Union Budget 2026 Key Highlights: 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 से पहले वेतनभोगी वर्ग और मध्यम वर्ग के बीच टैक्स छूट की सीमा को लेकर चर्चा सबसे तेज है. वर्तमान में नई टैक्स व्यवस्था के तहत प्रभावी रूप से ₹12.75 लाख (स्टैंडर्ड डिडक्शन सहित) तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता है.
Union Budget 2026 Live
Union Budget 2026 Key Highlights: जैसे-जैसे केंद्रीय बजट 2026 (Union Budget 2026) नजदीक आ रहा है आयकर देने वाले करदाताओं की उम्मीदें फिर बढ़ गई हैं. सबसे बड़ी उम्मीद टैक्स में राहत (Tax Relief) को लेकर है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में बजट पेश करेंगी. पिछले साल के “बिग बैंग बजट” में नए टैक्स सिस्टम के तहत करदाताओं को बड़ी राहत मिली थी, इसलिए इस बार भी उम्मीदें ज्यादा हैं.
बजट 2025 में सरकार ने नए टैक्स सिस्टम के तहत सालाना 12 लाख रुपये तक की आय पर जीरो टैक्स का ऐलान किया था. साथ ही नौकरीपेशा लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया था. इसके अलावा सेक्शन 87A के तहत टैक्स छूट को 25,000 से बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दिया गया जिससे कई मिडिल क्लास करदाताओं का टैक्स पूरी तरह खत्म हो गया.हालांकि नया टैक्स सिस्टम चुनने वालों को तो फायदा मिला लेकिन पुराने टैक्स सिस्टम में रहने वालों के लिए टैक्स स्लैब, छूट और कटौतियों में कोई बदलाव नहीं किया गया.
इसी वजह से बजट 2026 से पहले पुराने टैक्स सिस्टम के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. सेक्शन 80C, 80D, होम लोन ब्याज (Section 24b) और NPS जैसी कटौतियों में कई सालों से कोई बदलाव नहीं हुआ है. नए टैक्स सिस्टम में बार-बार राहत मिलने से कई लोग सोच रहे हैं कि क्या सरकार अब पुराने टैक्स सिस्टम को धीरे-धीरे खत्म कर देगी या फिर एक आखिरी राहत देकर उसे जारी रखेगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 में सरकार यह साफ कर सकती है कि पुराना टैक्स सिस्टम खत्म होगा या दोनों सिस्टम साथ-साथ चलेंगे.
यह भी चर्चा है कि नए टैक्स सिस्टम में कुछ सीमित कटौतियां जोड़ी जा सकती हैं, ताकि बीमा, रिटायरमेंट और घर में निवेश करने वालों को भी फायदा मिले.
टैक्स स्लैब के अलावा करदाता चाहते हैं कि इनकम टैक्स नियम सरल हों रिफंड जल्दी मिले और कागजी झंझट कम हो. आज भी ITR प्रोसेसिंग में देरी, AIS में गड़बड़ी, TDS से जुड़ी समस्याएं और बार-बार आने वाले नोटिस लोगों के लिए परेशानी बने हुए हैं. सीनियर सिटीजन के लिए भी इस बार राहत की उम्मीद है क्योंकि नए टैक्स सिस्टम में उम्र के आधार पर कोई खास छूट नहीं है. रिटायर्ड लोगों के लिए अलग टैक्स स्लैब ज्यादा छूट या हेल्थ से जुड़ी टैक्स राहत की मांग बढ़ रही है.
कुल मिलाकर भले ही इस बार बहुत बड़े टैक्स कट की उम्मीद न हो लेकिन बजट 2026 से स्पष्टता, सरलता और स्थिरता की उम्मीद की जा रही है.
सबकी नजर इस बात पर होगी कि सरकार पुराने टैक्स सिस्टम को खत्म करने का संकेत देती है या नए टैक्स सिस्टम में और बदलाव करती है.
Union Budget 2026 Live: कॉन्कॉर्ड कंट्रोल सिस्टम्स के संयुक्त प्रबंध निदेशक गौरव लाथ के अनुसार, आगामी बजट 2026-27 रेलवे तकनीक क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी मोड़ साबित हो सकता है. उद्योग जगत ने रेलवे पारिस्थितिकी तंत्र में सुरक्षा, सुरक्षा और नवाचार को प्राथमिकता देने के सरकार के प्रयासों की सराहना की है, विशेष रूप से कवच 4.0 (Kavach 4.0) और ग्रीन हाइड्रोजन को अपनाने की दिशा में किए गए कार्यों को. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बजट में 'ग्रीन हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर' के वाणिज्यिक विस्तार के लिए विशेष नीतिगत समर्थन और बजटीय आवंटन की आवश्यकता है, जिससे भारतीय रेल न केवल सुरक्षित बने बल्कि वैश्विक स्तर पर टिकाऊ परिवहन का एक उत्कृष्ट मॉडल पेश करे.
