमान में बदलाव विभिन्न प्रकार के वायरसों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करते हैं. जो फिर कई तरह के संक्रामक रोगों को फैलाते हैं. इस वायरस का सबसे आम प्रकार ह्यूमन राइनोवायरस है. जो लगभग 40 प्रतिशत सर्दी-जुकाम का कारण बनता है. ये वायरस ठंडे मौसम में, जैसे कि वसंत और सर्दियों में, पनपते हैं.
वायरल संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील
गर्मी के मौसम में, मौसमी एलर्जी से पीड़ित लोगों को कई वायरस नाक बहने और आंखों में खुजली होने लगती है. उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली इन एलर्जी कारकों पर प्रतिक्रिया करने में व्यस्त हो जाती है, जिससे वे वायरल संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं. इन्फ्लूएंजा वायरस फ्लू का कारण बनता है जो मुख्य रूप से तब विभाजित और फैलता है जब हवा ठंडी और शुष्क होती है, यह सर्दियों या ठंड के दिनो में ऐसा होता है.