Union Budget 2026 Live: Impactree.ai की संस्थापक और CEO राजश्री साई के अनुसार, केंद्रीय बजट 2026 भारत के MSME क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को फिर से परिभाषित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिसमें छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए 'क्लाइमेट फाइनेंस' बुनियादी ढांचे को मजबूत करना अनिवार्य हो गया है. उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार ऐसे डिजिटल इकोसिस्टम को प्रोत्साहित करेगी जो MSMEs को उनके टिकाऊ प्रदर्शन को वित्तीय साख में बदलने में मदद करें, जिससे उनके लिए 'ग्रीन कैपिटल' तक पहुंच आसान हो सके. राजश्री साई का मानना है कि डेटा-संचालित प्लेटफॉर्म और तकनीक के माध्यम से एक 'ग्रीन क्रेडिट' फ्रेमवर्क तैयार किया जाना चाहिए, जहां किसी उद्यम की सामाजिक और पर्यावरणीय लचीलापन उसकी बैलेंस शीट पर एक 'एसेट' के रूप में दिखे. यह पहल न केवल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के बदलावों के बीच भारत को एक निवेश योग्य विकास मॉडल प्रदान करेगी, बल्कि MSMEs को भारत की टिकाऊ औद्योगिक क्रांति का अग्रदूत बनने के लिए भी सशक्त बनाएगी.
Union Budget 2026 Live: बजट 2026-27 से पहले भारत का क्रिप्टो और वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) सेक्टर एक बड़े नीतिगत बदलाव की उम्मीद कर रहा है. 'लिमिनल कस्टडी' के इंडिया हेड मनहर गरेग्रत के अनुसार, अब समय आ गया है कि भारत क्रिप्टो पर केवल प्रवर्तन और भारी कराधान से आगे बढ़कर इसके बाजार ढांचे और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करे. उद्योग विशेषज्ञों का तर्क है कि वर्तमान में लागू 1% TDS और 30% फ्लैट टैक्स जैसी सख्त नीतियों के कारण भारतीय निवेशक और ट्रेडिंग वॉल्यूम विदेशी प्लेटफॉर्म्स की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे पारदर्शिता कम हो रही है और सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है. गरेग्रत ने सुझाव दिया है कि ट्रांजेक्शन लेवल पर लगने वाले भारी टैक्स की जगह 'VDA ट्रांजेक्शन टैक्स' पर विचार किया जाना चाहिए. इससे न केवल लेनदेन की बेहतर निगरानी संभव होगी और सरकार के लिए राजस्व के विश्वसनीय स्रोत बनेंगे, बल्कि यह हाई-रिस्क डेरिवेटिव्स पर निर्भरता कम कर पूरे क्रिप्टो इकोसिस्टम में स्थिरता और पारदर्शिता लाएगा.
Union Budget 2026 Live: स्केल शेरपाज़ की MD अंजना घोष ने कहा कि पिछले साल के बजट में फिस्कल कंसोलिडेशन, कैपेक्स पर आधारित ग्रोथ और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस था, साथ ही स्किलिंग और फॉर्मलाइज़ेशन पर भी कदम उठाए गए थे, लेकिन FMCG जैसे कंजम्प्शन वाले सेक्टर पर असर धीरे-धीरे हुआ है, खासकर ग्रामीण और जनरल ट्रेड मार्केट में.
उन्होंने कहा, "इस साल, उम्मीद है कि कंजम्प्शन को फिर से शुरू करने और डिस्पोजेबल इनकम को बढ़ाने की दिशा में तेज़ी से बदलाव होगा, खासकर ग्रामीण और सेमी-अर्बन भारत में, जो FMCG की लगभग 60% डिमांड को चलाता है."
घोष ने कहा कि नौकरियों और स्किलिंग के लिए टारगेटेड सपोर्ट बहुत ज़रूरी है, क्योंकि FMCG इकोसिस्टम 3 मिलियन से ज़्यादा फ्रंटलाइन नौकरियों को सपोर्ट करता है, जबकि किराना स्टोर के लिए तेज़ डिजिटल और लॉजिस्टिक्स इनेबलमेंट, जो FMCG सेल्स का लगभग 90% हिस्सा हैं, साथ ही GST को रैशनलाइज़ करने और ईज़-ऑफ-डूइंग-बिज़नेस सुधारों से ब्रांड्स को सस्टेनेबली बढ़ने में मदद मिल सकती है.
Union Budget 2026 Live: भारत के आर्थिक इतिहास में बजट 1957-58 अपनी क्रांतिकारी कर नीतियों के लिए जाना जाता है, जब तत्कालीन वित्त मंत्री टी.टी. कृष्णमचारी ने पहली बार 'वेल्थ टैक्स' की शुरुआत की थी. निकोलस कैलडोर समिति के सुझावों पर आधारित इस कर का मुख्य उद्देश्य केवल राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि देश में बढ़ती आर्थिक असमानता को कम करना और कर आधार को व्यापक बनाना था. इसके तहत व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) और कंपनियों की 'नेट वेल्थ' पर टैक्स लगाया गया, जिसमें लग्जरी कारें, आभूषण और अतिरिक्त रियल एस्टेट जैसी अनुत्पादक संपत्तियां शामिल थीं. हालांकि, समय के साथ इसे वसूलने की लागत इसके लाभ से अधिक होने लगी और डेटा के अभाव में इसकी चोरी भी बढ़ गई. अंततः, कर प्रणाली को सरल बनाने और 'सुपर रिच' पर सरचार्ज लगाने के उद्देश्य से 2015 के बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया.
Union Budget 2026 Live: इस अंतर ने बजट 2026 से पहले पुरानी टैक्स व्यवस्था के भविष्य पर खास ध्यान दिया है. सेक्शन 80C, सेक्शन 80D, सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन का ब्याज और NPS बेनिफिट्स जैसे डिडक्शन सालों से रिवाइज नहीं किए गए हैं. नई व्यवस्था के तहत बार-बार स्लैब में राहत मिलने से, कई टैक्सपेयर्स सवाल कर रहे हैं कि क्या सरकार आखिरकार पुरानी टैक्स व्यवस्था को खत्म कर देगी या एक आखिरी दौर की राहत देकर इसे चालू रखेगी.
Union Budget 2026 Live: बजट पेश होने से ठीक एक दिन पहले संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाता है. अगर बजट भविष्य की योजना है, तो इकोनॉमिक सर्वे पिछले एक साल का विस्तृत 'रिपोर्ट कार्ड' होता है. इसे वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की आर्थिक इकाई द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) की देखरेख में तैयार किया जाता है. इस बार इकोनॉमिक सर्वे बजट से तीन दिन पहले 29 जनवरी को ही पेश कर दिया गया है.
Union Budget 2026 Live: 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 से पहले वेतनभोगी वर्ग और मध्यम वर्ग के बीच टैक्स छूट की सीमा को लेकर चर्चा सबसे तेज है. वर्तमान में नई टैक्स व्यवस्था के तहत प्रभावी रूप से ₹12.75 लाख (स्टैंडर्ड डिडक्शन सहित) तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता है. लेकिन बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए, अब इस सीमा को ₹15 लाख तक बढ़ाने की पुरजोर मांग की जा रही है.
Union Budget 2026 Live: भारत के प्रत्यक्ष कर इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है. 1 अप्रैल, 2026 से छह दशक पुराने 'आयकर अधिनियम 1961' की जगह 'आयकर अधिनियम 2025' प्रभावी हो जाएगा. मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह केवल एक कानूनी बदलाव नहीं है, बल्कि यह टैक्स फाइलिंग को आसान बनाने और विवादों को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. बजट 2026 में इस नए कानून के सुचारू कार्यान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं होने की उम्मीद है.
Union Budget 2026 Live: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले बजट 2026 में सरकार का मुख्य फोकस बुनियादी ढांचे के विकास, भविष्य की तकनीक और आत्मनिर्भरता पर रहने की उम्मीद है. विशेषज्ञों के अनुसार, रेलवे के लिए ₹2.65 लाख करोड़ से अधिक का आवंटन हो सकता है, जिसमें 200 नई वंदे भारत ट्रेनों और 'कवच' सुरक्षा प्रणाली के विस्तार पर जोर होगा. रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए बजट आवंटन ₹7.5 लाख करोड़ के पार जा सकता है, जबकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर उत्पादन के लिए नए वित्तीय प्रोत्साहन (Incentives) मिलने की संभावना है. साथ ही, कृषि क्षेत्र में 'पीएम-किसान' की राशि में बढ़ोतरी और रिन्यूएबल एनर्जी (विशेषकर सौर ऊर्जा और न्यूक्लियर मिशन) के लिए बड़े निवेश की घोषणा की जा सकती है, जिससे 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को मजबूती मिले.
Union Budget 2026 Live: भारत के आर्थिक इतिहास में बजट केवल अंकों का खेल नहीं रहा, बल्कि देश के नवनिर्माण की कहानी रहा है. स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर, 1947 को पहले वित्त मंत्री आर.के. शनमुखम चेट्टी द्वारा पेश किया गया था. वह बजट महज 197 करोड़ रुपये के कुल राजस्व वाला था, जो आज के खरबों रुपये के बजट के मुकाबले एक छोटी सी शुरुआत थी.
Union Budget 2026 Live: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल का दूसरा पूर्ण बजट 1 फरवरी को पेश होने जा रहा है. यह बजट न केवल मोदी सरकार की आगामी 4 वर्षों की दिशा तय करेगा, बल्कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर एक मजबूत कदम माना जा रहा है. 2025 के चुनाव बाद वाले बजट के बाद, अब सरकार से उम्मीद है कि वह वित्तीय अनुशासन और जनकल्याण के बीच संतुलन बनाकर एक बड़ा आर्थिक बदलाव लाएगी.
Union Budget 2026 Live: यूनियन बजट केवल आय और व्यय का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक 'ब्लूप्रिंट' होता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत, सरकार को हर वित्तीय वर्ष के लिए संसद में अपना 'वार्षिक वित्तीय विवरण' पेश करना अनिवार्य होता है. 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष के लिए यह बजट ही तय करता है कि देश किस दिशा में आगे बढ़ेगा.
Union Budget 2026 Live: बजट 2026 इनकम टैक्स उम्मीदें लाइव अपडेट्स: जैसे-जैसे यूनियन बजट 2026-27 पास आ रहा है, मिडिल क्लास बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए डायरेक्ट इनकम टैक्स में राहत की उम्मीद कर रहा है. मुख्य उम्मीदों में स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करना और नए टैक्स सिस्टम के तहत टैक्स-फ़्री इनकम लिमिट को और बढ़ाना शामिल है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज़्यादा अपफ्रंट राहत से सैलरी पाने वाले टैक्सपेयर्स और पेंशनर्स के लिए डिस्पोजेबल इनकम तुरंत बढ़ सकती है, जिससे परिवारों को बिना किसी मुश्किल टैक्स प्लानिंग के रोज़ाना के खर्च, EMI और सेविंग्स मैनेज करने में मदद मिलेगी.
Union Budget 2026 Live: घर की बढ़ती कीमतों के साथ, होम लोन इंटरेस्ट डिडक्शन और HRA छूट को लेकर उम्मीदें भी बढ़ गई हैं. आम आदमी चाहता है कि बजट 2026 में सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन इंटरेस्ट डिडक्शन बढ़ाया जाए और HRA लिमिट को मौजूदा किराए की दरों के हिसाब से बदला जाए. यह मेट्रो शहरों में रहने वाले सैलरी पाने वाले टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है.
Union Budget 2026 Live:आम आदमी की यूनियन बजट 2026 से सबसे बड़ी उम्मीद इनकम टैक्स में राहत है. जबकि नए टैक्स सिस्टम में टैक्स-फ्री इनकम लिमिट पहले ही Rs 12 लाख कर दी गई है. महंगाई के दबाव को देखते हुए, टैक्सपेयर्स अब चाहते हैं कि टैक्स-फ्री लिमिट को और बढ़ाकर Rs 15 लाख सालाना इनकम कर दिया जाए. मिडिल क्लास और सैलरीड क्लास को उम्मीद है कि बजट 2026 में सरकार इनकम टैक्स छूट लिमिट बढ़ाकर डिस्पोजेबल इनकम बढ़ाने पर फोकस करेगी, जिससे रोजाना के खर्चों और EMI को मैनेज करना आसान हो जाएगा.
Union Budget 2026 Live: बजट 2026 से पहले सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार पुराने टैक्स सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर देगी. नए टैक्स सिस्टम को ज़ोर-शोर से प्रमोट किया गया है, जबकि पुराने सिस्टम के तहत डिडक्शन सालों से वैसे ही रहे हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट 2026 में सरकार या तो पुराने टैक्स सिस्टम के लिए सनसेट टाइमलाइन का ऐलान करेगी या आखिरी राहत और क्लैरिटी देगी. यह फैसला मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स के लिए बहुत ज़रूरी होगा.
Union Budget 2026 Live: लंबे समय की बचत को मज़बूत करने के लिए, आम आदमी NPS, हेल्थ इंश्योरेंस और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) पर ज़्यादा टैक्स छूट चाहता है. बजट 2026 में, NPS के लिए बेहतर टैक्स फ़ायदे, सेक्शन 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस डिडक्शन में बढ़ोतरी और SGBs को फिर से शुरू करने की ज़ोरदार मांग है. बढ़ते मेडिकल खर्च और अनिश्चित बाज़ारों के बीच, टैक्सपेयर्स सुरक्षित और टैक्स-कुशल इन्वेस्टमेंट ऑप्शन चाहते हैं.
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